लोगों के अरमान भी बहा ले गयी बाढ़
Updated at : 22 Aug 2017 5:06 AM (IST)
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आफत. बेघर हुए हजारों, दर्जनों की गयी जान, टूट गयीं सड़कें व फसल हुई बरबाद चनपटिया : सिकरहना नदी में पिछले दिनों आई भयंकर बाढ़ ने चनपटिया एवं आसपास के क्षेत्रों में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया. अब तक के इतिहास का यह सबसे बड़ा बाढ़ माना जा रहा है. इसके भयानक प्रकोप ने […]
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आफत. बेघर हुए हजारों, दर्जनों की गयी जान, टूट गयीं सड़कें व फसल हुई बरबाद
चनपटिया : सिकरहना नदी में पिछले दिनों आई भयंकर बाढ़ ने चनपटिया एवं आसपास के क्षेत्रों में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया. अब तक के इतिहास का यह सबसे बड़ा बाढ़ माना जा रहा है. इसके भयानक प्रकोप ने कइयों का जीवन छीन लिया, कई लोग बेघर हो गए तो कई कंगाली का दंश झेल रहे हैं.
बाढ़ के पानी के साथ लोगों के अरमान भी बह गए. कई कई दिन तक लोगों को भूखा प्यास रहना पड़ा. वैसे प्रसासन व समाजसेवी लोगो द्वारा बाढ़ में घिरे लोगों तक राहत पहुंचाया जाता रहा. परंतु कुछ ऐसे भी गांव थे, जहां पहुंच पाना मुश्किल ही नहीं सम्भव भी था. अब बाढ़ काम हुआ है तो लोगों को तमाम तरह की चिंताएं सताने लगी है. गिरा हुआ घर, टूटी सड़कें,पानी से बर्बाद फसल, अपनो को खोने का गम आदि. अब इनकी भरपाई हो पाना मुश्किल है.
बंधा होता बांध तो नहीं होती इतनी तबाही : बाढ़ से हुई तबाही के बारे में अगर बात करे तो अगर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने इस पर जरा सा भी ध्यान दिया होता और इस दिशा में कार्य हुए रहते तो इतना नुकसान नहीं हुआ रहता. ग्रामीणों की मानें तो सिकरहना नदी के दक्षिणी किनारे पर बसे गांव बड़कुड़वा, पुरैना, नुनियावा टोला, तुलरामघाट, बकुलहर, घोघा समेत कई गांव हैं जहां बाढ़ से सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है. मात्र चनपटिया नगर के उत्तर में पूरब की ओर वर्षो पूर्व नदी पर बांध बनाया गया है वो भी कुछ दूर के बाद छोड़ दिया गया. जबकि यह बाँध चनपटिया से होते हुए तुलरामघाट होते हुए शिवाघाट पुल तक जाना था. जो कि पूरा नहीं हो सका. अगर यह पूरा हो गया रहता तो इतनी बड़ी तबाही नहीं होती.
दिखने लगा डीएम के आदेश का असर, मरम्मति शुरू: बेतिया/सरिसवा. जिलाधिकारी डाॅ निलेश देवरे के आदेश का असर विभागीय अधिकारियों पर भी स्पष्ट रुप से दिखने लगा है. जिले के विभिन्न मार्गों पर बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है. जिलाधिकारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रो के कई गांवो में कटाव के कारण सम्पर्क पथ के क्षति ग्रस्त हो जाने से यातायात बाधित हो गयी है. इसके लिए संबंधित प्रखंडो के कनीय अभियंताओं एवं सहायक अभियंताओं से क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों व पथों की सूची मांगी गयी थी. अभी तक मिली सूची के आधार पर संबंधित विभागीय अधिकारियों को क्षतिग्रस्त सड़क एवं पुल पुलियों की मरम्मत का आदेश दिया गया है. इधर जिलाधिकारी के आदेश के आलोक में विभागीय अधिकारी भी सक्रिय हो गये और जिले के विभिन्न मार्गों पर संपर्क पथों की मरम्मति का काम शुरू कर दिया गया. इसी कड़ी में बेतिया सरिसवा पिपरपाती पथ की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है.
इसमें आज जेसीबी मशीन लगाकर सरिसवा धनकुटवा के समीप ही करीब तीस फुट में एकदम पूर्ण रुपेण टूट चुके सड़क पर ईंट का टुकड़ा गिराकर उसे मोटरेबुल किया गया. इसी तरह शिकारपुर ठोरी रोड में क्षतिग्रस्त पुल के पास संपर्क स्थापित करने के लिए भराई कर उसे मोटरेबुल बनाने का काम आंरभ कर दिया गया हैं. डीएम ने बताया कि इसके साथ ही नहरों के टूटे तटबंधों की मरम्मत भी यथाशीघ्र कर लेने का निर्देश जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को दिया गया है.
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