पू चंपारण में 11 की मौत

Updated at : 26 Apr 2015 7:52 AM (IST)
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पू चंपारण में 11 की मौत

जोरदार झटके मोतिहारी/रक्सौल : जिले में भूकंप के जोड़दार झटके से कई जगह तबाही मची है़ इसमें 11 जानें चली गयी, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गय़े कई इमारतों में दरारें पड़ गयी़ वहीं कुछ जगहों पर घर की दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह गयी. दीवार में दब कर दो बच्ची सहित पांच […]

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जोरदार झटके
मोतिहारी/रक्सौल : जिले में भूकंप के जोड़दार झटके से कई जगह तबाही मची है़ इसमें 11 जानें चली गयी, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गय़े कई इमारतों में दरारें पड़ गयी़ वहीं कुछ जगहों पर घर की दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह गयी.
दीवार में दब कर दो बच्ची सहित पांच लोगों ने दम तोड़ दिया, जबकि घोड़ासहन में भूकंप के झटके से एक व्यक्ति की हार्ट अटैक आने से मौत हो गयी़ भूकंप का पहला झटका दिन के 11:49 बजे आया़ उस समय पूरा आवाम अपने दिनचर्या में जुटा था, लेकिन जैसे ही धरती कांपनी शुरू हुई और इमारतें हिलने लगी़ अचानक चारों तरफ भगदड़ व चीख-पुकार मची गयी़ लोग घरों से निकल कर भागने लग़े दफ्तरों से हाकिम व मुलाजिम सभी बाहर निकल गय़े
स्कूलों में शिक्षकों ने बड़ी सावधानी से बच्चों को बिल्डिंग से बाहर निकाला़ कुछ देर बाद जब स्थिति सामान्य हुई तब लोग अपने बच्चों को लाने स्कूल की तरफ दौड़ पड़़े ठीक आधे घंटे के बाद 12:15 बजे भूकंप का दूसरा हल्का झटका आया़ सडकों पर लगे बारिश का पानी हिलोरे मारने लगा़ वहीं बिजली के तार आपस में टकरा करने लगी़ किसी बड़ी अनहोनी से सहमे शहरवासी सड़कों पर निकल आय़े हर कोई अपने सगे-संबंधियों व परिचितों की हालचाल जानने के लिए मोबाइल पर व्यस्त हो गय़े
हालांकि भूकंप के कारण कुछ देर तक बीएसएनएल व एयरटेल का नेटवर्क खराब रहा, जिसके कारण लोगों को एक दूसरे से संपर्क नहीं हो पाया़ लोग बता रहे हैं कि शाम 6:30 बजे तक पांच बार भूकंप का झटका महसूस किया गया है़ 21 वीं सदी का यह पहला भूकंप था, जिसमें लोगों ने अपने आंखों से इमारतों को हिलते देखा है़
रक्सौल. सीमाई इलाके में भूकंप का व्यापक प्रभाव देखा गया. अनुमंडल के सीमाई इलाके खासकर भेलाही थाना क्षेत्र के गांवों में कई घरों के गिरने से तीन लोगों के मौत होने की खबर है. वहीं एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होने व एक दर्जन लोगों के घायल होने की बात सामने आयी है.
जानकारी के मुताबिक मुसहरवा गांव में दस वर्षीय युवती शिवदुलारी की मौत उस समय हो गयी, जब वह भूकंप से जान बचाने के लिए भागते हुए एक व्यक्ति के घर के किनारे दीवार पकड़ कर खड़ी हो गयी थी. इसी दौरान दीवार के गिरने से उसकी मौत मौके पर ही हो गयी.
वहीं मुसहरवा गांव के ही ओमदास की मौत हार्ट-अटैक होने से हो गयी है. जानकारी के मुताबिक ओम दास भूकंप को महसूस घर से दौड़ते हुए बाहर निकला, इसी दौरान हार्ट अटैक आने से उसकी मौत मौके पर ही हो गयी. जबकि भेलाही बाजार के माइस्थान मोहल्ला निवासी ब्रrादेव सहनी के सिर पर दीवार गिर जाने गंभीर रूप से घायल हो गये है, इलाज के लिए उन्हें रक्सौल लाया गया. उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए काठमांडो भेज दिया गया. इलाज के लिए रास्ते में ले जाने समय उसकी मौत हो गयी.
जबकि इलाके में दो दर्जन लोगों के घायल होने की खबर है. घायलों में चिलझपटी आदापुर निवासी मो सैमुद्दीन जो मोटरसाइकिल से रक्सौल आ रहे थे, धरती को एका-एक जोर से डोलते देख मोटरसाइकिल छोड़ कर भागने की कोशिश किये, इस दौरान वें गंभीर रूप से घायल हो गये. वहीं कोइरीया टोला निवासी लालपरी देवी को भूकंप के झटके को देकर हार्ट-अटैक आया है, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भरती कराया गया है. जबकि पूरे इलाके में कई घरों में कई घरों में दरार आने की भी खबर है.
