समानता के प्रतीक थे बाबा साहेब

Published at :07 Dec 2016 2:18 AM (IST)
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समानता के प्रतीक थे बाबा साहेब

पुण्यतिथि. याद किये गये डॉ भीमराव आंबेडकर दरभंगा : बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि पर स्थानीय राजकीय आंबेडकर कल्याण छात्रावास, मोगलपुरा में कार्यक्रम आयोजित हुआ. इसमें मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए नगर विधायक संजय सरावगी ने कहा कि आंबेडकरजी का कथन था कि जिसे अपने दु:खों से मुक्ति चाहिए उसे लड़ना होगा […]

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पुण्यतिथि. याद किये गये डॉ भीमराव आंबेडकर

दरभंगा : बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि पर स्थानीय राजकीय आंबेडकर कल्याण छात्रावास, मोगलपुरा में कार्यक्रम आयोजित हुआ. इसमें मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए नगर विधायक संजय सरावगी ने कहा कि आंबेडकरजी का कथन था कि जिसे अपने दु:खों से मुक्ति चाहिए उसे लड़ना होगा और जिसे लड़ना होगा उसे पढ़ना होगा. क्योंकि ज्ञान के बिना लड़ने गए तो हार निश्चित है. वे कहते थे कि संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज़ नहीं, यह जीवन का एक माध्यम है.
बाबा साहेब का मानना था कि अगर देश से भ्रष्टाचार समाप्त करना है तो प्रत्येक 10 सालों पर नोटबंदी करना पड़ेगा. वे आधुनिक भारत के निर्माता थे. उन्हें समानता का प्रतीक कहा जाता है. शोषित, पीड़ित, महिलाओं सामाजीक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक क्षेत्र में समानता देने की बात कही है. बाबासाहेब की वजह से ही आज सबको समान अधिकार है.
देश की नरेन्द्र मोदी सरकार उनके ही बताए मार्गों पर चल रही है. कार्यक्रम में लोजपा नेता सुनीति रंजन दास, छात्रावास अधीक्षक प्रो. विनय पासवान, प्रो. संजय महतो, भोला पासवान, कृष्ण कुमार पासवान, संतोष पासवान, उमेश राम, सुरेश महतो, गोपाल पासवान, कमल राम, दिलीप बैठा, मगलू राम ने विचार रखे.
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