मझरिया में पसरा है मातम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Mar 2015 12:49 AM (IST)
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बक्सर : जिला मुख्यालय से नौ किलोमीटर की दूरी मझरिया गांव है. इसी गांव के तीन लोगों को बुधवार की शाम गोलंबर पर बेलगाम ट्रक ने कुचल कर मौत की नींद सुला दी. इस घटना के बाद गांव में पूरी तरह मातम है. हर किसी के आंखों में मृतकों व उनके परिजनों के लिए आंसू […]
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बक्सर : जिला मुख्यालय से नौ किलोमीटर की दूरी मझरिया गांव है. इसी गांव के तीन लोगों को बुधवार की शाम गोलंबर पर बेलगाम ट्रक ने कुचल कर मौत की नींद सुला दी. इस घटना के बाद गांव में पूरी तरह मातम है. हर किसी के आंखों में मृतकों व उनके परिजनों के लिए आंसू बह रहे थे.
गुरुवार की सुबह मृतकों के घरों पर ग्रामीणों की भीड़ थी. दिन चढ़ने के साथ ही सड़कें वीरान हो गयी थीं. गांव की महिलाओं और पुरुषों की जुबान पर घटना को लेकर अफसोस के शब्द थे. एक साथ गांव से तीन लाशें निकलने से हर कोई मर्माहत था. कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले.
हर तरफ चीख-पुकार
मझरिया गांव के मृतक जितेंद्र सिंह उर्फ छोटक सिंह के दो लड़के और दो लड़की हैं. घटना की खबर सुनते ही बेटे और बेटियों की स्थिति खराब हो गयी. घर के अन्य परिजनों के साथ इनका भी रोते-रोते बुरा हाल था. सबसे बड़ा 12 वर्षीय पुत्र प्रशांत सिंह दहाड़ मार कर रो रहा था. अभी चार वर्ष पूर्व भोजपुर के ढकाइच के समीप प्रशांत की मां का देहांत सड़क दुर्घटना में हो गयी थी.
मां की मौत के बाद प्रशांत और उसके भाई एवं बहनों के सिर पर केवल बाप का साया था, लेकिन काल ने बुधवार को इनसे बाप का भी साया भी छिन लिया. अब इस घर में इन बच्चों की देख रेख करनेवाली इनकी दादी और चाचा हैं. गांव के ही संजय कुमार उपाध्याय, धर्मेद्र सिंह एवं छोटक सिंह एक साथ जिले में चल रही सिवरेज का काम करते थे. एक साथ तीन लोगों की मौत के गम में पूरा गांव डूबा हुआ है.
गम में डूबा गांव : इस घटना का एक छींटा जासो पंचायत के सारीमपुर गांव में भी पड़ा. यहां का भी एक लाल मौत की नींद सो गया. मुतरुजा खान का बड़ा बेटा रिजवान खान बक्सर में ट्रैक्टर मेकैनिक का काम करता था. बुधवार की शाम वह घर से पैसा खुदरा कराने के लिए गांव से निकल कर गोलंबर पर आया था. खुदरा करा कर वह वापस लौट रहा था.
गोलंबर पर अपने दोस्तों से गपशप करने के बाद अब वह गांव की ओर मुड़ने ही वाला था, तभी अचानक लोगों को रौंदते हुए ट्रक ने उसे भी मौत की नींद सुला दी. धर, घर पर रिजवान का इंतजार कर रहे परिजनों को जब इस घटना की जानकारी मिली, तो पैर तले जमीन खिसक गयी और घर में चीख पुकार मच गयी. वहीं, इस घटना से बेखबर रिजवान का तीन वर्षीय पुत्र माजिद सबको रोते देख वह भी रो रहा था. उसे क्या पता अब उसके सिर से बाप का साया उठ चुका है.
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