हमर कोन गलती छय यो डाॅक्टर साहेब

Published at :19 May 2016 5:37 AM (IST)
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हमर कोन गलती छय यो डाॅक्टर साहेब

डॉक्टरों की हड़ताल का असर. डीएमसीएच से मरीजों का पलायन शुरू डीएमसीएच में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरायी इलाज नहीं होने से बेचैन िदखे मरीजों के परिजन दरभंगा : पिपरौलिया गांव निवासी मो. आरिफ की पत्नी परवीन को गायनिक वार्ड में डिलेवरी कराने के लिए ऑटो से लाया गया था. परिजनों ने मरीज को लादकर लेबर रुम […]

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डॉक्टरों की हड़ताल का असर. डीएमसीएच से मरीजों का पलायन शुरू

डीएमसीएच में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरायी
इलाज नहीं होने से बेचैन िदखे मरीजों के परिजन
दरभंगा : पिपरौलिया गांव निवासी मो. आरिफ की पत्नी परवीन को गायनिक वार्ड में डिलेवरी कराने के लिए ऑटो से लाया गया था. परिजनों ने मरीज को लादकर लेबर रुम तक ले गये. डिलेवरी रुम की स्टाफ नर्स ने मरीज को यह कहकर लौटा दिया कि यहां वरीय डाक्टर नहीं है. कहीं दूसरे जगह डिलेवरी करा लें. परिजन उस मरीज को लादकर फिर ऑटो चढाया और उसे निजी नर्सिंग होम की ओर ले गये. जाते जाते परिजनों ने बताया कि अब सरकारी अस्पताल को बंद कर देना चाहिये. जहां मरीज का इलाज नहीं होता हो वैसे संस्थान की क्या जरूरत.
कभी इमरजेंसी, तो कभी चेंबर का लगा रहे थे चक्कर : समस्तीपुर जिला के हसनपुर गांव निवासी अनिल साहु की पत्नी पूनम देवी को गायनिक वार्ड में पांच दिन पहले भर्ती कराया गया था. मरीज का ऑपरेशन करके बच्चा हुआ था. जिसमें उसकी गंभीर स्थिति बन गयी थी. उसे उसी दिन से गायनिक के आइसीयू में भर्ती कराया गया था. परिजन ने बताया कि हड़ताल के दिन से ही वरीय डाक्टर नहीं थे. इसके चलते एक कर्मी ने पीओडी को इमरजेंसी से बुलाया था. डाक्टर आये दवा लिखकर चले गये, लेकिन मरीज की स्थिति और भी गंभीर होती चली गयी. मरीज के इलाज में सुधार नहीं होते देख परिजन कभी इमरजेंसी तो कभी डाक्टर के चेंबर में चक्कर लगा रहे थे. लेकिन एक भी वरीय डाक्टर नहीं पाये गये.
मरीज आइसीयू के बेड पर चिल्ला चिल्ला कर परेशान थी. मरीज को संभालने केलिए चार लोग लगे थे. मरीज जब रामभरोसे है. परिजन बरामदा पर आते जाते लोगों के बीच डॉक्टरों की आस में टुकुर टुकुर देख रहे हैं, लेकिन इस बीच एक भी डॉक्टरों पर परिजन की नजर नहीं पड़ी.
खता किसी की, गुस्सा किसी पर
खरारी गांव निवासी संजय मंडल की पत्नी संगीता देवी की स्थिति और भी गंभीर है. मरीज का एक्टोपिक ऑपरेशन हुआ था. बीती रात मरीज की हालत गंभीर होती चली गयी. इसको लेकर
उसे आइसीयू में भर्ती कराया गया था. एक डॉक्टर ने मरीज को खून चढाने की सलाह दी. ब्लड रिएक्शन कर गया . वरीय डॉक्टरों के अभाव में कर्मियों ने खून को चढ़ाना बंद कर दिया और उस ब्लड को क्षेत्रीय रक्त अधिकोश में लौटा दिया. इसके बाद मरीज को खून चढाने की सलाह देने अभी तक कोई डाक्टर नहीं पहुंचे हैं. इसके पूर्व 17 मई को मरीज की हालत बिगड़ गयी थी. वरीय डॉक्टरों के अभाव मे ंअस्पताल अधीक्षक के आदेश पर डा. मायाशंकर ठाकुर मरीज को देखने पहुंचे. उन्होंने मरीजों को डाक्टरी सलाह दे चले गये, लेकिन ड्यूटी वाले डाक्टर नहीं आये.
कहते हैं अस्पताल अधीक्षक
डीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक डा. बालेश्वर सागर ने बताया कि वार्डों में मौत सामान्य दिनों की तरह है. इसका हड़ताल से कोई लेना देना नहीं है. मरीजों के इलाज के लिए पुख्ता इंताजम कर दिया गया है. सीएस से 30 डॉक्टरों की मांग की गयी है. सीएस ने 10 डाक्टर देने की बात कही है. अन्य वार्डों में विशेष तौर पर डॉक्टरों की नियुक्ति किया जा चुका है.
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