सत्याग्रह की भूमि पर इस बार ‘बगावत’
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Oct 2015 6:18 AM (IST)
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चंपारण का ऐतिहासिक महत्व है. गांधी ने यहां ‘चंपारण सत्याग्रह’ की शुरुआत की थी. चंपारण दो जिलों में बंटा है -पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण. दोनों जिलों को मिलाकर विधानसभा की 21 सीटें हैं. वर्ष 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में सभी 19 सीटें भाजपा-जदयू ने जीती थी. इस बार समीकरण बदला हुआ है. समीकरण […]
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चंपारण का ऐतिहासिक महत्व है. गांधी ने यहां ‘चंपारण सत्याग्रह’ की शुरुआत की थी. चंपारण दो जिलों में बंटा है -पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण. दोनों जिलों को मिलाकर विधानसभा की 21 सीटें हैं. वर्ष 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में सभी 19 सीटें भाजपा-जदयू ने जीती थी.
इस बार समीकरण बदला हुआ है. समीकरण बदला, तो महागंठबंधन और एनडीए के कुल पांच विधायक बेटिकट हो गये. कई दावेदार भी बागी बन कर चुनावी मुकाबले को रोचक बना रहे हैं. चंपारण में चौथे चरण में एक नवंबर को मतदान है. आइए, जानते हैं चंपारण का चुनावी परिदृश्य.
शशिभूषण कुंवर
महात्मा गांधी के आंदोलन की भूमि रही चंपारण ने 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-जदयू गंठबंधन के पक्ष में झोली भर कर सीटें दी थीं. चंपारण की सभी 19 सीटें भाजपा-जदयू के खाते में आयी थी. दो पर निर्दलीय जीते थे, जिन्होंने बाद में तत्कालीन एनडीए का समर्थन किया था.
2015 का चुनाव आते-आते पूरे चंपारण का राजनीतिक समीकरण बदल गया. अब जदयू और भाजपा लड़ाई में आमने-सामने है. भाजपा की अगुआई में एनडीए गंठबंधन मैदान में है जबकि दूसरी ओर जदयू-राजद-कांग्रेस का महागंठबंधन है. 2015 के चुनाव में समीकरण बदला तो कई बेटिकट कर दिये गये. सीटिंग विधायकों का टिकट काट दिया गया है तो कुछ क्षेत्रों में नये उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है.
इस बार बागियों की भी भारी-भरकम संख्या है, जो कहीं किसी का खेल बिगाड़ सकते हैं, तो किसी को मदद भी पहुंचा सकते हैं. चंपारण में चौथे चरण में मतदान होना है.
पश्चिम चंपारण की कुल नौ विधानसभा क्षेत्रों में महागंठबंधन के सीटिंग तीन विधायकों राजेश सिंह (वाल्मिकीनगर), बगहा (प्रभात रंजन) और मनोरमा प्रसाद (नौतन) का जेडीयू ने टिकट काट कर नये उम्मीदवारों पर दावं लगाया है. वहीं भाजपा ने चंद्रमोहन राय (चनपटिया) और रश्मि वर्मा (नरकटियागंज) का टिकट काट दिया है. वाल्मिकीनगर में तीन बार से विधायक रहे जदयू के बागी राजेश सिंह सपा के उम्मीदवार होंगे, जबकि भाजपा की बागी उम्मीदवार रिंकु सिंह भी मैदान में हैं. महागंठबंधन ने कांग्रेस और राजग ने रालोसपा के प्रत्याशी को मैदान में उतारा है.
रामनगर सीट पर भाजपा की सीटिंग विधायक भागीरथी देवी व कांग्रेस के पूर्णमासी राम के बीच मुकाबले की तसवीर बन रही है. इस क्षेत्र मे थारू व सवर्ण मतदाता निर्णायक होते हैं. नरकटियागंज में महागंठबंधन और एनडीए के उम्मीदवारों के विरोध में भाजपा की बागी विधायक रश्मि वर्मा व कांग्रेस के बागी फखरूद्दीन हैं. बगहा मे भाजपा ने नये उम्मीदवार के रूप में आरएस पांडेय को उतारा है तो जेडीयू ने सीटिंग विधायक प्रभात रंजन का टिकट काट कर भीष्म सहनी को मैदान में उतारा है.
जिला में सर्वाधिक मतों से विजयी होने वाले प्रभात रंजन के बागी उम्मीदवार के रूप में मैदान में आने के बाद मुकाबला दिलचस्प हो जायेगा. लौरिया से निर्दलीय चुनाव जीतनेवाले विनय बिहारी भाजपा के उम्मीदवार हैं. राजद ने यहां से रणकौशल सिंह को मैदान में उतारा है.
