कमिश्नर ने किया एनएच 80 का दौरा रानी तालाब के पास मिला गड्ढा

Updated at : 24 Aug 2018 7:35 AM (IST)
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कमिश्नर ने किया एनएच 80 का दौरा रानी तालाब के पास मिला गड्ढा

भागलपुर : प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने गुरुवार को एनएच 80 की हालत का जायजा लिया. इस दौरान जीरोमाइल से सबौर तक का निरीक्षण किया और एनएच अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये. निरीक्षण के क्रम में रानी तालाब के पास सड़क पर गड्ढे नजर आये. वहीं सबौर के आगे दो किमी तक सड़क की […]

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भागलपुर : प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने गुरुवार को एनएच 80 की हालत का जायजा लिया. इस दौरान जीरोमाइल से सबौर तक का निरीक्षण किया और एनएच अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये. निरीक्षण के क्रम में रानी तालाब के पास सड़क पर गड्ढे नजर आये. वहीं सबौर के आगे दो किमी तक सड़क की जर्जर हालत पहले जैसी दिखाई दी. कमिश्नर ने एनएच अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क को मोटरेबल बनाया जाये, जिससे वाहन चालकों को आने-जाने की परेशानी से राहत मिल सके. एनएच अधिकारियों ने बताया कि मोटरेबल के अलावा पूरी तरह सड़क मरम्मत का काम बारिश के बाद होगा.
बरसात में नहीं होगा अलकतरा का काम सितंबर तक कैसे बनेगी सड़क
बरसात में जेल रोड का निर्माण अलकतरा से कराने की कोशिश की गयी और इसमें वह नाकामयाब रहे. दरअसल, अलकतरा की सड़क आठ-10 दिन भी नहीं टिकी. ठेकेदार का कहना है कि अब बरसात के बाद अलकतरा की सड़क बनेगी. सड़क बनाने के लिए उन्हें तीन माह का समय मिला है और यह जो समय मिला है, वह बरसात का है. अलकतरा की सड़क बनती नहीं है.
अभी तक जो हुआ
25 जून से ठेकेदार ने जेल रोड से शुरू किया काम
10 दिन में फेल कर गयी सड़क
एक अगस्त से सात दिनों तक मिला ट्रैफिक ब्लॉक
सातवें दिन जीरोमाइल से रानी तालाब और रानी तालाब से इंजीनियरिंग कॉलेज के बीच कराया माेटरेबुल
कमिश्नर से पकड़ी गड़बड़ी तो इंजीनियरिंग कॉलेज से सबौर के बीच नवनिर्मित सड़क को उखाड़ कर कराया मोटरेबुल
10 अगस्त से बंद है जीरोमाइल से इंजीनियरिंग कॉलेज और सबौर रोड का काम
अब यह है रास्ता
विभाग रखे ठेकेदार पर निगरानी
सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौते का खेल न खेले, इसके लिए विभाग उनपर निगरानी रखे. तभी मजबूत सड़क बनेगी. वर्ना बनकर भी यह ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकेगी. इसका ताजा उदाहरण जेल रोड है.
काम की मॉनीटरिंग के बने निष्पक्ष कमेटी
सड़क का निर्माण कार्य की मॉनीटरिंग विभागीय इंजीनियर से करायी जाती है. विभागीय इंजीनियर से न करा निष्पक्ष कमेटी गठित कर मॉनीटरिंग करायी जाये. इसमें रिटायर इंजीनियर आदि को शामिल करें. इससे काम में गड़बड़ी की उम्मीद नहीं रहेगी.
सड़क निर्माण की लगातार हो जांच
सड़क का निर्माण कार्य के दौरान मेटेरियल की समय-समय पर जांच लेबोरेटरी में कराने का प्रोविजन है. मगर, विभागीय स्तर पर अनदेखी की जाती है. मेटेरियल से लेकर सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच करायी जाये. इसमें सिविल सोसाइटी को भी निगरानी की हो जवाबदेही. तभी अच्छी सड़क बन सकती है.
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