भागलपुर मामला : अर्जित की अग्रिम जमानत खारिज, पुलिस ने कोर्ट में दी इश्तहारी व कुर्की की अर्जी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Mar 2018 6:19 PM

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भागलपुर : चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश कुमुद रंजन सिंह की कोर्ट ने भाजपा नेता अर्जित शाश्वत की अग्रिम जमानत अर्जी को शनिवार को खारिज कर दिया. मामले में पुलिस की केस डायरी आयी और उस पर सुनवाई हुई. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे की तरफ से अधिवक्ता वीरेश मिश्रा […]

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भागलपुर : चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश कुमुद रंजन सिंह की कोर्ट ने भाजपा नेता अर्जित शाश्वत की अग्रिम जमानत अर्जी को शनिवार को खारिज कर दिया. मामले में पुलिस की केस डायरी आयी और उस पर सुनवाई हुई. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे की तरफ से अधिवक्ता वीरेश मिश्रा ने भाग लिया था. भाजपा नेता अभय कुमार घोष उर्फ सोनू समेत आठ आरोपित प्रमोद कुमार वर्मा, संजय भट्ट, देव कुमार पांडेय, सुरेंद्र पाठक, निरंजन सिंह, प्रणव साह व अनूप लाल साह की अग्रिम जमानत अर्जी पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. इन भाजपा नेताओं की तरफ से अधिवक्ता कामेश्वर पांडे ने बहस में भाग लिया.

सरकार की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध लोक अभियोजक सत्यनारायण प्रसाद ने किया. नाथनगर थाना क्षेत्र में 17 मार्च को हुए हंगामे को लेकर उक्त भाजपा नेता आरोपित हैं. इधर, प्रथम एसीजेएम की कोर्ट में नाथनगर थाना प्रभारी जनीफुद्दीन ने भाजपा नेता अर्जित शाश्वत समेत सभी आरोपित के खिलाफ इश्तहारी व कुर्की की अर्जी दाखिल की है. इस पर कोर्ट ने अभी कोई निर्देश जारी नहीं किया है.

बहस के दौरान उठाये गये बिंदु:
अधिवक्ता वीरेश मिश्रा
फोटो पर : जुलूस के फोटो में अल्पसंख्यक भी शामिल हैं. राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है. कोई भी हथियार से लैस नहीं है.
जुलूस निकालने पर : एक बार अर्जित शाश्वत, दूसरी बार आयोजक अभय कुमार घोष उर्फ सोनू ने जुलूस निकालने का आवेदन किया. पुलिस की पार्टी ने एस्कॉर्ट किया. वैद्यनाथ मिश्र ने केस डायरी में कहा कि किसी तरह से जुलूस को निकाल लिया गया.
केस डायरी में गवाही : घटना को लेकर अल्पसंख्यक की तरफ से कोई गवाह नहीं हैं. केस डायरी सच्चाई से परे है.

कामेश्वर पांडे
आयोजक पर : नव वर्ष जुलूस के आयोजक अभय कुमार घोष उर्फ सोनू शांति समिति के सदस्य भी हैं और घटना में उनका कोई रोल नहीं है. विपक्षी के हल्ला व मामला सुर्खियों में आने पर प्राथमिकी हुई है. पुलिस ने केस डायरी में सभी की गवाही करवायी है.
जुलूस का नारा सामान्य : जुलूस में जय श्री राम का नारा सामान्य है. यह हिंदुस्तान में नहीं बोलेंगे तो क्या दुबई में. यहां पर रामनवमी का झंडा अल्पसंख्यक बनाते हैं. जिन्होंने 89 का दंगा देख लिया, वे कभी भी इस तरह की घटना नहीं चाहते. पर्व के दिन जय श्रीराम बोलने से घटना नहीं हुई. कोई पत्थरबाजी जुलूस के गुजरने के दौरान नहीं हुई.
लोक अभियोजक सत्यनारायण साह
गाना पर बवाल: जुलूस के गाने में दूसरे धर्म को आघात पहुंचा. यह गाना आयोजक ने डीजे वाले को चिप से दिया था. हंगामा के बाद चिप को वापस ले लिया गया.
जुलूस को अनुमति नहीं: जुलूस निकालने का आवेदन दिया था, उसकी कोई अनुमति नहीं मिली थी. डीजे को भी अनुमति नहीं मिली थी. यह डीजे वाला भी पूछताछ में बोला है. आवाज को कम करने के लिए कहा तो वे नहीं मान रहे थे.
अर्जित का मोबाइल लोकेशन: घटना के दौरान भाजपा नेता अर्जित शाश्वत अपनी पत्नी के नाम से जारी सिम ले गये थे. यह सिम घटना वाले क्षेत्र में 3.29 बजे से चार बजे तक वहां था. उनकी मौजूदगी में धार्मिक नारा लगा और घटना हुई. वहां की घटना को व्हाट्सएप के माध्यम से फैलाया गया, जिससे अन्य जगहों पर तनाव बढ़ा.

पुलिस को चैलेंज : भाजपा नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद वे पटना के रामनवमी जुलूस में मौजूद थे. एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि एफआइआर रद्दी का टुकड़ा है.

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