कानपुर हादसा : मौत को मात देकर घर लौटे पति-पत्नी

Published at :23 Nov 2016 5:20 AM (IST)
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कानपुर हादसा : मौत को मात देकर घर लौटे पति-पत्नी

कुचायकोट : कानपुर में हुई ट्रेन दुर्घटना में शामिल बलथरी के दंपती मौत को मात देकर सकुशल घर लौट आये. मंगलवार को उनके घर आने की खबर पर उन्हें देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लगी रही. लोग आंखों देखी घटना सुन कर कांप जा रहे थे. हृदय विदारक घटना का मंजर अब भी दंपती […]

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कुचायकोट : कानपुर में हुई ट्रेन दुर्घटना में शामिल बलथरी के दंपती मौत को मात देकर सकुशल घर लौट आये. मंगलवार को उनके घर आने की खबर पर उन्हें देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लगी रही. लोग आंखों देखी घटना सुन कर कांप जा रहे थे. हृदय विदारक घटना का मंजर अब भी दंपती की आंखों में नाच रहा है. हादसे के बाद पति-पत्नी खामोश जैसे हो गये हैं. बता दें कि कुचायकोट थाना क्षेत्र के बलथरी गांव के निवासी नरेंद्र शाही इंदौर के मयूर में घर बना कर रहते हैं.

उनकी ससुराल यूपी के कुशीनगर जिले के तरेया सुजान क्षेत्र के किनवारी टोला में है. साला राधेश्याम राय का 24 नवंबर को तिलक था. वे पटना-इंदौर एक्सप्रेस में एस-वन में अपनी पत्नी सुमन शाही के साथ आ रहे थे. ट्रेन कानपुर के पुखरायां स्टेशन के समीप 3.10 बजे पहुंची, तो अचानक पटाखा जैसी आवाज निकली. सब कुछ मंजर में तब्दील हो गया. किसी तरह आपातकालीन खिड़की से बाहर निकले. पत्नी को खींच कर बाहर निकला. चारों तरफ खून देख हौसला टूट गया. बड़ी मुश्किल से घर फोन लगा और लोगों को ट्रेन हादसे की जानकारी देते हुए खुद को सकुशल होने का संदेश दिया.

नरेंद्र शाही व पत्नी सुमन शाही की आंखों के सामने नाच रहा मौत का मंजर.
ईश्वर के रूप में पहुंचे थे टीटीइ
नरेंद्र शाही तथा उनकी पत्नी सुमन शाही ने बताया कि एस-वन में टिकट कन्फर्म नहीं होने के कारण टीटीइ ने दोनों को एस-8 में बैठने की जगह दे दी. हादसे में एस-वन कोच के परखचे उड़ गये थे. सबसे अधिक इस कोच के यात्रियों की मौत हुई. दंपती का मानना है कि इनके लिए टीटीइ के रूप में खुद भगवान आ गये थे, तभी वे सकुशल बच पाये.
अस्पताल पहुंचाने में किया सहयोग
ट्रेन हादसे में घायल लोगों को ट्रेन से खींच कर बाहर निकालने और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में इस दंपती ने सकारात्मक भूमिका निभायी. नरेंद्र ने बताया कि जब झटके के बाद ट्रेन की बोगी बिखर गयी. जब मैं बाहर खिड़की से निकला, तो बचाने की आवाज निकल रही थी. पत्नी को बाहर निकाला और दोनों ने मिल कर 35-40 लोगों को ट्रेन से बाहर निकाला. तब तक सुबह हो गयी थी. प्रशासन के अधिकारी और पुलिस के जवान पहुंच गये थे. घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने में पूरा दिन गुजर गया.
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