निजी नलकूपों से मनमाना राशि की वसूली फोटो-फारवर्ड गौड़ाबौराम . किसानों के खेत की सिंचाई के लिए गाड़े गये नलकूप वर्षों से बंद पड़े हैं. किसान अपने खेत में पटवन के लिए प्राइवेट सुविधा से 80 से सौ रुपये प्रतिघंटा से खेत में पटवन के लिए मजबूर हैं. किसानों की समस्या सुनने वाला कोई नहीं है. इंद्र देवता भी नाराज चल रहे हैं. ऐसे में कैसे किसान खेती करेंगे. करकौली गांव के किसान रामानंद पासवान ने बताया कि ख्ेाती के लिए सरकार तो बीज दे रही है, परंतु खेत की सिंचाई कैसे हो इसकी कोई व्यवस्था नहीं कर रही है. कसरौड़ के किसान कृष्णचंद्र चौधरी का कहना था कि यहां के लोग खेती पर ही आधारित हैं. किसान अपने खेत में पटवन के लिए मालिक से कर्ज लेकर प्राइवेट से एक सौ रुपये प्रति घंटा पर पानी दे रहा है. ऐसे में कर्ज लेकर किसान की कमर टूट जाती है. बंगरहटा के बनारसी महतो ने बताया कि सरकार की ओर से जगह-जगह पर नलकूप गड़वाना चाहिए, ताकि किसानों को पटवन के लिए सुविधा मिल सके. प्रखंड क्षेत्र में तीन सरकारी नलकूप कसरौड़-करकौली, कसरौड़ बसौली एवं कसरौड़ बेलवाड़ा में है. परंतु सभी नलकूप खराब है. इधर प्रखंड कृषि पदाधिकारी उमेश बैठा ने बताया कि पीएचइडी विभाग की अकर्मण्यता के कारण सभी नलकूप खराब है. कसरौड़ करकौली पंचायत स्थित जिरात में नलकूप का निर्माणाधीन चैनल एक वर्ष में ही टूटकर बिखर गया है. अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उक्त चैनल के निर्माण में वेदक ने कितनी गुणवत्तापूर्ण कार्य किया होगा.
दिखावे के दांत बने सरकारी नलकूप
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