एसडीओ ने तय किया 50 हजार किराया, मिल प्रबंधन खामोश

Published at :23 Feb 2015 1:58 AM (IST)
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एसडीओ ने तय किया 50 हजार किराया, मिल प्रबंधन खामोश

डुमरांव : अनुमंडल मुख्यालय में व्यवहार न्यायालय की कवायद शुरू होते ही स्थान को लेकर क्रिया-प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गयी है. बिहार सरकार द्वारा हरियाणा पशु प्रक्षेत्र में चयनित स्थल को छोड़ सूत मिल में ले जाने की सुगबुगाहट शुरू होते ही लोगों द्वारा चहुंओर विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं. हालांकि, एसडीओ प्रमोद […]

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डुमरांव : अनुमंडल मुख्यालय में व्यवहार न्यायालय की कवायद शुरू होते ही स्थान को लेकर क्रिया-प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गयी है. बिहार सरकार द्वारा हरियाणा पशु प्रक्षेत्र में चयनित स्थल को छोड़ सूत मिल में ले जाने की सुगबुगाहट शुरू होते ही लोगों द्वारा चहुंओर विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं. हालांकि, एसडीओ प्रमोद कुमार ने मिल प्रबंधन के भेजे गये प्रस्ताव पर व्यवहार न्यायालय के लिए 51 हजार की राशि किराये के रूप में तय की है. हालांकि, तय राशि को लेकर मिल प्रबंधन खामोश है.
मिल प्रबंधन के सूत्रों के अनुसार प्रशासन द्वारा तय राशि के प्रारूप पर वित्तीय प्रबंधन समिति अपना निर्णय करेगी. बहरहाल, जो भी हो सूत मिल में व्यवहार न्यायालय की स्थापना को लेकर अनुमंडलीय अधिवक्ता संघ द्वारा चरणबद्ध आंदोलन जारी है. इसके विरोध में वकीलों ने कलमबंद हड़ताल से लेकर धरना प्रदर्शन भी किया था. संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता शंभु शरण नवीन कहते हैं कि जब सरकारी जमीन उपलब्ध है, तो भाड़े की जमीन पर न्यायालय खोलने का औचित्य नहीं है.
रेलवे स्टेशन के समीप न्यायालय को ले जाने से अनुमंडल के लोगों सहित वकीलों के लिए आर्थिक क्षति व अधिक समय की बरबादी होगी. वहीं, मजदूर संघ के अध्यक्ष भरत मिश्र ने सूत मिल के प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन करने की रूप रेखा तय कर रहे हैं. श्री मिश्र की मानें, तो प्रबंधन मिल परिसर में न्यायालय खोलने की अनुमति देकर मजदूरों की हक पर हकमारी किया है. जबकि मजदूरों के बकाया वेतन का अब तक भुगतान नहीं किया गया है और कई मामलों को लेकर मिल प्रबंधन के खिलाफ न्यायालय में मामला लंबित है.
भूमि अधिग्रहण के खिलाफ धरना
नावानगर. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा राम प्रवेश तिवारी के नेतृत्व में आज धरना का आयोजन किया जायेगा. तिवारी ने बताया कि भूमि अधिग्रहण बिल लागू हो जाने से किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा.ऐसे ही किसान महंगाई से त्रस्त हैं, जिसके कारण अधिक बोझ बढ़ने से किसानों का जीना मुहाल हो जायेगा.
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