अस्पताल में होते डॉक्टर तो नहीं होता उपद्रव

हथुआ : डॉक्टर धरती के भगवान हैं. आज उनके कारण प्रशासन और लोगों को उपद्रव का सामना करना पड़ा. यह घटना न सिर्फ समाज बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चिंता का विषय है. अनुमंडलीय अस्पताल में अगर मौके पर इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर होते तो ग्रामीणों का आक्रोश नहीं फूटा होता. अस्पताल में डॉक्टर का […]
हथुआ : डॉक्टर धरती के भगवान हैं. आज उनके कारण प्रशासन और लोगों को उपद्रव का सामना करना पड़ा. यह घटना न सिर्फ समाज बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चिंता का विषय है. अनुमंडलीय अस्पताल में अगर मौके पर इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर होते तो ग्रामीणों का आक्रोश नहीं फूटा होता. अस्पताल में डॉक्टर का एक घंटा इंतजार करने के बाद फार्मासिस्ट ने बच्चे को देख कर मृत घोषित किया. बच्चे की मौत से परिजन चीत्कार में डूब गये. इतने में डॉ अनिल कुमार चौधरी पहुंच गये.
लोगों ने जब डॉक्टर को देखा तो भड़क गये. उग्र लोगों के पूछने पर डॉक्टर ने नाश्ता करने जाने की बात कहीं, उस पर लोगों ने उसे दौड़ा- दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया. इस दौरान जो आया वही पीटा गया. अस्पताल में तोड़फोड़ करने लगे. इमरजेंसी में भी तोड़फोड़ की गयी. उसके बाद बाजार में उपद्रव शुरू हो गया.
अस्पताल में डॉक्टरों के मारपीट के घटना के बाद सैकड़ों लोगों ने अचानक टैक्सी स्टैंड पर पहुंच कर खड़े एक वाहन के शीशे आदि तोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिये. यहां तक कि पान आदि की दुकानों में भी लोगों ने जम कर तोड़फोड़ की. लोगों ने हथुआ-भोरे मुख्य मार्ग पर शव रख तथा टायर जला कर प्रदर्शन किया.
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