थाली से अरहर दाल गायब

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थाली से अरहर दाल गायबमहंगाई की मार : महंगाई से फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं घर का बिगड़ा बजट, कीमत 140 से बढ़ कर 180 रुपये पहुंची 50 रुपये किलो बिकनेवाली मटर दाल बनी आम लोगों की पहचान 50 रुपये से घट कर अब 30 रुपये किलो बिक रहा नया आलू फोटो नं-8इंट्रो- महंगाई से […]

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थाली से अरहर दाल गायबमहंगाई की मार : महंगाई से फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं घर का बिगड़ा बजट, कीमत 140 से बढ़ कर 180 रुपये पहुंची 50 रुपये किलो बिकनेवाली मटर दाल बनी आम लोगों की पहचान 50 रुपये से घट कर अब 30 रुपये किलो बिक रहा नया आलू फोटो नं-8इंट्रो- महंगाई से त्रस्त जनता को फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं है. हर रोज किसी-न-किसी सामान में की कीमत में वृद्धि हो रही है. एक ओर जहां किसी भी सब्जी की कीमत 20 रुपये किलो से नीचे नहीं है, वहीं दाल की कीमत में पिछले पांच महीनों से आग लगी है. सितंबर में प्याज की बढ़ती कीमत ने लोगों की आंखों से आंसू निकाल दिया था. इन दिनों दाल की कीमत में हो रही लगातार वृद्धि से मध्यम परिवार सब्जी से काम चला रहा है. वहीं, गरीबों की थाली से दाल दूर होती जा रही है. संवाददाता, गोपालगंज महंगाई से त्रस्त जनता को भोजन में अरहर दाल नसीब हो रही है. मसूर, चना और मटर से काम चल रहा है. पिछले तीन महीने से अरहर दाल की कीमत में आग लगी है, जो 140 रुपये से बढ़ कर 180 रुपये तक पहुंच गयी है. इसका सीधा असर घर के बजट पर पड़ा है. 100 रुपये किलो मिलनेवाली मसूर दाल बड़े लोगों की शान में हाजिर है, तो 66 रुपये किलो मिलनेवाली चना दाल और अरहर की तरह दिखनेवाली मटर दाल आम लोगों की पहचान बन गयी है. कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होने से अरहर की बिक्री अब नहीं के बराबर हो रही है. बड़ी बाजार के दुकानदारों की मानें, तो अरहर की दाल बमुश्किल दिन भर में एक से दो किलो तक बिक पाती है, जबकि मसूर दाल औसतन पांच किलो प्रतिदिन बिक रही है. बेसन, बरी के लिए उपयोग में आनेवाली मटर दाल अब रसोई व थाली की शोभा बढ़ा रही है. पर्व-त्योहारों के समय बिकनेवाल मटर दाल की मांग बाजार में बढ़ गयी है. आलू व प्याज से भी नहीं मिली राहत पिछले महीने तक 80 रुपये किलो प्याज और 20 रुपये किलो आलू बिक रहा था. चुनावी की आहट और नयी फसल की आवक से कीमत में हल्की गिरावट तो आयी, लेकिन आम लोगों को महंगाई की मार से राहत नहीं मिल पायी. बढ़ी हुई कीमत से आम आदमी और दुकानदार दोनों परेशान हैं. सब्जी मंडी बड़ी बाजार के दुकानदारों की मानें, तो दो महीने के अंदर प्याज की बिक्री में 60 फीसदी की कमी आयी है. दुकानदार प्रदीप साह की मानें, तो प्याज की नयी फसल के आने से कीमत में गिरवाट तो आयी है, लेकिन बिक्री नहीं बढ़ी है. प्याज 80 रुपये से घट कर 50-55 रुपये प्रति किलो बिक रही है, फिर भी बिक्री जस-की-तस है. वहीं, दुकानदार बमबम प्रसाद कहते हैं कि 15 दिन पहले आये नये आलू की कीमत 50 रुपये से घट कर 30 रुपये प्रति किलो और प्याज 80 से 50 पर आ गयी है. बावजूद बिक्री में कोई असर नहीं पड़ा है. ” अरहर दाल की बिक्री अब नहीं के बराबर ही होती है. पहले तो प्रतिदिन हमारे नियमित ग्राहक व सामान्य ग्राहकों में 8-10 किलो तक खप जाती है. अब तो बमुश्किल 1-2 किलो तक की बिक्री होती है. ऊपर से कीमत बढ़ने के चलते घाटा लगने के डर से ज्यादा लाता भी नहीं हूं. अब मसूर के साथ साथ चना और मटर दाल की बिक्री बढ़ गयी है.राजेश कुमार, दुकानदार, गोपालगंज ” अरहर दाल और सब्जियों की आसमान छूती कीमत ने घर का बजट बिगाड़ दिया है. अरहर दाल और प्याज अब आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया है. 6-70 बिकनेवाली अरहर दाल 180 रुपये किलो और 15-20 रुपये किलो बिकनेवाला प्याज अब 50-55 रुपये किलो मिल रहा है. ऐसे में खपत में कमी और विकल्प से काम चलाना मजबूरी बन गयी है. सीता देवी, गृहिणी गोपालगंज” दाल और सब्जियों की कीमतों में वृद्धि से परेशान हैं. आसमान छूती कीमतों से घर का बजट बिगड़ गया है. पहले 12 हजार रुपये में घर के किचेन का काम चल जाता था, अब 18 हजार रुपये से काम चल रहा है. सरिता कुमारी, गुहिणी गोपालगंज

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