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पाइप ब्लास्ट के बाद पांच दिनों से बंद है वाटर सप्लाइ , ढेर सारे मकान हैं पाइपलाइन पर !, दोबारा हुआ लीकेज तो महीनों उठानी पड़ेगी फजीहत

Updated at : 16 Nov 2018 7:34 AM (IST)
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पाइप ब्लास्ट के बाद पांच दिनों से बंद है वाटर सप्लाइ , ढेर सारे मकान हैं पाइपलाइन पर !, दोबारा हुआ लीकेज तो महीनों उठानी पड़ेगी फजीहत

गया : दंडीबाग जलापूर्ति केंद्र से राइजिंग पाइपलाइन के सहारे मंगलागौरी टंकी तक पानी शहर के कई हिस्सों तक की जाती है. राइजिंग पाइपलाइन पर ही कई लोगों ने मकान, बाउंड्री व दुकान बना रखे हैं. जलापूर्ति केंद्र से बाइपास रोड तक में आधा दर्जन से अधिक निर्माण राइजिंग पाइप पर कर लिए गये हैं. […]

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गया : दंडीबाग जलापूर्ति केंद्र से राइजिंग पाइपलाइन के सहारे मंगलागौरी टंकी तक पानी शहर के कई हिस्सों तक की जाती है. राइजिंग पाइपलाइन पर ही कई लोगों ने मकान, बाउंड्री व दुकान बना रखे हैं. जलापूर्ति केंद्र से बाइपास रोड तक में आधा दर्जन से अधिक निर्माण राइजिंग पाइप पर कर लिए गये हैं. 10 नवंबर को राइजिंग पाइपलाइन में हुए विस्फोट के बाद समय रहते कर्मचारी सतर्क हो जाने के कारण बड़ा हादसा टल गया था.
लेकिन, अब तक नारायणचुआं, मंगलागौरी, घुघरीटांड़ के कई गलियों में जलापूर्ति बाधित है. बताया जाता है कि पाइपलाइन पर कोई निर्माण नहीं होता, तो पाइप को बदल कर एक दिन में जलापूर्ति शुरू कर दिया जाता. लेकिन मकान होने के कारण ब्लास्ट वाली जगह पर बेल्डिंग कर ही जलापूर्ति शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है. दो दिन छठ पूजा के कारण भी इस जगह पर काम बाधित रहा है.
निगम के इंजीनियर का कहना है कि अगर अगली बार ब्लास्ट हुआ, तो पाइपलाइन ठीक करने में कई महीने लग सकते हैं. मकान बनाते समय किसी ने भविष्य में आनेवाली दिक्कत का कोई ख्याल नहीं रखा और पाइपलाइन पर ही बाउंड्री, दुकान व मकान के कुछ हिस्से का निर्माण करा लिया है. जानकारों का कहना है कि सभी निर्माण पांच से 10 वर्ष के बीच में हुए हैं. यह पाइपलाइन 1954-55 के बीच में बिछायी गयी थी.
कई जगहों पर आ सकती है समस्या
खाली जमीन के नीचे पाइपलाइन होने पर मरम्मत करने में कोई परेशानी निगम के कर्मचारी को नहीं होती है. जहां पर पाइपलाइन के ऊपर निर्माण करा लिया गया है वहां भारी फजीहत उठानी पड़ती है. शहर में कई जगहों पर ऐसा ही हाल है. बाइपास से आगे बढ़ने पर कुछ जगहों पर और मकान व दुकान बनाये गये हैं.
बताया जाता है कि शहरी क्षेत्र में मकान बनाने से पहले नगर निगम के अधिकारी ही नक्शा स्वीकृत करते हैं. इसके बाद भी मकान बनाते समय निगम के वार्ड में तैनात इंजीनियर व अमीन की जिम्मेदारी होती है कि नक्शे के अनुसार ही मकान बनाने की निगरानी करें. इसके बाद भी अक्सर सरकारी जमीन पर कब्जे की बात निर्माण हो जाने के बाद ही सामने आती है.
इंजीनियर को दिया गया है जांच का आदेश
राइजिंग पाइपलाइन पर मकान, दुकान व बाउंड्री बनाये जाने की सूचना मिली है. लोगों को निर्माण कराने से पहले खुद भी आगे होनेवाली दिक्कत के बारे में विचार करनी चाहिए. पांच दिन पहले दंडीबाग में राइजिंग पाइप में ब्लास्ट होने के कारण एक मकान को क्षति पहुंची थी. निगम के कर्मचारी सतर्क नहीं रहते, तो बड़ा हादसा हो सकता था.
जहां मकान बन गये हैं राइजिंग पाइप को ठीक करने में परेशानी हो रही है. अन्य मकानों का मापी कर पाइपलाइन से हटाने के लिए नोटिस करने का आदेश निगम के इंजीनियर व संबंधित कर्मचारी को दिया गया है. एक सप्ताह के अंदर पाइपलाइन पर कराये गये निर्माण के मालिकों को नोटिस दे दिया जायेगा.
डॉ ईश्वर चंद्र शर्मा, नगर आयुक्त
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