एक माह में 30 मरीज किये गये रेफर

Published at :01 Aug 2017 1:22 AM (IST)
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एक माह में 30 मरीज किये गये रेफर

सुविधा का अभाव. इमरजेंसी में सुविधाओं की कमी से हर दिन रेफर हाे रहे तीन मरीज गोपालगंज : सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की दशा दिन-ब-दिन बिगड़ती ही जा रही है. यहां सुविधाओं की घोर कमी है. इससे मरीज व उनके परिजन परेशान होते हैं. सुविधाओं की कमी के कारण ही प्रतिमाह यहां से औसतन […]

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सुविधा का अभाव. इमरजेंसी में सुविधाओं की कमी से हर दिन रेफर हाे रहे तीन मरीज

गोपालगंज : सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की दशा दिन-ब-दिन बिगड़ती ही जा रही है. यहां सुविधाओं की घोर कमी है. इससे मरीज व उनके परिजन परेशान होते हैं. सुविधाओं की कमी के कारण ही प्रतिमाह यहां से औसतन 30-35 मरीज रेफर किये जाते हैं. बीते जुलाई में भी इमरजेंसी वार्ड से करीब 30 मरीज रेफर किये गये.
जिले के लोग अपने परिजन, सगे-संबंधी या रिश्तेदार को अचानक बीमार होने पर इमरजेंसी वार्ड में भरती कराते हैं. लोग यह सोचते हैं कि इमरजेंसी वार्ड में सस्ते में आसानी से इलाज हो जायेगा, लेकिन सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाने के बाद जब सुविधाओं की कमी बता कर तैनात डॉक्टर बेहतर इलाज के लिए रेफर करते हैं, तो उन्हें काफी निराशा होती है. इमरजेंसी वार्ड में जब भी कोई गंभीर मरीज भरती किये जाते हैं, तो उन्हें रेफर ही होना पड़ता है, क्योंकि उनका इलाज यहां संभव नहीं है.
परची पर डॉक्टर करते हैं रेफर
इमरजेंसी वार्ड में भरती मरीज अस्पताल की परची पर ही रेफर किये जाते हैं. रेफर करने के लिए कोई अलग से कागज बना कर नहीं दिया जाता है. साथ ही रेफर मरीजों के लिए अलग से रजिस्टर भी नहीं खोला जाता है, जिससे कि बाद में जाने में आसानी से पता लग पाये कि किस मरीज को कब और कहां के लिए रेफर किया गया है.
इमरजेंसी वार्ड के भरती रजिस्टर में ही कुछ मरीजों को रेफर करने का आंकड़ा भरा जाता है.
रेफर होने पर काफी पैसे होते हैं खर्च : सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से रेफर मरीज पीएमसीएच या गोरखपुर मेडिकल ले जाये जाते हैं. यहां जाने के लिए अधिकतर परिजनों को प्राइवेट एंबुलेंस मिलता है. तेल व किराये के नाम पर दो हजार से लेकर चार हजार रुपये तक देने पड़ते हैं. सदर अस्पताल में प्राइवेट एंबुलेंस संचालक 24 घंटे इमरजेंसी वार्ड के पास ही मंडराते रहते हैं. जैसे ही इन्हें गंभीर रोगी रेफर होने की जानकारी मिलती है कि इनके चालक वार्ड में पहुंच कर परिजनों से संपर्क करने लगते हैं.
दुर्घटना में घायल मरीज को बचाने के लिए नहीं हैं जरूरी संसाधन
कुछ मरीज जो जुलाई में हुए रेफर
केस वन-मांझागढ़ थाने के भैसहीं गांव निवासी वृद्ध मदन साह बेहोश हो गये, तो उनके परिजनों ने सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भरती कराया. सुविधाओं की कमी से डॉक्टर ने उन्हें रेफर कर दिया.
केस टू-शहर के सरेयां वार्ड नंबर चार निवासी वृद्ध रामचंद्र शर्मा सीने में दर्ज होने पर इमरजेंसी वार्ड में भरती किये गये. इन्हें भी डॉक्टर ने बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया. परिजन एंबुलेंस पर ले गये.
केस थ्री- मांझागढ़ थाने के बंगरा गांव निवासी मुन्ना साह के पुत्र पिंकू कुमार को सीने में कोई परेशानी शुरू हुई, तो परिजनों ने इमरजेंसी वार्ड में भरती कराया. डॉक्टर ने इन्हें रेफर कर दिया.
केस फोर- जादोपुर रोड निवासी विरेश कुमार को सीने में दर्द होने पर इमरजेंसी में लाया गया. यहां सुविधाओं की कमी के कारण इलाज संभव नहीं होते देख डॉक्टर ने रेफर कर दिया.
केस फाइव- नगर थाने के एकडेरवां गांव निवासी सरस्वती देवी को हार्ड प्रॉब्लम हुआ. इमरजेंसी वार्ड में भरती हुईं. सुविधाओं की कमी से डॉक्टर ने रेफर कर दिया.
केस सिक्स- उचकागांव थाने के डुमरिया गांव निवासी सफदर अली मारपीट में गंभीर रूप से जख्मी हुए. इमरजेंसी वार्ड में भरती हुए. स्थिति में सुधार नहीं होने पर डॉक्टर ने रेफर कर दिया.
केस सेवन-उचकागांव थाने के डुमरिया गांव निवासी नसीब हुसैन मारपीट में गंभीर रूप से जख्मी होने पर इमरजेंसी वार्ड में भरती हुए. रेफर होने के बाद परिजन एंबुलेंस से ले गये.
केस एट-बरौली थाना क्षेत्र की निवासी बेबी देवी मारपीट में काफी जख्मी हो गयी. इमरजेंसी वार्ड में इलाज संभव नहीं हुआ, तो डॉक्टर ने रेफर कर दिया.
क्या कहते हैं अधिकारी
विभाग से जो संसाधन मिलते हैं उन्हें इमरजेंसी वार्ड में उपलब्ध कराया जाता है. वार्ड में और संसाधनों की व्यवस्था कराने की मांग की गयी है.
डॉ पीसी प्रभातर, डीएस, सदर अस्पताल
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