अतिसंवेदनशील है जिला
शनिवार को आये भूकंप के झटके से जानमाल को काफी नुकसान हुआ है़ इसके प्रभाव से जिले के विभिन्न प्रखंडों में 11 लोगों की मौत हो गयी, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए है़, जिनका उपचार चल रहा है़ तीव्र गति से हुए कंपन से पक्का मकान क्षतिग्रस्त हुए है़ं कई जगह पुराने मकान के छज्जा व दीवाल गिरने की सूचनाएं हैं, तो इमारत व भवनों के दीवार में दरार पड़ गयी है़ भूकंप के तीव्र गति के झटका से मकानों को हुई क्षति करोड़ों में आंका जा रहा है़
मोतिहारी : पूर्वी चंपारण भूकंप के लिए अतिसंवेदनशील माना जाता है़ नेपाल से सटा सूबे का यह क्षेत्र सेसनिक जोन पांच में आता है, जिसको लेकर यहां भूकंप जैसी आपदा की संभावना बराबर बनी रहती है़ जानकारी बताते है कि यहां कभी भी भूकंप आ सकता है़, जिसका परिणाम भयावह हो सकता है़ इसका प्रत्यक्ष उदाहरण 1934 में हुए भूकंप की घटना है, जिसका केंद्र बिंदु चंपारण और इससे सटा नेपाल का कुछ भाग रहा़
आनेवाले दिनों में भी 1934 में हुए अनहोनी जैसी घटनाएं फि से यहां दुहराये जाने के कयास लगाये जा रहे है़ भूगोल शास्त्र के जानकार उमेश वर्मा ने 2017 में भूकंप होने की आशंका जतायी है़ बताया है कि होनेवाला भूकंप का केंद्र बिंदु नेपाल व उससे सटा बिहार का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र हो सकता है़ लेकिन इसके बाद भी यह जानकार भी लोग संवेदनशील बने हुए है़
शहरवासी नहीं हैं संजीदा
भूकंप जैसे आपदा को लेकर शहरवासी भी संजीदा नहीं है़ नप क्षेत्र में बन रहे भवनों के निर्माण में नियमों की अनदेखी हो रही है़ आलम यह है कि भूकंप रोधी मकान की कौन कहे, यहां तो नगर आवास एवं विकास विभाग के विल्डिंग बायलॉज का भी सही से पालन नहीं हो रहा है़ नहीं तो नियम के मुताबिक नक्सा पास ही रहे और भवनों के निर्माण, यहां तक की अपनी सुरक्षा का भी लोगों को ख्याल नहीं है़ आखिर सब जानकार भी अनजान बने शहरवासी खुद की सुरक्षा पर भी ध्यान नहीं दे रहे है़
जागरूकता भी बेसअर
भूकंप के लिए चंपारण की अतिसंवेदनशीलता को देखते हुए शहरवासियों से भूकंप रोधी भवन निर्माण के लिए नप प्रशासन द्वारा किया गया प्रयास भी बेअसर साबित हुआ है़ वर्ष 2012 से शहर के टाउन हॉल में नप प्रशासन की पहल पर सेमिनार का आयोजन हुआ, जिसमें शहरवासियों को भवन निर्माण से संबंधित तमाम तरह की तकनीकी जानकारी दी गयी़ लेकिन सेमिनार के बाद लोगों में भूकंप रोधी मकान बनाने को लेकर उत्साह नहीं दिखा़ आज भी शहर एक प्रतिशत भी मकान भूकंप रोधी मकान नहीं बन रहे है़
कहते हैं मुख्य पार्षद
नप सभापति प्रकाश अस्थाना ने बताया कि आपदा प्रबंधन एवं नगर आवास विभाग द्वारा लोगों से भूकंप रोधी मकान बनाने के लिए आग्रह किया जाता रहा है़ लोगों में जागरूकता के लिए सेमिनार का भी आयोजन किया गया था़ कहा कि भूकंप रोधी मकान बनाने में समान्य से दस से पन्द्रह प्रतिशत अधिक खर्च लगता है़ सुरक्षा को लेकर लोगों को भूकंप रोधी मकान बनाना चाहिए़
डीएम लेते रहे जानकारी
मोतिहारी. जिले में शनिवार को आयी भूकंप ने सभी पदाधिकारियों को अलर्ट कर दिया है़ जहां दिन भर डीएम का दफ्तर विकास भवन के सामने का खुला रहा, जहां से डीएम मोबाइल से जिले में भूकंप से प्रभावित क्षति का आकलन एम-2 पदाधिकारियों से ले रहे थ़े पूरे दिन अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते रह़े वहीं डीडीसी अनिल कुमार चौधरी, डीपीआरओ मधुसूदन प्रसाद, सदर एसडीओ ज्ञानेंद्र कुमार, सामाजिक सुरक्षा के डॉ विवेक सिंह सहित लगभग सभी वरीय उपसमाहर्ता भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करते रह़े
पीडितों के साथ है केंद
मोतिहारी. केंद्र सरकार भूकंप पीड़ितों के साथ है़ उन्हें हरसंभव सहायता दी जायेगी़ इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बताया कि आपदा से मरनेवालों को पहले 1.5 लाख रुपये दिये जाते थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बढ़ा कर चार लाख रुपये कर दिये हैं.
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