जेडीयू के पूर्व विधायक प्रदीप सिंह और राजद के बागी शंभू तिवारी यहां से चुनाव लड़ते हैं तो समीकरण में उलट-फेर हो सकता है. नौतन से जदयू ने मनोरमा प्रसाद का टिकट काट कर पूर्व सांसद बैद्यनाथ प्रसाद महतो को उम्मीदवार बनाया है. मनोरमा सपा से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. भाजपा ने यहां से नारायण साह को प्रत्याशी बनाया है.
चनपटिया में लड़ाई बाहरी बनाम स्थानीय के बीच होगी. बेतिया में तीन बार की सीटिंग विधायक रेणु देवी का मुकाबला कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी से दिख रहा है. सिकटा में चार बार विधायक रह चुके भाजपा के दिलीप वर्मा और पूर्व विधायक खुर्शीद आलम आमने-सामने हैं. रक्सौल में जेडीयू के बागी विधायक श्याम बिहारी प्रसाद के चुनाव लड़ने से वैश्य मतों का बिखराव होगा.
नरकटिया में राजद के शमीम व रालोसपा के संत सिंह कुशवाहा के बीच आमने-सामने की लड़ाई के आसार नजर आ रहे हैं. हरसिद्धी में राजद के उम्मीदवार राजेंद्र राम हैं. गोविंदगंज में लोजपा के राजू तिवारी के खिलाफ कांग्रेस ने ब्रजेश कुमार पांडेय को उतारा है. केसरिया में भाजपा के राजेंद्र गुप्ता को जबकि महागंठबंधन ने डा राजेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है.
अगर बबलू दूबे उम्मीदवार होते हैं तो सवर्ण मतों में बिखराव होगा. कल्याणपुर सीट पर मनोज यादव के मैदान में उतरने से भाजपा व जेडीयू की लड़ाई त्रिकोणीय हो सकती है.
2010 के चुनाव में चंपारण ने भाजपा-जदयू को 19 सीटें दी थीं
विस क्षेत्र महागंठबंधन राजग जीत सेकेंड
वाल्मीकिनगर मो. इरशाद हुसैन (कांग्रेस) सुरेंद्र सिंह (रालोसपा) जदयू राजद
रामनगर पूर्णमासी राम (कांग्रेस) भागीरथी देवी (भाजपा) भाजपा कांग्रेस
नरकटियागंज विनय वर्मा (कांग्रेस) रेणु कुमारी (भाजपा) भाजपा कांग्रेस
बगहा भीष्म सहनी (जदयू) राघव शरण पांडेय (भाजपा) जदयू राजद
लौरिया रण कौशल प्रताप सिंह (राजद) विनय बिहारी (भाजपा) निर्दलीय जदयू
नौतन वैद्यनाथ महतो (जदयू) नारायण प्रसाद (भाजपा) जदयू लोजपा
चनपटिया एनएन शाही (जदयू) प्रकाश राय (भाजपा) भाजपा बसपा
बेतिया मदन मोहन तिवारी (कांग्रेस) रेणु देवी (भाजपा) भाजपा निर्दल
सिकटा खुर्शीद आलम (जदयू) दिलीप वर्मा (भाजपा) निर्दल जदयू
रक्सौल सुरेश कुमार (राजद) अजय कु सिंह (भाजपा) भाजपा लोजपा
सुगौली आम प्रकाश चौधरी (राजद) रामचंद्र साहनी (भाजपा) भाजपा राजद
नरकटिया शमीम अहमद (राजद) संत सिंह कुश्वाहा (रालोसपा) जदयू लोजपा
हरसिद्धि राजेंद्र राम (राजद) कृष्ण नंदन पासवान (भाजपा) भाजपा राजद
गोविंदगंज ब्रजेश कुमार पांडेय (कांग्रेस) राजू तिवारी (लोजपा) जदयू लोजपा
केसरिया राजेश कुमार (राजद) राजेंद्र गुप्ता (भाजपा) भाजपा सीपीआइ
कल्याणपुर रजिया खातून (जदयू) सचिन्द्र प्र. सिंह (भाजपा) जदयू राजद
पिपरा अवधेश प्र कुशवाहा (जदयू) श्याम बाबू प्रसाद (भाजपा) जदयू राजद
मधुबन शिवजी राय (जदयू) राणा रंधीर सिंह (भाजपा) जदयू राजद
मोतिहारी मणि भूषण श्रीवास्तव (राजद) प्रमोद कुमार (भाजपा) भाजपा राजद
चिरैया लक्षमी नारायण यादव (राजद) लाल बाबू प्र गुप्ता (भाजपा) भाजपा राजद
ढाका फैसल रहमान (राजद) पवन कुमार जायवाल (भाजपा) निर्दल जदयू
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