बैंकों की हड़ताल से 90 करोड़ रुपये का लेन-देन बाधित

Published at :23 Aug 2017 5:26 AM (IST)
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बैंकों की हड़ताल से 90 करोड़ रुपये का लेन-देन बाधित

अपनी मांगों के समर्थन में की नारेबाजी भी सभी बैंकों की शाखाओं में कामकाज रहा ठप गोपालगंज : केन्द्रीय यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर अपनी नौ सूत्री मांगों के समर्थन में राष्ट्रव्यापी हड़ताल कार्यक्रम के तहत मंगलवार को जिले के बैंक कर्मी हड़ताल पर रहे. इससे जिले के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के […]

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अपनी मांगों के समर्थन में की नारेबाजी भी

सभी बैंकों की शाखाओं में कामकाज रहा ठप
गोपालगंज : केन्द्रीय यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर अपनी नौ सूत्री मांगों के समर्थन में राष्ट्रव्यापी हड़ताल कार्यक्रम के तहत मंगलवार को जिले के बैंक कर्मी हड़ताल पर रहे. इससे जिले के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों व ग्रामीण बैंकों की शाखाओं में ताले लटके रहे.कामकाज पूरी तरह से ठप रहा. निजी बैंकों व सहकारिता बैंकों के कर्मियों ने इस हड़ताल का नैतिक समर्थन किया और हड़ताली कर्मियों के अनुरोध पर अपनी शाखाओं को बंद कर दिया
. इस बंदी के कारण जिले में करीब 90 करोड़ रुपये का लेन-देन भी बाधित हुआ. बैंक से रुपये निकालने व जमा करने के लिए लोग भटकते रहे. उधर, शहर स्थित ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष ऑल इंडिया रीजनल रूरल बैंक इंप्लाइज व ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता सह जिला यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रवक्ता सुशील कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में बैंककर्मियों ने धरना देकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया.
इस धरना-प्रदर्शन में स्टेट बैंक, केनरा बैंक, इलाहाबाद बैंक व अन्य बैंकों के कर्मियों ने भाग लिया. धरना में राजनारायण सिंह, प्रमोद वर्मा, सच्चिदानंद श्रीवास्तव, प्रेमचंद विद्यार्थी, अनिल कुमार राय, प्रदीप राम, मतई राम, रविशंकर कुमार, सुशील कुमार श्रीवास्तव, रंजन कुमार, अरुणेश कुमार पांडेय, अनिष, प्रमेंद्र कुमार, अजय कुमार, संजय कुमार सिंह, राहुल कुमार, सुमन कुमार, पवन कुमार व निलेश मिश्रा आदि बैंक कर्मी शामिल हुए. बैंककर्मियों ने अपनी नौ सूत्री मांगों के समर्थन में जम कर नारेबाजी भी की. एसोसिएशन के प्रवक्ता ने बताया कि अगर सरकार मांगों पर कोई उचित निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन और तेज होगा. साथ ही लगातार हड़ताल का कार्यक्रम संचालित किया जायेगा. उन्होंने कहा कि एक समय था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बैंक की सेवा व वेतन पहले स्थान पर था. आज बैंक की सेवा श्रम बल के अभाव में काफी कठिन हो गयी है और वेतन प्रथम स्थान पर से खिसक कर 12वें स्थान पर आ गया है.
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