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निर्भया केस : बिहार के औरंगाबाद जिला निवासी अक्षय ठाकुर को भी होगी फांसी, गांव को किया शर्मसार

Updated at : 05 May 2017 4:51 PM (IST)
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निर्भया केस : बिहार के औरंगाबाद जिला निवासी अक्षय ठाकुर को भी होगी फांसी, गांव को किया शर्मसार

औरंगाबाद :निर्भयासामूहिकदुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है. इन चार दोषियों में से एक अक्षय ठाकुर बिहार के औरंगाबाद जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के लहंगकर्मा गांव का रहने वाला है. अक्षय ठाकुर की फांसी की सजाको लेकर गांवमें दबी जुबान से चर्चा हो रही है. […]

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औरंगाबाद :निर्भयासामूहिकदुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है. इन चार दोषियों में से एक अक्षय ठाकुर बिहार के औरंगाबाद जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के लहंगकर्मा गांव का रहने वाला है. अक्षय ठाकुर की फांसी की सजाको लेकर गांवमें दबी जुबान से चर्चा हो रही है. ग्रामीणों कामानना है कि अक्षय ठाकुर के निर्भयामामले में नाम आने से गांव की बदनामी हुई है. इस मुद्दे पर बात कर ग्रामीण अक्षय के परिवार और अपने गांव को और बदनाम नहींकरना चाहते है.

वहीं, गांव के कुछ लोगों को अक्षय के परिवार के साथ हमदर्दी भी है.उनकाकहनाहै किअक्षय ठाकुर के परिवार के किसी सदस्य का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं रहाहै. अक्षय ने उन्हें आज ऐसे दिन देखने को मजबूर कर दिया है. उसके परिवार के लोग अब अक्षय ठाकुर को अपना बताने से इनकार करते हैं.

रोजगार की तलाश में गया था दिल्ली
अक्षयठाकुर 2011 मेंपढ़ाई छोड़कर घर सेभागा और दिल्ली पैसे कमानेपहुंचा था. ज्यादापढ़ालिखा नहीं होनेके कारण उसे ठंग का काम नहीं मिला. इसी दौरानवह राम सिंह के करीब आ गया. राम सिंह ने अक्षय को बस कंडक्टर के काम में लगा दिया. राम सिंह के सहारे वह फल बेचने वाले पवन गुप्ता से भी घुल-मिल गया था. निर्भया कांड के बाद अक्षय भागकर अपने गांव आ गया था. अक्षयठाकुर को दिल्ली पुलिस ने बिहार के औरंगाबाद से गिरफ्तार कर अपने साथ लाई थी. तिहाड़ जेल में कैद अक्षय ठाकुर ने जेल में अपनी जान को खतरा बताया था. जिसके बाद इसकी सुरक्षा को और ज्यादा चाक-चौबंद कर दिया गया.

फैसले पर थी पूरेदेश की नजर
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मामले के दोषी अक्षय ठाकुरकेसाथही विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश की फांसी की सजा कायम रखी. इन चारों आरोपियों ने सजा को अदालत में चुनौती दी थी. इससे पहले, अदालत ने 27 मार्च को मामले में फैसला सुरक्षित रखा था. पूरे देश की नजर फैसले पर थी. निर्भया के माता-पिता सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद थे.

सुप्रीम कोर्ट ने घटना को बर्बरतापूर्ण करार दिया
निर्भया केस में सर्वसम्मति से तीनों जजों ने फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस को बर्बरतापूर्ण घटना करार दिया. कोर्ट ने कहा कि इस बर्बरता के लिए माफी नहीं दी जा सकती. यह गुनाह ऐसा है कि इसमें माफी की गुंजाइश ही नहीं है. कोर्ट के फैसले के बाद कोर्ट रूम में तालियां बजी. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि कठोर सजा मिलेगी तभी समाज में भरोसा पैदा होगा.

निर्भया के बलात्कारियों को होगी फांसी, सुप्रीम कोर्ट ने जब सुनाया फैसला तो बजी तालियां

16 दिसंबर, 2012 को हुई थी वारदात
16 दिसंबर, 2012 को पैरामेडिकल की पढ़ाई कर रही निर्भया अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर मुनीरका से द्वारका की ओर अपने घर की ओर जा रही थी. जब वह बस में सवार हुई तो थोड़ी देर बाद उसके साथ बस में मौजूद लोगों ने छेड़छाड़ शुरू कर दी. निर्भया के दोस्त ने छेड़छाड़ का विरोध किया, लेकिन उन सब लोगों ने उसके साथ मारपीट की और उसे इतना पीटा गया कि वह बेहोश हो गया. जिसके बादछह आरोपियों ने निर्भया के साथसामूहिकदुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया और वहशीपन की सभी हदों को पार कर दिया.

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