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Updated at :10 Jan 2016 6:27 PM
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—- न्यूज इन नंबर —–नौ महीने में खर्च हुआ 45 फीसदी योजना आकारसंवाददाता, पटनामौजूद वित्तीय वर्ष 2015-16 के बजट का योजना आकार 57 हजार करोड़ रखा गया था. परंतु वित्तीय संसाधनों में कमी आने और केंद्र की तरफ से केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (सीपीपी) तथा टैक्स मद में रुपये देने में कटौती करने की वजह से […]

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—- न्यूज इन नंबर —–नौ महीने में खर्च हुआ 45 फीसदी योजना आकारसंवाददाता, पटनामौजूद वित्तीय वर्ष 2015-16 के बजट का योजना आकार 57 हजार करोड़ रखा गया था. परंतु वित्तीय संसाधनों में कमी आने और केंद्र की तरफ से केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (सीपीपी) तथा टैक्स मद में रुपये देने में कटौती करने की वजह से योजना आकार घटकर करीब 52 हजार करोड़ हो गया है. बावजूद इसके वित्तीय वर्ष समाप्त होने के नौ महीने बाद भी महज 45 फीसदी रुपये ही खर्च हो पाये हैं. अब भी पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, सहकारिता, नगर विकास एवं आवास विभाग, पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभागों को मिलाकर करीब 15 ऐसे विभाग हैं, जिन्होंने अपने योजना आकार का 30 फीसदी रुपये भी खर्च नहीं किया है. इन विभागों ने खर्च किये इतने रुपयेविभाग®प्रतिशत (खर्च का) पथ निर्माण®73.42गन्ना उद्योग®63.51विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी®60.41समाज कल्याण®59.83गृह®58.11पर्यावरण एवं वन®55.01राजस्व एवं भूमि सुधार®54.76भवन निर्माण®54.71पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा कल्याण®53.11एससी-एसटी कल्याण®52.10स्वास्थ्य®51.85अल्पसंख्यक कल्याण®51.31जल संसाधन®49.38उद्योग®48.59शिक्षा®46.90पर्यटन®46.87ग्रामीण कार्य®45.19योजना एवं विकास®44.94लघु जल संसाधन®43.05ग्रामीण विकास®40.54पीएचइडी®39.32ऊर्जा®37.92आपदा प्रबंधन®37.41सूचना प्रौद्योगिकी®35.34कला, संस्कृति और युवा®33.02खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण®27.96कानून®27.01सहकारिता®25.54नगर विकास एवं आवास®22.45वित्त®21.96परिवहन®21.32कृषि®20.26सूचना एवं जन संपर्क®20.25श्रम संसाधन®19.06पशु एवं मत्स्य संसाधन®17.91पंचायती राज®12.57सामान्य प्रशासन®10.15निबंधन एवं उत्पाद®4.19वाणिज्य कर®3.33मंत्रिमंडल सचिवालय®1.78

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