सीएचसी में नहीं हैं महिला डॉक्टर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Jun 2017 8:32 AM (IST)
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मरीजों की विभिन्न तरह की जांच की अस्पताल में नहीं है व्यवस्था चरपोखरी : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है. वेतन के रूप में मोटी रकम लेनेवाले चिकित्सक मरीजों की सुविधा का परवाह किये बगैर अक्सर अस्पताल से गायब रहते हैं. इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है. […]
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मरीजों की विभिन्न तरह की जांच की अस्पताल में नहीं है व्यवस्था
चरपोखरी : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है. वेतन के रूप में मोटी रकम लेनेवाले चिकित्सक मरीजों की सुविधा का परवाह किये बगैर अक्सर अस्पताल से गायब रहते हैं. इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है. मजबूरी में मरीजों को आरा सहित अन्य जगहों पर इलाज के लिए जाना पड़ता है. जो गरीब मरीजों पर काफी भारी पड़ता है. सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की घोषणा चिकित्सकों की लापरवाही के कारण घोषणा बन कर रह गयी है. इसका लाभ धरातल पर मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. पूरे प्रखंड के मरीजों की आशा का केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही है. पर स्वास्थ्य केंद्र की कुव्यवस्था से मरीजों की आशा पर पानी फिर रहा है. 11 पंचायतोंवाले प्रखंड के विभिन्न गांवों से मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं, पर अस्पताल की व्यवस्था से उन्हें काफी परेशानी होती है. सफाई के नाम पर महज कागजी खानापूर्ति ही की जाती है.
धरातल पर अस्पताल में हर जगह गंदगी पसरा रहता है, जो मरीजों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालता है. वहीं इससे संक्रमण होने का भी भय बना रहता है. अस्पताल प्रबंधन की मनमानी और जन प्रतिनिधियों की उदासीनता की वजह से अस्पताल के इनडोर और आउटडोर कक्ष में कोई फर्क नहीं रह गया है. मरीजों के विभिन्न तरह की जांच की व्यवस्था अस्पताल में नहीं है. वहीं दवा वितरण में भी काफी परेशानी की स्थिति बनी रहती है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को इसके लिए मशक्कत करनी पड़ती है. वहीं सतरंगी चादर योजना का लाभ भी मरीजों को नहीं मिल पाता है. वैसे मरीज खुशनसीब होते हैं, जब कोई बड़ा अधिकारी अस्पताल का निरीक्षण करने आता है. उस स्थिति में मरीजों को चादर दे दी जाती है अन्यथा मरीजों को चादर नसीब नहीं हो पाती है. इतना ही नहीं अस्पताल का भवन भी काफी जर्जर है.
वहीं स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर चिकित्सक तक को रहने के लिए बने आवास की स्थिति भी काफी दयनीय है. अस्पताल द्वारा मरीजों की संख्या में भी काफी फेर-बदल की जाती है. इंडोर मरीज अधिकतर दिनों में असुविधा के कारण अस्पताल में नहीं रहते हैं, पर प्रबंधन द्वारा पंजी में प्रतिदिन पांच-आठ मरीज रहने का आंकड़ा दिखाया जाता है. ओपीडी में दिखाने के लिए प्रतिदिन आनेवाले मरीजों की संख्या 120-150 के आसपास है. ओपीडी की परची में लिखी दवा में से काफी कम दवाएं ही मिल पाती हैं. महिला चिकित्सक के नाम पर एन लकड़ा की तैनाती की गयी थी लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिनियुक्ति आरा में करा ली है.
टेक्नीशियन नहीं होने से जांच की सुविधा नदारद
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे और जांच के लिए उपकरण उपलब्ध हैं, पर टेक्नीशियन नहीं होने के कारण जांच व एक्सरे नहीं हो पाता है. विवश होकर मरीज इसके लिए आरा अथवा पीरो जाते हैं. इसमें मरीजों को एक तरफ परेशानी होती है, तो दूसरी तरफ आर्थिक क्षति भी होती है. जबकि सरकार सुविधाओं के प्रचार को लेकर करोड़ों रुपये खर्च करती है.पर कर्मियों की बहाली के बगैर प्रचारित
इमरजेंसी सेवा नहीं है चालू, मरीज परेशान
अस्पताल में इमरजेंसी सेवा चालू नहीं है. इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है. सरकार ने लोगों के नजदीक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास तो किया है, पर पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है. इमरजेंसी की स्थिति में अस्पताल में सुविधा नहीं होने पर मरीजों को आरा सहित दूसरे बड़े शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ता है़
मानक के अनुरूप नहीं है अस्पताल भवन
अस्पताल का भवन मानक के अनुरूप नहीं है. इसमें कई तरह की खामियां हैं. कुछ वर्ष पहले बने अस्पताल का फर्श कई जगह टूट गया है. वहीं दीवारों में भी प्लास्टर गिरने लगे हैं. अस्पताल की छत की स्थिति भी काफी दयनीय है. इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है तथा स्वास्थ्य लाभ में इसका विपरीत मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है.
अस्पताल में दवाओं की है काफी कमी
अस्पताल में दवाओं की काफी कमी रहती है. इससे मरीजों को काउंटर से दवाएं नहीं मिल पाती हैं. मजबूरी में बाजार से महंगी दर पर दवाएं खरीदनी पड़ती हैं. जो मरीजों के लिए खासकर गरीब मरीजों के लिए काफी कष्टदायक होता है. सरकार की घोषणाओं के अनुरूप उन्हें नि:शुल्क दवाएं नहीं मिल पाती हैं.
नौ की जगह कार्यरत हैं महज छह चिकित्सक
अस्पताल में नौ चिकित्सकों का पद सृजित है, पर प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण महज छह चिकित्सक ही कार्यरत हैं. इससे अस्पताल में मरीजों को देखने के काम में काफी बाधा आती है. वहीं मरीज चिकित्सकों के अभाव में बाहर जाकर निजी क्लिनिकों में चिकित्सा के लिए मजबूर हो जाते हैं.
अस्पताल में उपलब्ध हैं मात्र छह बेड
सामुदायिक चिकित्सा केंद्र में छह बेडवाला अस्पताल है. अस्पताल में सभी छह बेड उपलब्ध है, पर बेड की स्थिति काफी दयनीय है. मरीजों को इस पर काफी कठिनाई होती है. पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा इसकी मरम्मत नहीं करायी जा रही है. यह प्रबंधन का मरीजों के प्रति उदासीनता का परिचायक है.
महीने में औसतन 25 हजार आते हैं मरीज
अस्पताल में प्रतिमाह औसतन 25 हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं. इससे अस्पताल में काफी भीड़-भाड़ रहती है. मरीजों को स्तरीय सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता है. वहीं सुविधा के अभाव में कई बार मरीजों की संख्या घट जाती है. सुविधाओं का लाभ मरीजों को कैसे मिलेगा. इसका उत्तर सरकार ही दे सकती है.
दवा वितरण के लिए बना है काउंटर, नहीं है दवा
अस्पताल में दवा वितरण के लिए काउंटर बनाया गया है. पर अधिकतर दवाओं के नहीं रहने के कारण काउंटर पर मरीजों की भीड़ नहीं लग पाती है. दवा वितरण के लिए नियुक्त कर्मी ही कई बार काउंटर पर गायब रहते हैं. अस्पताल में दवाओं की घोर कमी है़ इससे कई दवा बाहर से लेनी पड़ती है़
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