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पेज छह के लिए लीड……फाइलों में दफन हो गयी सोशल ऑडिट की रिपोर्ट कुव्यवस्था. जगतौली पंचायत में सोशल ऑडिट के दौरान हुआ था खुलासाएनजीओ की रिपोर्ट डीआरडीए कार्यालय में खा रही धूल एक ही सड़क का नाम बदल कर किया गया लाखों का वारा-न्याराप्रभात पड़तालमनरेगा की योजना का सोशल ऑडिट प्रतिवर्ष कराने का प्रावधान है. […]

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पेज छह के लिए लीड……फाइलों में दफन हो गयी सोशल ऑडिट की रिपोर्ट कुव्यवस्था. जगतौली पंचायत में सोशल ऑडिट के दौरान हुआ था खुलासाएनजीओ की रिपोर्ट डीआरडीए कार्यालय में खा रही धूल एक ही सड़क का नाम बदल कर किया गया लाखों का वारा-न्याराप्रभात पड़तालमनरेगा की योजना का सोशल ऑडिट प्रतिवर्ष कराने का प्रावधान है. धरातल पर सोशल ऑडिट का कोरम पूरा किया जाता है. वर्ष 2014 में पंचायती राज विभाग ने भोरे के जगतौली और नरेंद्र डूमर पंचायत की सोशल ऑडिट कराने के लिए एक कमेटी बना कर मनरेगा की जांच करायी. जांच में दोनों पंचायतों में बड़े पैमाने पर घोटाला सामने आया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी.फोटो- 1संजय कुमार अभय, गोपालगंजगजब! भोरे प्रखंड के जगतौली पंचायत में मनरेगा योजना की सोशल ऑडिट में करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर हुआ. सोशल ऑडिट की रिपोर्ट पंचायती राज विभाग से लेकर डीआरडीए तक सौंप दी गयी. कार्रवाई की बारी आयी, तो इस रिपोर्ट को बांध कर फाइलों में रख दिया गया, जो पिछले एक वर्ष से धूल फांक रहा है. फाइलों में सोशल ऑडिट की रिपोर्ट दफन हो कर रह गयी है. पंचायत की मुखिया इंदू देवी व पंचायत रोजगार सेवक की मिलीभगत से एक ही सड़क को बारबार बना कर मनरेगा की राशि उठाने का मामला सामने आया है.क्या है पूरा मामला पंचायत में एक ही संपर्क पथ पर चार-चार योजनाएं स्वीकृत करा ली गयीं. ‘कोरेयां ग्राम से कटहरिया जानेवाली पथ का ईंटीकरण-मिट्टीकरण कार्य’ के लिए 9.52 लाख रुपये स्वीकृत हुए. जबकि, पुन: उसी पथ पर ‘कावे ग्राम के विक्रमा मिश्र के बथान से दयाल छापर गांव होकर यूपी की सीमा तक’ के लिए भी 9.95 लाख रुपये की स्वीकृति दी गयी. कोरेयां से कटहरिया जानेवाली पथ में कटहरिया गांव यूपी की सीमा पर स्थित है. जबकि, दूसरी योजना में कावे के विक्रमा मिश्र के बथान से शुरू हुई योजना भी दयाल छापर गांव होते हुए यूपी की सीमा के कटहरिया गांव तक ही जाती है. तीसरी योजना में ‘जगतौली में ग्राम कावे के वीएम के बथान से दयाल छापर होकर यूपी जानेवाली सड़क का मिट्टीकरण-ईंटीकरण’ के लिए 9.87 लाख की स्वीकृति दे दी गयी. इस प्रकार एक ही सड़क पर यूपी की सीमा तक जानेवाली सड़कों के नामों में हेराफेरी कर अलग-अलग चार योजनाएं स्वीकृत करा ली गयीं. हैरत में डालनेवाली बात यह है कि आखिरकार कैसे प्राक्कलन तैयार करनेवाले अभियंताओं और अधिकारियों द्वारा इस योजना के मद में लाखों का वारा-न्यारा होता रहा. और छिन ली गयी ऑडिट करनेवाले की बाइकजगतौली पंचायत की सोशल ऑडिट की टीम के मॉनीटर कृपाशंकर श्रीवास्तव की बाइक ऑडिट कर लौटने के दौरान छिन ली गयी थी. सोशल ऑडिट की रिपोर्ट बदलने का पहले प्रलोभन दिया गया, नहीं मानने पर बाइक छिन कर जान मारने की धमकी दी गयी. मामला तत्कालीन डीडीसी सुनील कुमार के पास पहुंचा. उन्होंने पंचायत के मुखिया पति व साहुजैन स्कूल के शिक्षक रमेश सिंह को चेतावनी दी, तो उनकी बाइक तीन दिन बाद वापस मिली.क्या कहते हैं अधिकारीजगतौली पंचायत में अब तक इंदिरा आवास में धांधली की जांच के लिए टीम बनायी गयी थी. मनरेगा में धांधली की जानकारी नहीं थी. अगर मनरेगा में भी धांधली हुई है, तो तत्काल रिपोर्ट खोज कर कार्रवाई की जायेगी.जीउत सिंह, डीडीसी, गोपालगंज

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