75 फीसदी सरकारी नलकूप हैं बंद मुरझाती फसलों में कैसे आये जान

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संवाददाता : गोपालगंज जिले के किसान दोहरी मार झेलने को विवश हैं. मॉनसून विदा होने को है और अभी तक रूठा है, वहीं सिंचाई के सरकारी साधन ध्वस्त हैं. ऐसे में मुरझाती फसलों में कैसे जान आये, इसको लेकर किसान बेचैन हैं. यदि फसल नहीं हुई, तो किसानों के मुंह का निवाला छिनेगा ही, वे […]

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संवाददाता : गोपालगंज जिले के किसान दोहरी मार झेलने को विवश हैं. मॉनसून विदा होने को है और अभी तक रूठा है, वहीं सिंचाई के सरकारी साधन ध्वस्त हैं. ऐसे में मुरझाती फसलों में कैसे जान आये,

इसको लेकर किसान बेचैन हैं. यदि फसल नहीं हुई, तो किसानों के मुंह का निवाला छिनेगा ही, वे कर्ज में भी डूब जायेंगे. जुलाई से ही मॉनसून दगा दे रहा है. जुलाई और अगस्त में जहां औसत से कम वर्षा हुई, वहीं सितंबर में तो मॉनसून ने अपना रुख ही बदल दिया है. इस माह में वर्षा की जरूरत 222 मिमी है.

इसके एवज में अभी तक मात्र 30.5 मिमी वर्षा हुई है. ऐसे में किसानों के पास सिंचाई के अलावा कोई चारा नहीं है. जिले में सरकारी नलकूपों की स्थिति बदतर है. 75 फीसदी नलकूप तकनीकी कारण और बिजली के अभाव में बंद पड़े हैं, वहीं नहरें भी दगा दे गयी हैं. कुछ नहरों को छोड़ कर शेष में इस वर्ष पानी आया ही नहीं और न आने की स्थिति है.

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