धरातल पर नहीं उतर सकी उड़द व तिल बीज योजना
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Jul 2017 4:17 AM
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खेल. विभागीय कार्यशैली पर उठ रहे सवाल मोतिहारी : जिले में उरद एवं तिल बीज विस्तार योजना फ्लॉप है. सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना सिस्टम के दोष की भेट चढ़ गयी है. बीज वितरण में मेल के खेल ने इस योजना का बंटाधार कर दिया है. योजना में वास्तविक किसानों की हकमारी हुई है. प्रखंडों […]
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खेल. विभागीय कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
मोतिहारी : जिले में उरद एवं तिल बीज विस्तार योजना फ्लॉप है. सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना सिस्टम के दोष की भेट चढ़ गयी है. बीज वितरण में मेल के खेल ने इस योजना का बंटाधार कर दिया है. योजना में वास्तविक किसानों की हकमारी हुई है. प्रखंडों में बीज वितरण खास लोगों के बीच किया गया है. नतीजतन विभागीय कार्य लापरवाही एवं मनमानी के कारण योजना धरातल पर नहीं उतर पायी है. खेती के लिए उपलब्ध बीज का एक छटाक भी खेतों में नहीं लगी है. योजना के लाभुकों ने बीज को मुंह का निवाला बना डाला है. जानकारी के मुताबिक उरद एवं तिल बीज का वितरण अधिकांश प्रखंडों में खास लोगों के बीच किया गया है. आरोप तो यह भी है कि बीएओ एवं को-ऑडिनेटर ने अपने चहेतों को बीज उपलब्ध करायें हैं.
कुछ प्रखंडों में प्रभावशाली एवं मुखर लोगों को खुश करने के लिए बीज दी गयी. ताकि अन्य योजनाओं की गड़बड़ी पर उनकी मुंह बंद रहे. ऐसे में सरकारी स्तर पर बीज योजना का उद्देश्य का पूरा नहीं होना घोटाला से कम नहीं है. प्रखंडों में अधिकांश लोगों को बीज यह जानते हुए उपलब्ध कराये गये कि वह बीज का सही उपयोग नहीं करेंगे. फिर भी कृषि कर्मियों ने हितैषी जताने के लिए बंदरबाट कर दिया.
प्रखंडों को उपलब्ध मिनी कीट तिल बीज : नेशनल मिशन ऑन ऑयल सीड एंड ऑयल पाम योजना के तहत जिला को उत्तम गुणवत्ता के 50 किलो तिल बीज मिनी कीट का आवंटन प्राप्त हुआ. मिनी कीट 23 प्रखंडों को दो किलो एवं चार प्रखंड को एक किलो आवंटित की गयी. प्रत्येक प्रखंड में दो किसान को एक-एक किलो बीज का मिनी कीट खेती के लिए देना था, वही चार प्रखंडों में दो-दो किसानों के बीच आधा किलो की दर से बीज उपलब्ध कराने की कार्य योजना है.
खास लोगों को दिया जा रहा लाभ
बीएओ व को-ऑडिनेटर पर लग रहा आरोप
योजनाओं का उद्देश्य
नहीं हो रहा पूरा
कृषि योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायत केवल उरद एवं तिल बीज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कृषि के अधिकांश योजनाओं का ऐसा ही हाल है. यही कारण है कि सरकार की महत्वाकांक्षी बीज बैंक योजना का अबतक जिले में विकास नहीं हो सका है. विभागीय स्तर पर संचालित बीज विकास की योजनाएं कृषि कर्मियों की मनमानी रवैया की भेंट चढ़ रही है. लिहाजा लाखों खर्च के बाद भी योजनाओं का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा.
जन-शिकायत के इंतजार में अधिकारी
जिला कृषि पदाधिकारी डॉ ओंकारनाथ सिंह ने कहा कि उरद व तिल बीज का वितरण किसानों के बीच कर दी गयी है. प्रखंडों से संबंधित योजना के लाभुक
किसानों की सूची जिला को प्राप्त है. लेकिन बीज खेतों में लगाये गये या नहीं इसकी पूरी जानकारी अभी आयी है. ऐसे में अगर कोई शिकायत करता है, तो मामले की जांच करायी जायेगी.
पूसा वेराइटी का 51 क्विंटल था उड़द बीज
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत जिला को 51 क्विंटल उरद बीज का आवंटन प्राप्त हुआ था. ब्लैक ग्राम पुसा-31 वेराइटी की गुणवत्तापूर्ण बीज की आपूर्ति विभागीय स्तर पर की गयी थी. उरद बीज तकरीबन प्रखंडों को डेढ़ से दो क्विंटल के दर से आवंटित हुआ. किसानों के बीच वितरण चार किलो की दर से करने की योजना है.
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