फट रहा धरती का सीना, पंप के भरोसे खेती

Published at :31 Jul 2013 12:35 AM (IST)
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फट रहा धरती का सीना, पंप के भरोसे खेती

बक्सर : आसमान में उमड़ते–घुमड़ते बादल पिछले एक सप्ताह से दगा दे रहे हैं. तीखी धूप और बारिश नहीं होने के कारण धरती की छाती फटने लगा है. खेतों में लगे धान के पौधे पानी के अभाव में पीले पड़ने लगे हैं. ऐसे में किसान महंगे डीजल खरीद कर फसलों में जान डालने की कोशिश […]

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बक्सर : आसमान में उमड़तेघुमड़ते बादल पिछले एक सप्ताह से दगा दे रहे हैं. तीखी धूप और बारिश नहीं होने के कारण धरती की छाती फटने लगा है. खेतों में लगे धान के पौधे पानी के अभाव में पीले पड़ने लगे हैं. ऐसे में किसान महंगे डीजल खरीद कर फसलों में जान डालने की कोशिश में लगे हुए हैं.

डीजल पंप के सहारे किसान खेतों में कदई कर धान की रोपनी में जुटे हुए हैं. महिलाएं तीखी धूप के बीच कजरी की तान के साथ धान की बुआई में लगी हुई हैं. किसानों का कहना है कि बारिश के अभाव में उनकी जमापूंजी डीजल पर खर्च हो रहा है. ऐसे में धान की खेती सिर्फ महंगी होगी, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी चरमरा जाएगी.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जिले में 61.447 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित क्षेत्र है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 199 पुराने नलकूपों में 37 नलकूप चालू स्थिति में है, जो खेती के रकबा के हिसाब से अपर्याप्त है. नलकूपों नहर में पानी नहीं आने के कारण किसान निजी नलकूपों के सहारे खेतों की सिंचाई का कार्य कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि मुख्य नहर पानी के अभाव में सूखा है.

धान की बुआई का काम अंतिम चरण में है. ऐसे में चाह कर भी किसान डीजल पंप के सहारे धान की रोपनी कर रहे हैं. आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के खेत अब भी बंजर पड़े हुए हैं. कृषि विभाग का कहना है कि धान की खेती के लिए जुलाई तक 277.2 एमएम बारिश की जरूरत थी, लेकिन अब तक मात्र 112.37 एमएम बारिश हुई है. इससे कई गांवों में धान की रोपनी तक नहीं हो पायी है. कृषि पदाधिकारी ने बताया कि डीजल अनुदान की राशि अभी नहीं आयी है. सरकारी मूल्य के अनुसार प्रति एकड़ धान की खेती की लागत तीन हजार रुपये है.

* आंदोलन करेंगे किसान

बक्सर : बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व संगठन सचिव टीएन चौबे ने कहा कि बारिश नहीं होने के कारण जिले में सूखे की स्थिति है. नहरों में पानी नहीं आने के कारण धान की रोपनी पूरी तरह ठप है. उन्होंने कहा कि अधिकारियों का रवैया नहीं बदला तो किसान आंदोलन करने को विवश होंगे.

* धान पर तना छेदक कीड़े का प्रकोप बढ़ा

बक्सर : बारिश के अभाव में बुआई के बाद धान की फसल पर कीटों का प्रकोप शुरू हो गया है. किसान रामाशंकर तिवारी ने बताया कि किसी तरह महंगा डीजल फूंक कर खेतों में बुआई की गयी. लेकिन पानी की कमी के कारण फसलों पर कीटों का प्रकोप होने से फसल नष्ट होने लगा है.

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक राम केवल कुमार ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण खेतों में तना छेदक नामक कीट का प्रकोप बढ़ गया है. यह कीट सिर्फ धान में ही लगता है. इनके प्रकोप से फसल से बाली नहीं निकल पाती है. उन्होंने इसके उपाय के रूप में खेतों को साफसफाई रखना, खरपतवार से खेतों को मुक्त रखना तथा 20-25 दिन में बिचड़ा की रोपाई करने की सलाह दी. साथ ही नीम की खली डालकर रोपाई करें.

* नहरों में पानी नहीं आने से रोपनी बाधित

डुमरांव : धान का कटोरा कहे जाने वाला डुमरांव अनुमंडल में खेती पर सूखे की मार के कारण किसानों को परेशानी ङोलनी पड़ सकती है. बारिश नहीं होने से नहरों में अब तक पानी नहीं आया. इससे इलाके के खेतों में धान की रोपनी बाधित हो रही है. अनुमंडल के किसान जैसेतैसे रोपनी बिचड़ा बचाने के लिए दिनरात डीजल जला कर धान की खेती कर रहे हैं. दिन भर आकाश में छाये बादलों को नहीं बरसते देख किसान चिंतित हैं.

इधर एक सप्ताह से आकाश में बादल छा जा रहे हैं, लेकिन बारिश नहीं हो रही है. इससे किसानों को खेती से विमुख होने पर विवश होना पड़ रहा है. बारिश के अभाव में धान की खेती सूखी पड़ गयी है.

अनुमंडल के डुमरांव रजवाहा भोजपुर रजवाहा के नहरों में पानी नहीं आने से रोपनी का कार्य संभव प्रतीत नहीं हो रहा है. इस संबंध में चौगाई के किसान प्रदुमन सिंह का कहना है कि किसी तरह ट्यूबवेल के सहारे कुछ खेतों में पटवन करा रोपनी का कार्य कराया गया है.

दूसरी तरफ नंदन के राजगृही सिंह, राज नारायण पाठक, कामता यादव, रमेश सिंह, अरियांव जयेश राज उर्फ दीनू सिंह, लाल साहेब, हरेंद्र सिंह ने बताया कि पानी का जल स्तर नीचे चले जाने से पानी इकट्ठा करना संभव नहीं है. अब आकाश से घिरे बादलों से बारिश होने की आस किसानों ने छोड़ दी है. वहीं किसानों का कहना है कि सरकार बक्सर जिला को भी सूखाग्रस्त घोषित कर दे.

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