जीरो बैलेंस पर छात्रों का नहीं खोला जा रहा बैंक में खाता

Published at :23 Dec 2015 6:52 PM (IST)
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जीरो बैलेंस पर छात्रों का नहीं खोला जा रहा बैंक में खाता

जीरो बैलेंस पर छात्रों का नहीं खोला जा रहा बैंक में खाता शाखा से फ्रेंचाइजी तक दौड़ लगा रहे अभिलेख दरभंगा . क्षेत्र के विभिन्न बैंकों में जीरो बैलेंस पर खाता नहीं खोला जा रहा है. सभी बैंक में खाता खुलवाने के लिए मारामारी की स्थिति कायम है. हालांकि इस मामले में बैंक का रवैया […]

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जीरो बैलेंस पर छात्रों का नहीं खोला जा रहा बैंक में खाता शाखा से फ्रेंचाइजी तक दौड़ लगा रहे अभिलेख दरभंगा . क्षेत्र के विभिन्न बैंकों में जीरो बैलेंस पर खाता नहीं खोला जा रहा है. सभी बैंक में खाता खुलवाने के लिए मारामारी की स्थिति कायम है. हालांकि इस मामले में बैंक का रवैया ठीक नहीं है. वे राशि जमा किये बिना खाता खोलने को तैयार नहीं हैं. पिछले दिनों सरकार ने स्कूली बच्चों को छात्रवृत्ति एवं पोशाक की राशि देने के लिए नये अधिनियम लागू किया है. अब यह राशि सीधे छात्र-छात्राओं के खाता में उपलब्ध कराया जायेगा. इसके लिए उन्होंने जीरो बैलेंस पर खाता खोलने का सभी बैंकों को आदेश निर्गत किया है. इसी तरह सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि अब लाभुकों को सीधे उनके खाता में भेजा जायेगा. इसके लिए भी नये नियम को लागू कर जीरो बैलेंस पर लाभुकों का खाता बैंक में खोले जाने का निर्देश प्राप्त है. बैंक इस बात को मानने को तैयार नहीं है. वे खाता खोलने के नाम पर 500 से 1000 रुपये खाते में जमा करने पर ही खोलने को राजी होते हैं. दुलारपुर शाखा में हैं अफरातफरी का माहौल दुलारपुर गांव स्थित ग्रामीण बैंक शाखा में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए लाभुकों को बैंक में खाता खुलवाने में 1000 रुपये लिया जा रहा है. इतनी राशि जाम करने को लेकर अधिकांश गरीब, बेसहारा व लाचार वंचित हो रहे हैं. मसोमात परमेश्वरी देवी पति स्व हजारी पासवान तो अपना भरण-पोषण के लिए ही हमेशा परेशान रहती है. उसे पेंशन की कुछ राशि मिल जाने पर ही अपना जीवन बीता लेती है. उसे कोई सहारा देने वाला भी नहीं है. वे कहती हैं कि कहां से एक हजार रुपया लाकर बैंक में खाता खुलवायेंगे. इसी तरह स्व पवन पासवान की पत्नी फुलझर्डि़या देवी स्व मंगल सहनी की पत्नी लछमिनियां देवी, विकलांग वासुदेव सहनी पिता सुखराम सहनी, बदर दास पिता सुखराम सहनी व राजकुमार दास पिता स्व बुंदी दास आदि का भी यही रोना है. इन सभी के सामने आर्थिक तंगी की स्थिति बनी है. ऐसे में कैसे इन्हें पेंशन का लाभ मिल पायेगा. सभी का यही कहना है कि अब सरकार ही उन्हें इसका समाधान कर लाभ दिलाने की रास्ता दे सकती है. इस बात से सभी का बैचेनी बढ़ चुका है कि आगे क्या होगा.

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