शक्तिगृह का एक पंप खराब, कभी हो सकती है विद्युत आपूर्ति ठप

Published at :28 Jun 2015 7:40 AM (IST)
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शक्तिगृह का एक पंप खराब, कभी हो सकती है विद्युत आपूर्ति ठप

बगहा : वाल्मीकिनगर पूर्वी गंडक नहर जल विद्युत परियोजना में तीन विद्युत उत्पादन यूनिट लगे है. तीनों अगर सही सलामत चलें तो 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकता है. लेकिन पानी की किल्लत की वजह से विद्युत उत्पादन के दो यूनिट पहले से बंद हैं. एक यूनिट चालू है, जिसमें पांच मेगावाट बिजली का […]

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बगहा : वाल्मीकिनगर पूर्वी गंडक नहर जल विद्युत परियोजना में तीन विद्युत उत्पादन यूनिट लगे है. तीनों अगर सही सलामत चलें तो 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकता है. लेकिन पानी की किल्लत की वजह से विद्युत उत्पादन के दो यूनिट पहले से बंद हैं. एक यूनिट चालू है, जिसमें पांच मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है. वह भी प्रत्येक चार घंटे के बाद बंद होता है. यह समस्या इस वजह से है कि शक्ति गृह का एक कुलिंग पंप खराब हो गया है.

इस लिए मशीन को ठंडा करने के लिए प्रत्येक चार घंटे पर बंद किया जाता है. फिर बिजली का उत्पादन होता है. जल विद्युत परियोजना के जानकार बताते हैं कि इससे विभाग को प्रतिमाह 1.50 लाख की क्षति है. जल विद्युत परियोजना के सहायक अभियंता राजीव रंजन ने बताया कि पंप की खराबी की वजह से विद्युत उत्पादन को ब्रेक करना पड़ता है. क्योंकि विकल्प के रूप में लगाया गया एक अतिरिक्त पंप खराब हो चुका है. इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को दी गयी है. लेकिन आवंटन के अभाव में मरम्मत नहीं हो रही है.

छह हजार खर्च और 1.50 लाख की क्षति

जल विद्युत परियोजना में खराब हुए पंप की मरम्मत कराने में मात्र छह हजार रूपये का खर्च है. विद्युत उत्पादन के लिए लगाये गये संयत्र को जून में चालू किया गया. उसी के साथ पता चला कि कुलिंग पंप खराब है. कुलिंग पंप का मुख्य काम मशीनों की बड़े – बड़े बैरिंग में जाने वाले तेल को ठंडा करना है. चूंकि बैरिंग में जाने वाले तेल तुरंत गरम हो जाते हैं और गरम तेल के स्पर्श में आने से बैरिंग के फटने की संभावना रहती है. इस लिए तेल को ठंडा करने के लिए कुलिंग पंप लगाये गये हैं.

चार घंटे चलने की क्षमता

तकनीकी जानकार बताते हैं कि एक पंप की लगातार चलने की क्षमता महज चार घंटे की है. चार-चार घंटे के अंतराल पर दो पंप इस कार्य के लिए 24 घंटे उपयोग में लिए जाते है. प्रत्येक 4 घंटे के बाद पहले पंप को बंद कर ठंडा करने हेतु छोड़े जाने के साथ हीं दूसरा पंप चालू कर दिया जाता है.

दोनों पंप बारी-बारी चालू रहते है. क्योंकि एक पंप लगातार लगातार चार घंटे चलने के बाद गर्म हो जाता है. किंतु इस माह के शुरू से हीं एक पंप जला हुआ है. जिसकी मरम्मती में मात्र छह हजार रुपये के खर्च की संभावना है. लेकिन विभाग की ओर से मरम्मत के लिए छह हजार की राशि नहीं आ रही है और 1.50 लाख का प्रति दिन का नुकसान ङोला जा रहा है.

पांचों एसी हो गये खराब

जल विद्युत परियोजना के पूरे सिस्टम का ऑपरेशन कंप्यूटराइज्ड है. जहां रिले सिस्टम लगे हुए है. इसको ठंडा रखने के लिए 5 एसी लगाये गये हैं. रिले सिस्टम के पांचों एसी खराब हो गये हैं. इस लिए ऑपरेशन सिस्टम में काम करने वाले कर्मी इस गरमी के मौसम में शक्ति गृह की उच्च ताप में एक तरह से झुलस कर काम कर रहे हैं. एक कर्मी ने नाम नहीं प्रकाशित करने के शर्त पर बताया कि शक्ति गृह में उच्च ताप रहता है.

इस वजह से उसे ठंडा करने के लिए एसी लगाया गया है. ताकि कर्मी आराम से ड्यूटी कर सकें. लेकिन एसी के खराब हो जाने के कारण काम करने में काफी कठिनाई होती है. कई बार तो ऐसा होता है कि काम छोड़ कर बाहर जाना पड़ता है.

प्रोजेक्ट के तल में बढ़ा पानी का दबाव

प्रोजेक्ट के तल में पानी का रिसाव होते रहता है. उस पानी की निकासी के लिए डी वाटरिंग पंप लगाये गये हैं.

ताकि शक्ति गृह के तल में रिसाव किये पानी की निकासी होती रहे. डी वाटरिंग के लिए दो पंप लगाये गये हैं जिसमें से चार खराब हो चुके हैं. एक पंप से रिसाव किये हुए पानी की निकासी होती है. उसकी क्षमता कम है. इस वजह से पूरी तरह से पानी की निकासी नहीं हो रही है. लगातार शक्ति गृह के तल में पानी का दबाव बढ़ रहा है. वह पंप लगातार चल रहा है.लोड की वजह से उसमें भी तकनीकी खराबी आ सकती है.ऐसे में शक्ति गृह के तल में पानी भरने की संभावना है.

गुल हो जायेगी बिजली

वाल्मीकिनगर पूर्वी गंडक नहर जल विद्युत परियोजना की उत्पादित बिजली से हीं जिले के अधिकांश इलाके में आपूर्ति चल रही है. अगर जल विद्युत परियोजना के पंप पूरी तरह से खराब हो गये तो किसी भी वक्त उत्पादन बंद हो सकता है.

डी वाटरिंग पंप के खराब होने की स्थिति में शक्ति गृह रिसाव के पानी से जल मगA हो सकता है. ऐसे में एक बार फिर बगहा, वाल्मीकिनगर, लौरिया, रामनगर, चौतरवा, नरकटियागंज, गौनाहा आदि के इलाके में बिजली के लिए हाहाकार मच सकता है. परियोजना के अधिकारियों ने इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को दी है. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.

बोले अधिकारी

डी वाटरिंग एवं कूलिंग पंप खराब है. इस बाबत वरीय अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है. फंड की कमी है, अन्यथा मोटर की मरम्मत स्थानीय स्तर पर भी करायी जा सकती है. शीघ्र हीं इस समस्या का समाधान होने की संभावना है.

राजीव रंजन, सहायक अभियंता, जल विद्युत परियोजना, वाल्मीकिनगर

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