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अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं से पीजी में नामांकन शुल्क नहीं लेगा मिथिला विश्वविद्यालय

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
मिथिला विवि
मिथिला विवि
फाइल

दरभंगा. लनामिवि में अब अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिलाओं से पीजी नामांकन शुल्क नहीं लिए जाएगा. यह निर्णय शुक्रवार को कुलपति प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई नामांकन समिति की बैठक में लिया गया. बैठक में कहा गया कि स्नातक स्तर तक 2016 से ही शुल्क नहीं लिया जा रहा है.

2016 से 2018 तक राज्यादेश के आलोक में इस कोटि के छात्रों से पीजी नामांकन में भी शुल्क नहीं लिए जाते थे. 2018 में सीबीसी‌एस रेगुलेशन लागू होने के बाद इन कोटि के छात्रों से शुल्क लिया जाने लगा था. बैठक में बताया गया कि सरकार के पास 2016 से अद्यतन इस मद में लनामिवि का 40 करोड़ 61 लाख 61 हजार 090 रुपये बकाया है.

सरकार से पैसा मिलने पर वापस कर दिये जायेंगे लिये जा चुके शुल्क : पीजी स्तर तक नामांकन के समय सभी प्रकार का शुल्क राज्य सरकार से राशि की होने वाली क्षति की प्रतिपूर्ति की प्रत्याशा में नहीं लिए जाएगा. जिन छात्रों से पूर्व में शुल्क लिया गया है, उन्हें राज्य सरकार से राशि प्राप्त होने पर वापस कर दी जाएगी.

2018 में राजभवन से निर्गत सीबीसीएस रेगुलेशन में स्नातकोत्तर में नामांकन हेतु चारों सेमेस्टरों हेतु विभिन्न प्रकार का शुल्क विवरणिका विश्वविद्यालयों को प्राप्त हुआ था. उक्त पत्र में ऐसा कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं था, कि इन कोटि के छात्रों से शुल्क ली जाएगी या नहीं. उस समय नामांकन समिति ने निर्णय लिया था कि स्पष्ट आदेश नहीं रहने के कारण तत्काल इन कोटि के छात्रों से भी शुल्क लिए जाएंगे एवं स्पष्ट निर्देश प्राप्त होने के बाद इन्हें वापस कर दिया जाएगा. इस संबंध में राजभवन से संपर्क भी किया गया लेकिन कोई निर्देश राजभवन से प्राप्त नहीं हो सका.

सरकार ने भेजा निर्देश :हाल में उच्च न्यायालय द्वारा सीडब्ल्यूजेसी नंबर 815 /2020 रंजीत पंडित बनाम राज्य सरकार एवं अन्य में 11 दिसंबर 2020 को पारित आदेश के आलोक में निर्देश दिया गया कि विभागीय संकल्प संख्या 1457 दिनांक 24-07-2015 द्वारा संशोधित निर्णय की अवहेलना करते हुए यदि किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय में संदर्भित कोटि के विद्यार्थियों से नामांकन के समय शुल्क लिया गया है, तो उसे वापस करने हेतु क्या कार्यवाही की गई है, इस बिंदु पर राज्य सरकार द्वारा प्रति शपथ पत्र दायर किया जाए.

राज्य सरकार के उप सचिव ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को इसके अनुपालन को सुनिश्चित करने का पत्र निर्गत किया है. बैठक में प्रति कुलपति प्रो. डॉली सिन्हा, कुलसचिव डॉ मुश्ताक अहमद, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. रतन कुमार चौधरी, सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. गोपी रमण प्रसाद सिंह, वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. डीपी गुप्ता, प्रधानाचार्य डॉ अरविंद कुमार झा, प्रो. विद्यानाथ झा, प्रभारी विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान प्रो. ध्रुव कुमार, अध्यक्ष छात्र कल्याण डॉ अशोक कुमार झा, परीक्षा नियंत्रक डॉ एस एन राय उपस्थित थे.

Posted by Ashish Jha

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