पैसे बचाने के चक्कर में लाया ''मृत'' शव वाहन !

Updated at :23 Dec 2016 2:26 AM
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पैसे बचाने के चक्कर में लाया ''मृत'' शव वाहन !

गया ; गया नगर निगम ने 16 लाख रुपये में शव वाहन मंगवाया है, लेकिन वाहन का परिचालन शुरू भी नहीं हुआ कि इसका टायर क्षतिग्रस्त हालत में मिला है. वाहन का टायर क्षतिग्रस्त होने से इस वाहन की खरीद में आर्थिक गड़बड़ी की चर्चा भी शुरू हो गयी है. पार्षदों को इसमें घपले की […]

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गया ; गया नगर निगम ने 16 लाख रुपये में शव वाहन मंगवाया है, लेकिन वाहन का परिचालन शुरू भी नहीं हुआ कि इसका टायर क्षतिग्रस्त हालत में मिला है. वाहन का टायर क्षतिग्रस्त होने से इस वाहन की खरीद में आर्थिक गड़बड़ी की चर्चा भी शुरू हो गयी है. पार्षदों को इसमें घपले की गंध आ रही है. वाहन फिलहाल नगर निगम परिसर में ही रखा गया है लेकिन औपचारिक तौर पर इसे नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया गया है.

गौरतलब है कि बोर्ड की बैठक में शव ढोने के लिए शव वाहन का प्रस्ताव पारित हुआ था और इसके लिए निविदा मांगी गयी थी. इसमें पटना की मौर्या मोटर्स, गया के तेलबिगहा की स्वास्तिक स्टोर और गया के घुघरीटांड़ की प्रकाश ट्रेडर्स ने टेंडर भरा था. विगत नौ सितंबर को क्रय समिति की बैठक हुई थी जिसमें तीनों कंपनियों के टेंडर खोले गये थे तो पाया गया कि सबसे कम बोली मौर्या ट्रेडर्स ने लगायी थी. इस कंपनी ने 16 लाख रुपये शव वाहन देने की बात कही थी. वाहन आया तो उसके बायीं तरफ का पहिया फटा हुआ था.

बताया गया है कि बोर्ड की बैठक में वार्ड पार्षद लालजी प्रसाद ने शव ढुलाइ वाहन खरीदने की मांग की थी. बोर्ड में सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया गया था. श्री प्रसाद को क्रय समिति द्वारा 16 लाख रुपये में वाहन खरीदने के निर्णय लिया गया था जिसकी जानकारी जब श्री प्रसाद को मिली तो उन्होंने इसका यह कह कर विरोध किया था कि इतने रुपये में अच्छा वाहन नहीं आयेगा, लेकिन उनके विरोध का क्रय समिति पर कोई असर नहीं पड़ा.
बताया जाता है कि श्री प्रसाद ने नगर विधायक व गया सांसद को पत्र भेज कर अपने मद से शव ढुलाइ वाहन देने को कहा था. श्री प्रसाद ने कहा था कि वाहन खरीद में सिर्फ कमीशनखोरी हो रही है. लालजी प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि वाहन देख कर साफ हो जाता है कि किसी बड़े शहर से पुरानी गाड़ी लाकर नयी का दाम वसूलने का खेल चल रहा है. उन्होंने कहा कि कफन में जेब नहीं होता, लेकिन लाश ढोने के वाहन में कमीशनखोरी की गयी. जिलाधिकारी को इस मामले का संज्ञान लेकर इसकी जांच निगरानी को सौंप देनी चाहिए.
खराब रहा, तो नहीं होगी इंट्री
16 लाख रुपये में मौर्या मोटर्स, पटना को वाहन देने की स्वीकृति दी गयी है. वाहन सप्लाइ आदेश में टाटा माेटर्स का चेचिस नंबर तक दर्ज है. वाहन में किसी भी ढंग की शिकायत रही, तो उसका पेमेंट करना तो दूर वाहन को निगम स्टोर में इंट्री तक नहीं मिलेगी. शव वाहन नगर निगम क्षेत्र के लोगों को सुविधा देने के लिए मंगाया गया है. कंपनी अगर वाहन सप्लाइ में किसी प्रकार की लापरवाही बरतती है, तो उसके आपूर्ति आदेश पर पुनर्विचार किया जायेगा.
सोनी कुमारी, मेयर
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