कैंपस--प्राचीन में वर्त्तमान से बेहतर थी महिलाओं की स्थिति : परांजपे

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Nov 2015 7:01 PM

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कैंपस–प्राचीन में वर्त्तमान से बेहतर थी महिलाओं की स्थिति : परांजपे वर्त्तमान संदर्भ में महाभारतकालीन महिलाएं विषय पर संगोष्ठीफोटो- 4 व 5परिचय- सेमिनार को संबोधित करती डा. बिंदा परांजपे एवं उपस्थित शिक्षकगण व कॉलेज कर्मी व छात्राएंदरभंगा . एमआरएम कॉलेज में इतिहास विभाग की ओर से सोमवार को ‘वर्त्तमान संदर्भ में महाभारतकालीन महिलाएं’ विषय पर […]

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कैंपस–प्राचीन में वर्त्तमान से बेहतर थी महिलाओं की स्थिति : परांजपे वर्त्तमान संदर्भ में महाभारतकालीन महिलाएं विषय पर संगोष्ठीफोटो- 4 व 5परिचय- सेमिनार को संबोधित करती डा. बिंदा परांजपे एवं उपस्थित शिक्षकगण व कॉलेज कर्मी व छात्राएंदरभंगा . एमआरएम कॉलेज में इतिहास विभाग की ओर से सोमवार को ‘वर्त्तमान संदर्भ में महाभारतकालीन महिलाएं’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गयी. संगोष्ठी के मुख्य वक्ता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सामाजिक विज्ञान संकाय की डा. प्रो. बिंदा परांजपे ने महाभारतकाल में महिलाओं के विभिन्न आयामों की चर्चा करते हुए कहा कि उसमें गंगा नदी का चित्रण नदी और मुक्तिदायिनी स्त्री के रुप में किया गया है. उन्होंने महिलाओं के अधिकार पर चर्चा करते हुए कहा कि प्राचीन काल में महिलाओं की स्थिति वर्त्तमान परिपेक्ष्य में ज्यादा अनुकूल थी. उदाहरण प्रस्तुत करते हुए डा. परांजपे ने गंगा के साथ कुंती, गंधारी, द्रौपदी, मेनका, सावित्री और शकुंतला जैसी महिलाओं की चर्चा करते हुए कहा कि जीवन साथी के चयन में वे ज्यादा स्वतंत्र थी. इस विषय पर आज अधिक गहराई से चिंतन करने की जरुरत है. उन्होंने महाभारत की शकुंतला एवं कालीदास की शकुंतला के चरित्र का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए कहा कि वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में शकुंतला का चित्रण ज्यादा निराशाजनक है. जबकि महाभारतकालीन शकुंतला अधिक जीवंत प्रतीत होता है. संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए कहा कि महाभारतकालीन स्त्रियों के संदर्भ में वेदव्यास की ओर से चर्चित विवरण आज के समय में प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि संपूर्ण महाभारत में भगवान कृ ष्ण प्रबंधन गुरू के रुप में दिखाई देते हैं. जिससे प्रेरणा लेने की जरुरत है. इससे पूर्व प्रधानाचार्य डा. विद्यानाथ झा ने आगत अतिथियों का स्वागत किया. संगोष्ठी को समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डा. अनिल कुमार झा, इतिहास विभाग के अध्यक्ष डा. अजय कुमार झा ने अपने विचार रखे. मंच संचालन डा. पुनीता झा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डा. गजाला उर्फी ने किया. विभागाध्यक्षों की बैठक आजदरभंगा . कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन ने 24 नवंबर को शिक्षा शास्त्र विभाग के सभागार में 2 बजे से सभी विभागाध्यक्षों की बैठक बुलायी है. इसकी जानकारी देते हुए शोध एवं प्रकाशन अधिकारी सह नैक के लिए तैयारी कमेटी के समन्वयक डा. विमल नारायण ठाकुर ने कहा कि बैठक में 50 बिंदू वाली कोर इंडिकेटर परफर्मा से जुड़ी जानकारी पर चर्चा होगी. मांगे पूरी नहीं हुई तो 5 जनवरी से होगा अनिश्चितकालीन हड़तालदरभंगा . ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्रक्षेत्रीय कर्मचारी महासंघ की ओर से 26 व 27 नवंबर को विश्वविद्यालय मुख्यालय पर कार्यकारिणी समिति का सांकेतिक धरना दिया जायेगा. इसकी जानकारी प्रक्षेत्रीय मंत्री विनय कुमार झा ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है. उन्होंने इसके माध्यम से विवि प्रशासन को अगाह किया है कि उनके 12 सूत्री मांगों का अगर क्रियान्वयन नहीं किया गया तो 5 जनवरी 2016 से सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे. इसकी सारी जबावदेही विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी. मांगो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एसीपी, एमएसीपी परिनियम की अधिसूचना निर्गत होने के बाद भी लागू नहीं किया गय है. अनुकंपा कर्मियों के अलावा भी कई कर्मियों को वेतन भुगतान लंबित है. इसके अलावा भी कई मांगे है जिसे पूरा करवाने के लिए कर्मचारी आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं.

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