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किऊल-जमालपुर के बीच चलेंगी विद्युत ट्रेनें, रेल विभाग कार्य को लेकर कर रहा युद्धस्तर पर तैयारी, विद्युतीकरण का कार्य जोरों पर

Updated at : 20 Oct 2018 1:52 AM (IST)
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किऊल-जमालपुर के बीच चलेंगी विद्युत ट्रेनें, रेल विभाग कार्य को लेकर कर रहा युद्धस्तर पर तैयारी, विद्युतीकरण का कार्य जोरों पर

सुनील कुमार, कजरा : किऊल से जमालपुर-भागलपुर होते हुए बोगीडंगा रेलवे केबीन तक लूप लाइन का भी जल्द विद्युतिकरण होगा़ इसके लिए रेल विभाग की ओर से किऊल से कार्य शुरू कर प्रथम फेज में किऊल-जमालपुर तक रेल लाइन का विद्युतिकरण का कार्य में युद्धस्तर पर किया जा रहा है़ रेल विभाग के अधिकारियों की […]

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सुनील कुमार, कजरा : किऊल से जमालपुर-भागलपुर होते हुए बोगीडंगा रेलवे केबीन तक लूप लाइन का भी जल्द विद्युतिकरण होगा़ इसके लिए रेल विभाग की ओर से किऊल से कार्य शुरू कर प्रथम फेज में किऊल-जमालपुर तक रेल लाइन का विद्युतिकरण का कार्य में युद्धस्तर पर किया जा रहा है़ रेल विभाग के अधिकारियों की मानें तो मार्च 2019 में किऊल व जमालपुर के बीच ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजन के सहारे दौड़ने लगेगी़
किऊल आउटर सिंगनल से बोगीडांगा लिंक केबिन तक होगा विद्युतिकरण मालदा डिवीजन के अंतर्गत पड़ने वाले किऊल आउटर सिंग्नल से बोगीडांगा लिंक केबिन तक लगभग लगभग 240 किमी लंबी रेल लाइन के विद्युतिकरण का कार्य होना है. रेलवे इलेक्ट्रीफिकेशन कंपनी की ओर से किऊल की ओर से कार्य प्रारंभ कर बिजली के खंभे गाड़े जा चुके है तथा प्रथम फेज में जमालपुर तक लगभग 45 किलोमीटर के इस रेल मार्ग का विद्युतिकरण किया जाना है.
रेल सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व ही विशेष पैकेज के तहत रेल विद्युतिकरण की बात कही थी. किऊल-भागलपुर रेलवे विद्युतिकरण का कार्य के लिए प्रधानमंत्री की ओर से विशेष पैकेज दिया गया है जिससे यह कार्य को पूरा किया जा सके. इसके लिए पर्याप्त धन राशि भी उपलब्ध करा दी गयी है.
बिहार का पहला रेल लाइन रहने के बावजूद सबसे पिछड़ा रेलमार्ग रहा है किऊल साहेबगंज रेल मार्ग . किऊल-भागलपुर-साहेबगंज देश के सबसे पूराने रेल मार्गों में से एक है. इसके बावजूद यह रेल मार्ग हमेशा से पिछड़ा ही रहा है़ फरवरी 1862 में बनाये गये इस रेल मार्ग के जमालपुर में अवस्थित रेल कारखाना को किसी समय में देश ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा रेल इंजन कारखाना होने का गौरव प्राप्त होने के बावजूद यह मार्ग देश की आजादी के बाद से ही उपेक्षा का शिकार होता रहा है़
इसके बाद बनने वाली रेल लाइन का अन्य रेलमार्ग की तरह इस मार्ग का विकास नहीं हो पाया है. इस मार्ग में कई जगहों पर अब भी रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य किया जाना बाकी है. हालांकि रेल विभाग के अनुसार बाकी बचे रेल लाइन का दोहरीकरण किये जाने की दिशा में भी कार्य जारी है़ इसके अलावा यह मार्ग विद्युतिकरण किये जाने से वंचित रहा है़ अब इस मार्ग के विद्युतिकरण किये जाने से लोगों में इस मार्ग के विकास होने की उम्मीद जगी है़ रेल लाइन के विद्युतिकरण हो जाने से रेल सफर में लोगों को कम समय लगेगा.
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