बैकुंठपुर की जनता ने भाजपा पर वश्विास किया

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बैकुंठपुर की जनता ने भाजपा पर विश्वास किया निर्दलीय प्रत्याशी के कारण बिगड़ गया खेलफोटो-1 नरेंद्र कुमार सिंह, आमनेसंवाददाता, बैकुंठपुर विधानसभा चुनाव परिणाम ने साबित कर दिया है कि बैकुंठपुर की जनता ने भाजपा पर विश्वास किया है. भाजपा का यहां पहली बार खाता खुला है. इसके पहले भी स्व मनदेव तिवारी भाजपा से चुनाव […]

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बैकुंठपुर की जनता ने भाजपा पर विश्वास किया निर्दलीय प्रत्याशी के कारण बिगड़ गया खेलफोटो-1 नरेंद्र कुमार सिंह, आमनेसंवाददाता, बैकुंठपुर विधानसभा चुनाव परिणाम ने साबित कर दिया है कि बैकुंठपुर की जनता ने भाजपा पर विश्वास किया है. भाजपा का यहां पहली बार खाता खुला है. इसके पहले भी स्व मनदेव तिवारी भाजपा से चुनाव लड़े और हार गये. भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी ने पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र में एक तरह से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी. आम लोगों से मिलना-जुलना भी कारगर साबित हुआ. अधूरे विकास के लिए नया सबेरा हुआ है. रविवार की शुरुआत ने विकास की नयी किरण लायी. खजुहटी गांव निवासी राजनीतिक विश्लेषक नरेंद्र कुमार सिंह से प्रभात खबर की बातचीत हुई, जिसमें बीजेपी उम्मीदवार मिथिलेश कुमार तिवारी की जीत के पीछे भाजपा की लहर कही जायेगी. पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सांसद मनोज तिवारी का बैकुुंठपर में आना जीत के लिए ज्यादा कारगर हुआ है. नरेंद्र मोदी को लोगों ने स्वीकारा, वोट हृदय में बैठा कर लोगों ने दिया. उधर, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से इस बार कट कर यादव वोटर्स ने निर्दलीय प्रत्याशी मनोरमा देवी के साथ जुड़ कर जदयू की मुश्किलें बढ़ा दीं. वहीं, अगड़ी जाति की एकजुटता ने रंग लाया. इस जनादेश के पीछे जदयू विधायक मंजीत सिंह की लोकल पॉलिटिक्स में जुड़े होने का फायदा भी भाजपा काे हुआ. जदयू की हार के पीछे वोटों का बिखरावफोटो-2- भारतेश्वर प्रसाद सिंह, सामने बैकुंठपुर. चुनाव परिणाम ने स्पष्ट कर दिया है कि जदयू की हार के पीछे वोटों का बिखराव है. पूर्व विधायक देवदत राय की पत्नी मनोरमा देवी के चुनाव मैदान में आने से वोटों का बिखराव हुआ. यह मानना है राजनीतिक विशेषज्ञ भारतेश्वर प्रसाद सिंह का. उनका मानना है कि विधायक रहे मंजीत सिंह स्थानीय स्तर पर आम लोगों से दूर हो गये. प्रशासन और सरकार के करीब रहने के बाद भी क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हुआ. बेटियों की पढ़ाई के लिए डिग्री और स्नातकोत्तर कॉलेज नहीं खोला जा सका. सुदूर ग्रामीण इलाके में सड़कें नहीं बनीं. आम लोगों की गुटबाजी में एक पक्ष का मदद करना भी मंजीत सिंह की हार का कारण बना. विकास को डोर-टू-डोर ले जाकर उसको भुनाने में कहीं-न-कहीं चूक हुई है. इसी का बुनियादी ख्याल रखना चाहिए था. इस चुनाव परिणाम से स्पष्ट हो गया है कि क्षेत्र की जनता इस बार विधायक मंजीत सिंह से नाराज भी चल रही थी. हर समीकरण में इस बार मंजीत सिंह बाहर हो गये.

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