सरकारी योजनाओं पर ग्रहण!

Published at :14 Aug 2016 6:08 AM (IST)
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सरकारी योजनाओं पर ग्रहण!

उदासीनता . गांव का सर्वे नहीं होने से सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण में पेच गंडक नदी की धारा बदलने से दियारे के 32 गांव आज बेचिरागी होकर रह गये हैं. इन गांवों में कभी नदी की धारा बहती थी. 1916 में हुए हाल सर्वे में नदी बहने के कारण गांवों का सर्वे नहीं हो […]

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उदासीनता . गांव का सर्वे नहीं होने से सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण में पेच

गंडक नदी की धारा बदलने से दियारे के 32 गांव आज बेचिरागी होकर रह गये हैं. इन गांवों में कभी नदी की धारा बहती थी. 1916 में हुए हाल सर्वे में नदी बहने के कारण गांवों का सर्वे नहीं हो सका. आज नदी की धारा बदल चुकी है. फिर से नया गांव बस चुका है. यहां सर्वे नहीं होने से विकास कार्य पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है.
गोपालगंज : सरकार की अति महत्वाकांक्षी परियोजना गंडक नदी पर बनाये जा रहे महासेतु के लिए बननेवाले एप्रोच रोड का निर्माण पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. सारण और चंपारण को जोड़नेवाले सत्तरघाट से केसरिया महासेतु के लिए एप्रोच रोड तथा बंगराघाट से मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज को जोड़नेवाले बंगराघाट एप्रोच रोड के लिए सात गांवों के किसानों की जमीन अधिगृहीत की जानी है. किसानों के नाम से खतियान नहीं है और न ही जमीन का कोई खाता-खेसरा है. खाता-खेसरा नहीं होने के कारण सरकार इस जमीन का अधिग्रहण नहीं कर पा रही है.
अब निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं बल्कि किसानों से 99 वर्ष के लिए लीज पर जमीन ली जानी है. किसान भी सांसत में हैं कि वे जमीन को लीज पर कैसे दे. यहां की भौतिक स्थिति बदली हुई है. भू-अर्जन विभाग भी चाह कर भी सड़क के लिए किसानों के जमीन नहीं ले पा रहा है. बिना मुआवजा मिले सड़क का निर्माण भी किसान करने नहीं देंगे. ऐसे में इन दोनों परियोजनाओं की सफलता पर फिलहाल ग्रहण लग गया है.बैकुंठपुर अंचल के कर्णपुरा, शितलपुर, बंगरा, सनौत, खिरोधनपटी आदि जिन सात गांवों में सड़क निर्माण के लिए सर्वे का पेच फंसा है, वहां के किसानों को अंचल की तरफ से भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र जारी किया जाता है. किसान अपने-अपने हिसाब से अपनी जमीन पर काबिज हैं. खेती भी करते हैं. नदी की धारा बदल जाने के बाद गांव के लोग आपसी सहमति पर अपनी-अपनी जमीन खरीदते और बेचते भी है. वह भी बिना खाता और खेसरा के.
गांव का होगा सर्वे
जमीन को लीज पर लेने के लिए जब तैयारी की गयी, तो पता चला कि कई गांवों का सर्वे नहीं हुआ है. जमीन के सर्वे के लिए डीएम साहब के स्तर से सरकार को भेजा गया है. उम्मीद है कि जल्दी ही टीम वंचित गांवों का सर्वे करेगी.
राजीव रंजन, भू-अर्जन पदाधिकारी
डीएम ने सर्वे के लिए की अनुशंसा
सर्वे के कारण जमीन लीज पर नहीं मिलने से निर्माण कार्य कहीं रुक न जाये, इसके लिए डीएम राहुल कुमार ने सरकार को प्रतिवेदन भेजते हुए प्रभावित सातों गांवों का सर्वे कराने के लिए अनुशंसा की है. सरकार सर्वे कराती है, तो तत्काल जमीन को लीज पर लेकर यहां सड़क निर्माण का कार्य शुरू हो जायेगा.
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