कागज में मरम्मत दिखा की िनकासी

गोपालगंज : गंडक नदी पर बने डुमरिया पुल की मरम्मत करने के लिए एनएचएआइ ने 31 करोड़ रुपये का आवंटन बिहार सरकार को किया था. बिहार सरकार ने टेंडर निकाल कर राशि निर्माण एजेंसी को सौंप दी. दिल्ली की एचआर बिल्डर्स निर्माण एजेंसी जैसे-तैसे सड़क की मरम्मत करा कर डुमरिया पुल की मरम्मत कराये बिना […]
गोपालगंज : गंडक नदी पर बने डुमरिया पुल की मरम्मत करने के लिए एनएचएआइ ने 31 करोड़ रुपये का आवंटन बिहार सरकार को किया था. बिहार सरकार ने टेंडर निकाल कर राशि निर्माण एजेंसी को सौंप दी. दिल्ली की एचआर बिल्डर्स निर्माण एजेंसी जैसे-तैसे सड़क की मरम्मत करा कर डुमरिया पुल की मरम्मत कराये बिना करोड़ों की राशि निकाल कर चंपत हो गयी. आरटीआइ से इस धांधली का सनसनीखेज खुलासा हुआ है.
आरटीआइ के जवाब में एनएचएआइ के क्षेत्रीय पदाधिकारी बीके सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि एनएच-28 के बथना कुटी से किमी 360.915 से मिर्जापुर 424.15 किमी तक सड़क एवं डुमरिया घाट पुल की मरम्मत के लिए 3027.88 लाख की राशि एनएचएआइ ने पथ निर्माण विभाग बिहार सरकार को सितंबर, 2013 में उपलब्ध करा दी. वास्तविक स्थिति यह है कि मिर्जापुर में 19 जनवरी, 2014 को पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव रहे प्रत्यय अमृत तथा विभाग के मंत्री रहे पीके शाही ने मरम्मत कार्य का उद्घाटन किया. दिल्ली की निर्माण एजेंसी ने मिर्जापुर से बथनाकुटी के बीच हाइवे पर बने गड्ढों को भर कर जैसे-तैसे सड़क को चलने लायक बना दिया, लेकिन डुमरिया घाट पुल की मरम्मत नहीं की गयी. कागज में पुल की मरम्मत कर राशि उठा ली गयी. नतीजा यह है कि गंडक नदी पर 1961 में बनाये गये डुमरिया पुल कभी भी जवाब दे सकता है. भारी वाहनों के चढ़ते ही पुल पर कांपने लगता है. कभी भी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है.
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