भेड़-बकरियों की तरह रह रहीं महिला कैदी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 May 2016 8:59 AM

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गया : राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू ने शुक्रवार को केंद्रीय कारागार का दौरा कर महिला कैदियों से मुलाकात की व जेल में की जाने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लिया. निरीक्षण के बाद जेल के बाहर पत्रकारों से श्रीमती साहू ने जेल में मौजूद सभी व्यवस्थाओं पर असंतोष जाहिर किया. उन्होंने कहा कि […]

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गया : राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू ने शुक्रवार को केंद्रीय कारागार का दौरा कर महिला कैदियों से मुलाकात की व जेल में की जाने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लिया. निरीक्षण के बाद जेल के बाहर पत्रकारों से श्रीमती साहू ने जेल में मौजूद सभी व्यवस्थाओं पर असंतोष जाहिर किया. उन्होंने कहा कि कई जगहों के कारागारों का दौरा किया, लेकिन गया केंद्रीय कारागार की स्थिति सबसे खराब है. हर जगह कुछ न कुछ कमी नजर आयी, पर यहां तो केवल कमी ही नजर आयी.

उन्होंने कहा कि जेल में महिला कैदी वार्ड की समस्याओं की उन्होंने लिस्ट तैयार की है. सभी मुद्दों पर जेल अधीक्षक के साथ बात की है. श्रीमती साहू ने कहा कि जेल अधीक्षक ने सभी कमियों को अगस्त तक दुरुस्त कर लेने की बातें कहीं.

इलाज के नाम पर खानापूर्ति : उन्होंने कहा कि जेल में महिला कैदी भेड़ बकरियों की तरह रह रही हैं. अस्पताल व इलाज के नाम पर कुछ भी नहीं दिखता है. जेल प्रशासन ने एक बैरक में पांच चौकी लगा कर उसे अस्पताल का नाम दिया है. जांच के नाम पर न तो स्टेथोस्कोप व न ही ब्लड प्रेशर मशीन है.
इनसान जैसा हो व्यवहार
श्रीमती साहु ने कहा कि प्राथमिकता के तौर पर जेल में भोजन की व्यवस्था में सुधार किये जाने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि जेल में कैदियों को अधपकी रोटियां दी जा रही हैं. तय मानक के अनुसार, भोजन नहीं मिल रहा है. महिलाओं के बच्चों को तो दूध दिया जाता है, लेकिन महिलाओं को नहीं मिलता, जो देना बेहद जरूरी है. यह मेनू चार्ट में भी है. कई महिलाएं बीमार व कमजोर हैं. मासिक धर्म के दौरान जरूरी संख्या में नैपकिन तक मुहैया नहीं करायी जा रही है.
महिलाओं के प्रशिक्षण का कोई इंतजाम नहीं
उन्होंने कहा कि जेल में पुरुषों के कौशल विकास के लिए कई काम होते हैं. जैसे सूत काटना व टोकरी बनाना आदि. लेकिन, महिलाओं के लिए कोई भी प्रोग्राम नहीं है. यहां रहने के दौरान महिलाएं समाज से कट जाती हैं. जरूरी है कि जेल में उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाये, ताकि जब वह बाहर निकले तो कुछ रोजगार कर सके.
कौन है मनोरमा, मैं नहीं जानती
इस वक्त जेल में बंद एमएलसी मनोरमा देवी से मुलाकात करने के सवाल पर श्रीमती साहू ने कहा कि मनोरमा कौन हैं, वह नहीं जानतीं. उन्होंने कहा कि जेल में बंद सभी महिला कैदी उनके लिए बराबर हैं. वह सभी की समस्याओं को जानने यहां आयी थीं. उन्होंने कहा कि यहां की सभी कैदियों को एक समान व्यवस्था मुहैया करायी जाये, यही कोशिश है.
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