दो किमी की सड़क में 300 गड्ढे

Published at :15 Sep 2016 6:12 AM (IST)
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दो किमी की सड़क में 300 गड्ढे

बदहाली. बानूछापर से छावनी जाने वाली सड़क का बुरा हाल दिक्कत प्रशासन तो दूर माननीय भी पूछनहार नहीं जगह-जगह मार्ग में बन गये हैं गड्ढे कई बार लोग कर चुके हैं आंदोलन ओवरलोडेड ट्रकों की होती है आवाजाही बेतिया : सड़क महज दो किमी और गढ्ढे 300 से अधिक. जी हा! यह सीन कहीं दूर […]

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बदहाली. बानूछापर से छावनी जाने वाली सड़क का बुरा हाल

दिक्कत
प्रशासन तो दूर माननीय भी पूछनहार नहीं
जगह-जगह मार्ग में बन गये हैं गड्ढे
कई बार लोग कर चुके हैं आंदोलन
ओवरलोडेड ट्रकों की होती है आवाजाही
बेतिया : सड़क महज दो किमी और गढ्ढे 300 से अधिक. जी हा! यह सीन कहीं दूर की नहीं बल्कि बानूछापर से छावनी जाने वाली सड़क की है़ इस मार्ग की हालात मौजूदा समय में बद से बदतर हो चुकी है़ हर कदम पर बने गढ्ढे दुर्घटनाओं को अंजाम देने के लिए तैयार से दिखते हैं. हालात यूं हैं कि रेलवे गुमटी से ताराबाग रोड होते हुए छावनी रेलवे ढाला की सड़क जानलेवा बन गयी है. सावधानी हटी दुर्घटना घटी जैसे स्लोगन राष्ट्रीय उच्च पथ की सड़कों पर लिखा होता है लेकिन यहां जगह जगह इस रास्ते में लिखने की जरुरत है.
रैक प्वाइंट से शहर के विभिन्न गोदामों तक जाने वाले वाहन भी इसी रास्ते से चलते है. बानूछापर में रहने वाले लोगों को कार्यालय, विद्यालय, बाजार, अस्पताल जाने का भी यहीं एकमात्र रास्ता है. शायद हीं कोई ऐसा दिन हो जब इस रास्ते में वाहन दुर्घटनाग्रस्त नही होते हो. यह तो चालको की सावधानी होती है कि दुर्घटनाएं बड़ी नहीं होती है. जिस दिन इस रास्ते में सीमेंट या उर्वरक लदा ट्रक खराब हो जाता है तो स्थिति देखने लायक होती है. लेकिन हैरत की बात तो यह है कि इस रास्ते पर किसी भी प्रशासनिक पदाधिकारी की नजर नही जाती है. कुछ वषों पहले पीसीसी की ढलाई हुयी थी. लेकिन ओवर लोडेड ट्रकों ने इस पीसीसी को पहाड़ी क्षेत्र का रास्ता बना डाला है. हालांकि तत्कालीन जिलाधिकारी अभय कुमार सिंह ने इस रास्ते को नये सिरे से बनवाने की हामी भरी थी. राज्य के अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के सदस्य नंदकिशोर चौधरी ने भी इस सड़क के पुर्ननिर्माण के लिए वरीय अधिकारियों से लेकर मंत्री तक पत्र लिखा लेकिन अभी तक उस पर भी कोई कार्रवाई नही हुई.
आये िदन दुर्घटना के शिकार होते लोग, फिर भी ध्यान नहीं
बानूछापर जाने वाली सड़क का हाल.
10 हजार की आबादी है प्रभावित
बानुछापर में निवास करने वाले करीब 10 हजार लोगों के अलावा शहरवासियों के लिए यह रास्ता जानलेवा साबित हो रहा है. बावजूद इसके इस अहम सड़क की मरम्मत की दिशा में कोई पहल नहीं हो रही है़
छावनी जाम के बाद यही मार्ग है विकल्प
चर्चित छावनी रेल गुमटी पर महाजाम लगने के बाद वाहन चालकों के लिए शहर में प्रवेश करने के लिए यहीं एकमात्र सुगम रास्ता बचता है. जिस रास्ते से वाहन चालक स्टेशन चौक की ओर चले आते हैं.
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