कैंपस....दूरस्थ शक्षिा के सामान्य पाठ्यक्रमों में बढ़ रही छात्रों की अभिरुचि

By Prabhat Khabar Digital Desk
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कैंपस....दूरस्थ शिक्षा के सामान्य पाठ्यक्रमों में बढ़ रही छात्रों की अभिरुचि सर्वाधिक नामांकन जून 2015 में कर्मियों एवं पदाधिकारियों की घोर कमी दरभंगा. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के द्वारा संचालित सामान्य पाठ्यक्रमों में छात्र-छात्राओं के नामांकन को लेकर दूरस्थ मुख्यालय में काफी भीड़ रही. इसी के कारण नामांकन तिथि को भी विस्तारित किया गया. वहीं अन्य सत्रों की तुलना में सर्वाधिक छात्र-छात्राओं का नामांकन इस बार हुआ है. छात्र-छात्राओं की संख्या को देखते हुए दूरस्थ में सुविधा के नाम पर टोटा है. काउंटर की संख्या कम होने व कर्मियों का पर्याप्त नहीं होना, वही अन्य आधारभूत समस्याओं से जूझने की मजबूरी छात्र-छात्राओं को होते रहती है. चाहे नामांकन हो या परीक्षा प्रपत्र जमा करना, निर्धारित तिथि में विस्तारित करना पड़ता है. चूंकि काउंटर की संख्या छात्रों के अनुपात में काफी कम है. उल्लेखनीय है कि दूरस्थ शिक्षा माध्यम से सामान्य पाठ्यक्रमों में बीए, एमए, बी.कॉम व एम.कॉम में पाठ्यक्रम को चलाया जाता है. इन पाठ्यक्रमों में निरंतर छात्र-छात्राओं की संख्या में वृद्धि हो रही है. वर्तमान सत्र में तो सिर्फ दूरस्थ मुख्यालय में 3 हजार 8 सौ 16 छात्र-छात्राओं का नामांकन हो चुका है. जबकि 16 अन्य अध्ययन केंद्रों पर भी अलग-अलग नामांकन हुआ है. अनुमान के मुताबिक उक्त पाठ्यक्रमों में कुल दस हजार से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हुई है. दूरस्थ में नामांकन के इच्छुक छात्रों को देखते हएु 10 अक्टूबर तक नामांकन तिथि विस्तारित की गयी. वहीं विलंब शुल्क के साथ 15 अक्टूबर तक उक्त पाठ्यक्रमों में नामांकन होना है. जानकार बताते हैं कि डिस्टेंस एडुकेशन ब्यूरो(डेब) के अनुसार 5 हजार से अधिक यदि दूरस्थ मुख्यालय में नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या होगी तो उसी अनुपात में कर्मियों एवं पदाधिकारियों की संख्या भी होनी चाहिए. वर्तमान सत्र में 3हजार 8 सौ 16 छात्र-छात्राएं नामांकित हुई है, जबकि जनवरी 2015 में नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या 2 हजार 3 सौ 86 है. वर्तमान में दूरस्थ शिक्षा कर्मियों एवं पदाधिकारियों की कमी से जूझ रही है. सभी आवश्यक कार्यों के निष्पादन मात्र निदेशक स्वयं करते हैं. बताया जाता है कि तत्काल समन्वयक की यहां नितांत आवश्यकता है. पर्याप्त कर्मियों के अभाव में कार्य संस्कृति प्रभावित हो रही है. निदेशक डॉ एएनकार गुप्ता बताते हैं कि काउंटर बढ़ाने की आवश्यकता तो है पर कर्मियों के अभाव के कारण ऐसा नहीं किया जा सकता है. बावजूद इसके सभी कार्यों को ससमय पूरा कर लिया जाता है.
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