पारिवारिक प्रतिष्ठा बचाने में बलि चढ़ गया रूपेश

Updated at : 05 Apr 2017 5:13 AM (IST)
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पारिवारिक प्रतिष्ठा बचाने में बलि चढ़ गया रूपेश

दोहरा हत्याकांड छह माह पूर्व ही चाय में जहर देकर पूरे परिवार को मारना चाहती थी पूजा दिन रात पंप पर काम कर पत्नी के लिए 30 हजार का खरीदा था आभूषण अरेराज : अगर छह माह पहले ही रूपेश के माता-पिता संभल गये होते तो आज उनका लाल बलि नहीं चढ़ता. सामाजिक व पारिवारिक […]

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दोहरा हत्याकांड

छह माह पूर्व ही चाय में जहर देकर पूरे परिवार को मारना चाहती थी पूजा

दिन रात पंप पर काम कर पत्नी के लिए 30 हजार का खरीदा था आभूषण

अरेराज : अगर छह माह पहले ही रूपेश के माता-पिता संभल गये होते तो आज उनका लाल बलि नहीं चढ़ता. सामाजिक व पारिवारिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए बात को दबाना बहुत ही महंगा पड़ा. मृतक रूपेश के पिता बिनोद ठाकुर ने बताया कि अगर छह माह पूर्व ही हमलोग सामाजिक प्रतिष्ठा नहीं देखे होते तो आज हमारे पुत्र की हत्या नहीं होती. उन्होंने बताया कि पतोहू पूजा द्वारा छह माह पूर्व परिवार के सभी लोगों को मारने की साजिश की गई थी.

लेकिन भगवान ने पूरे परिवार को बचा लिया. छह माह पूर्व सुबह की चाय में जहर मिलाकर पूरे परिवार को मारने का प्रयास किया था. लेकिन पूजा को चाय में जहर मिलाते मृतक रूपेश के छोटे भाई ने देख लिया था. चाय का कप परिवार के हाथ में आया था कि स्टेस ने पोल खोल दिया और चाय फेंक दिया गया. लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण यह बात परिवार में ही दबा दिया गया.

तीसरे प्रयास में हुई रूपेश की हत्या : रूपेश की पत्नी ने पहले पूरे परिवार को मारने की कोशिश की. लेकिन सफलता नहीं मिलने पर अपने आशिक से मिलकर चार माह पूर्व आर्मी में बहाली के नाम पर मुजफ्फरपुर बुलाकर हत्या करने का प्रयास किया गया. लेकिन रूपेश के किसी मित्र को योजना की भनक लगने के कारण दूसरा प्रयास भी विफल हो गया. लेकिन तीसरे प्रयास में पूजा को पति की हत्या की योजना में सफलता मिल गयी.

चार दिन पूर्व रूपेश के संपर्क में आया था आलोक : रूपेश के संपर्क में 29 मार्च को शातिर अपराधी आलोक आया था. रूपेश के चाचा अशोक ठाकुर ने बताया कि 29 मार्च को अरेराज में सामूहिक उपनयन संस्कार हो रहा था. उसी दिन रूपेश की चाची के श्राद्धकर्म की खरीदारी होने जा रही थी. जब रूपेश घर से अरेराज बाजार के लिये चला तो रास्ते में ही था कि आलोक ने रूपेश के मोबाइल पर फोन कर मिलने के लिए उपनयन संस्कार स्थल पर बुलाया. जब रूपेश ने आलोक से पूछा कि हम आपको नहीं पहचान रहे हैं. साथ ही मेरा नंबर आपको कौन दिया तो आलोक ने बताया कि पूजा ने नंबर दिया है. उसके बाद बंद गाड़ी में रूपेश व आलोक ने बात की थी. उस दिन के बाद से आलोक की गाड़ी हत्या की शाम तक रूपेश से मिलने के लिए आती रही.

दिन-रात मेहनत कर खरीदा था आभूषण

मृतक रूपेश की हत्या में उसकी पत्नी पूजा ने जो आभूषण का प्रयोग किया है. वह आभूषण मृतक रूपेश के पेट्रोल पंप पर दिन रात के मेहनत की कमाई का था. शादी में सात थान गहना गया था, लेकिन पूजा मायके से आने के लिए तैयार नहीं थी. तब रूपेश ने अपनी पत्नी के लिए 30 हज़ार का गहना खरीदा, जिसको लेकर उसने एक माह तक दोनों शिफ्ट में पेट्रोल पंम पर काम करना पड़ा था. रूपेश की मां कुमुद देवी की माने तो पूजा को रास्ता बदलने के लिए उनके पुत्र ने काफी प्रयास किया. पेट्रोल पंप पर ड्यूटी के बाद जब भी शाम को घर जाता था तो बलहा चौक से मीट भुजवा व अंडा लाकर अपने हाथ से खिलाता था. लेकिन वही उसकी हत्यारिन बन गयी.

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