कूड़े में आग लगाकर प्रदूषण फैला रहा नगर पर्षद
नाक पर रूमाल रख गुजरते हैं शहरवासी
बक्सर : बक्सर नगर पर्षद में सफाई कार्य करने की एजेंसी बदल दी गयी है, लेकिन काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं हुआ है. शहर से प्रतिदिन 30 टन कूड़ा-कचरा निकलता है, जिसके निस्तारण की व्यवस्था नगर पर्षद के पास नहीं है.
निकले कूड़े-कचरे के ढेर को बाइपास और गंगा किनारे डंप कर दिया जाता है. साफ-सफाई के अभाव में जगह-जगह कूड़े-कचरे का अंबार लगा हुआ है. कूड़े-कचरे के अंबार में आग लगा दी जाती है, जिससे प्रदूषण फैलता है. रास्ते से गुजरने वाले लोग नाक पर रूमाल रखकर आते-जाते हैं. नगर पर्षद समय-समय पर सफाई कार्यों को लेकर एनजीओ और नयी एजेंसी को कार्य सौंपता है. इसके बावजूद शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर नहीं होती है.
प्रतिदिन निकलता है 30 टन कूड़ा : नप सूत्रों के अनुसार शहर में प्रतिदिन करीब 30 टन कूड़ा निकलता है, जिसका कोई डंपिंग जोन नहीं है. नगर पर्षद भी इस पर कोई अमल नहीं कर रहा है. गत दिनों बोर्ड में निर्णय लिया गया था कि कूड़ा-कचरा शहर के बाहर मौजूदा नप की खाली जमीन में रखा जायेगा और आधुनिक तरीके से निस्तारित होगा.
इधर, नप के सफाई कर्मचारी जहां-तहां फेंके गये कूड़े के ढेर में आग जलाकर उसकी मात्रा कम करते हैं फिर उसे गाड़ियों में भर ठिकाने लगा रहे हैं. नगर पर्षद के कचरा निस्तारण के इस तरीके से शहर में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है.
आसपास के लोग सबसे ज्यादा हैं पीड़ित : जिस जगह पर कचरे का निस्तारण किया जाता है और कचरे के ढेर में आग लगाने से पूरे इलाके में प्रदूषण की मात्रा इतनी अधिक हो जाती है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है. नप ने प्रदूषण मापने की यहां कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यह पता नहीं चल पाता है कि शहर में प्रदूषण की मात्रा कितनी है.नगर पर्षद के एक अधिकारी ने बताया कि कूड़े में आग जला देने की वजह से उसकी मात्रा करीब 40 कम हो जाती है.