नोटबंदी के बाद जमीन रजिस्ट्री का गिरा ग्राफ

Published at :18 Nov 2016 6:00 AM (IST)
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नोटबंदी के बाद जमीन रजिस्ट्री का गिरा ग्राफ

नुकसान. 50 फीसदी कम हो गया सरकारी राजस्व बड़े नोटों की बंदी के बाद जमीन खरीद-बिक्री में कमी आयी है. निबंधन कार्यालय में विरानगी छायी रहती है. इस दौरान जमीन की खरीद-बिक्री में कमी आने से सरकारी राजस्व में 50 फीसदी राजस्व की कमी आयी है. बेतिया : विगत नौ नवम्बर से बड़े नोटो के […]

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नुकसान. 50 फीसदी कम हो गया सरकारी राजस्व

बड़े नोटों की बंदी के बाद जमीन खरीद-बिक्री में कमी आयी है. निबंधन कार्यालय में विरानगी छायी रहती है. इस दौरान जमीन की खरीद-बिक्री में कमी आने से सरकारी राजस्व में 50 फीसदी राजस्व की कमी आयी है.
बेतिया : विगत नौ नवम्बर से बड़े नोटो के नोटबंदी का असर प.चम्पारण के निबंधन कार्यालयो में भी देखने को मिल रहा है. जिले के जिला मुख्यालय बेतिया के अलावे बगहा एवं नरकटियागंज में स्थित निबंधन कार्यालयो में जहां नोटबंदी के पहले काफी चहल-पहल थी. वहीं अब पूरे परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है.
निबंधन कार्यालय में मंदी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वेंडर काम करने के बजाये फिलहाल ताश खेलते नजर आ रहे हैं. निबन्धन कार्यालय के रजिस्ट्रार भी इस बात को मानते हैं कि 500 और 1000 के नोट बन्द होने के बाद जमीन रजिस्ट्री में 50 से 60 प्रतिशत की कमी आयी है. पर्व त्योहार का मौसम होने के बावजूद नोटबंदी के पूर्व जिले में जहां 405 दस्तावेजों का निबंधन कराया गया.
वहीं पर्व त्योहार मौसम बीतने के बावजुद नोटबंदी के बाद जिले में मात्र 287 दस्तावेज निबंधित कराये गये है. इसमें से भी कुछ डीड ऐसे है जिनका शुल्क नोटबंदी के पूर्व हीं बैंक चालान के माध्यम से जमा कराया जा चुका है. अभी जो दस्तावेज निबंधित हो रहे है और जो नया चालान बन रहा है वह काफी कम कीमत की निबंधन शुल्क वाला.
ऐसी स्थिति में निबंधन कार्यालय में सन्नाटा के साथ-साथ इस पेशे में जुड़े दस्तावेज नवीसों के पेशे पर भी पड़ा है. जमीन की खरीद बिक्री करने वाले भी इन दिनों जमीन की खरीद बिक्री के कार्य में अपने को शिथिल दिख रहे है. हर के जुबान पर एक ही बात है कि पूरी स्थिति का जायजा लेने के बाद ही अगले महीने इस पेशे में तेजी लायी जायेगी. जिला निबंधन कार्यालय में उपलब्ध आंकड़ो के अनुसार केवल नवम्बर माह के आंकड़ो पर गौर किया जाय तो पर्व त्योहार के बावजूद एक नवम्बर से 8 नवम्बर के बीच तीनों निबंधन कार्यालय ने जहां 405
दस्तावेजों का निबंधन करते हुए 87 लाख 14 हजार 408 की वसूली की. वहीं नोट बंदी के बाद 9 नवम्बर से 16 नवंबर के बीच मात्र 287 दस्तावेजो का निबंधन करते हुए 47 लाख 51 हजार 155 रुपये की वसूली की. इसमें सबसे खराब स्थित शिकारपुर अवर निबंधन कार्यालय का रहा जहां नोटबंदी के प्रथम सप्ताह में 113 डीड निबंधित हुए वहीं नोट बंदी के बाद मात्र 5 डीड हीं निबंधित हुए है.
कहते हैं पदाधिकारी
8 नवंबर को केंद्र सरकार के 500 तथा एक हजार रुपये के नोट के आम लेनदेन में रोक लगाने की घोषणा के बाद जमीन की खरीद बिक्री के निबंधन की संख्या 50 फीसदी कम हुई है. वहीं जो निबंधन हो भी रहा है वह भी पूर्व के बने चालान पर या काफी कम कीमत शुल्क वाले जमीन का.
ताश व लुड्डो के सहारे कट रहा दस्तावेज नवीसों का समय
नोटबंदी के बाद रजिस्ट्री कार्यालयों में ग्राहको की कमी के कारण दस्तावेज नवीस भी बेरोजगार हो गये हैं. इन्हें दस्तावेज लिखने के लिए आ ही नहीं रहे है जिसके कारण ये किसी तरह से अपना समय काट रहे है. दस्तावेज नवीस बताते है कुछ दिनों हमारी हड़ताल और ऑनलाईन दस्तावेज निबंधन के कारण हम बेरोजगार रह गये. अब जब माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर दस्तावेज लिखने की छुट मिली भी तो अब नोटबंदी ने हमें बेरोजगार कर दिया है.
होटलवाले भी उदास, व्यवसाय पर पड़ा असर
निबंधन कार्यालयों में आने वाले क्रेता- विक्रेता के भरोसे अपनी खान पान की दुकान चलानेवाले होटल व्यावसायी भी उदास बैठ रहे है. होटल संचालक लालबाबू पटेल ने बताया कि जमीन रजिस्ट्री कराने आनेवाले के्रेता विक्रेता के साथ कुछ सहयोगी लोग भी आते थे. जिससे हमें अच्छी आमदनी हो जाती थी. जमीन रजिस्ट्री में आनेवाले लोगो की ज्यादा पसंद सामीष भोजन रहता है. जिस कारण हमें अच्छी आमदनी हो जाती थी. लेकिन नोटबंदी का असर रजिस्ट्री पर पड़ने के कारण हमारे व्यवसाय पर भी काफी असरपड़ा है.
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