आरोपितों की तलाश में सीवान में छापेमारी

Published at :29 Aug 2016 5:58 AM (IST)
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आरोपितों की तलाश में सीवान में छापेमारी

गोपालगंज : खजूरबानी कांड के आरोपितों की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है. अब तक फरार शराब माफियाओं का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है. इस कांड के मुख्य सरगना रूपेश शुक्ला उर्फ पंडित तथा ग्रहण पासी पुलिस के लिए चुनौती बनता जा रहा है. पुलिस के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि […]

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गोपालगंज : खजूरबानी कांड के आरोपितों की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है. अब तक फरार शराब माफियाओं का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है. इस कांड के मुख्य सरगना रूपेश शुक्ला उर्फ पंडित तथा ग्रहण पासी पुलिस के लिए चुनौती बनता जा रहा है. पुलिस के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि इनके करीब पुलिस पहुंच चुकी है.

हालांकि पुलिस की अब तक की कार्रवाई पानी में लाठी पीटने जैसी साबित हुई है. पुलिस की पूरी टीम यूपी के गोरखपुर से लेकर सीवान और छपरा के बाद अब चंपारण में छापेमारी कर रही है. इनके सगे-संबंधी और रिश्तेदारों के यहां ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है. पुलिस की पकड़ से अब भी कैलाशो देवी, रीता देवी, इंदु देवी, जमाल साह, माना देवी, जितू मियां, इरशाद मियां, मनोज रावत, सुनील महतो, सुनील यादव, प्रमोद कुमार मांझी, रूपेश शुक्ला और ग्रहण मांझी बाहर बताये जा रहे हैं.

पुलिस के वरीय अधिकारी फिलहाल खजूरबानी कांड पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं. पुलिस कार्रवाई में जुटी हैं.
पंडित की गिरफ्तारी से खुलेगा कांड का राज
खजूरबानी कांड का असली कसुरवार रूपेश शुक्ला उर्फ पंडित है. सीवान जिले के जामो बाजार थाना क्षेत्र के जलालपुर के रहने वाले धनेश्वर शुक्ला का बेटा पंडित जो हरखुआ बरइ टोला में रह कर शराब के कारोबार को संचालित करता था. नगीना चौधरी की पुलिस के समक्ष दिये गये इकबालिया बयान पर यकिन करे तो 15 अगस्त को तैयार किये गये शराब के लिए रूपेश शुक्ला ने ही कोई दवा दिया था. जिससे एक बाल्टी पानी मे एक बुंद दवा डालने पर शराब तैयार हो जाता था. उसी शराब के पीने से 21 लोगों की मौत और पांच लोगों की आंखों की रौशनी जा चुकी है.
ऐसे में पुलिस के लिए पंडित की गिरफ्तारी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. पंडित के जरीये ही कांड का खुलासा हो जायेगा कि आखिर वह कौन सा केमिकल था जिसने लोगों की जान ली.
महिलाओं की मांग उजाड़ कर शांत हुआ खजूरबानी
खजूरबानी अब शांत हो चुका है. इस शांति के पीछे 21 लोगों की मौत की काला अध्याय छुपा हुआ है. खजूरबानी में चारों तरफ सन्नाटा दिख रहा. उत्पाद विभाग के जमादार अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ यहां की स्थिति पर निगरानी रख रहे है. खजूरबानी जो सुबह पांच बजे से रात के नौ बजे तक गुलजार रहता था. यहां अब खोजने पर भी आदमी नहीं मिलता. यहां 1980 के दशक से शराब बना कर बेचने का कारोबार चलता था. ताड़ी के आड़ में शराब का कारोबार पुलिस और उत्पाद विभाग के सेटिंग पर जारी था. इस बीच 15 अगस्त को शराब पीने से 21 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने जो कार्रवाई किया है उसके बाद खजूरबानी भी उजड़ने की कगार पर है.
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