विषयवार शक्षिक नहीं रहने से छात्राओं की पढ़ाई बाधित

Published at :15 Dec 2015 6:51 PM (IST)
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विषयवार शक्षिक नहीं रहने से छात्राओं की पढ़ाई बाधित

विषयवार शिक्षक नहीं रहने से छात्राओं की पढ़ाई बाधितप्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय में संसाधनों की भी कमी(फोटो नंबर-7,8)कैप्शन- रानी ब्रजराज कुमारी इंटर विद्यालय देव में पढ़ाई करती छात्राएं, प्राचार्य मिथिलेश कुमार सिंह औरंगाबाद (नगर) देव प्रखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों की छात्राओं के लिए एक मात्र विद्यालय रानी ब्रजराज कुमारी प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय है. […]

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विषयवार शिक्षक नहीं रहने से छात्राओं की पढ़ाई बाधितप्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय में संसाधनों की भी कमी(फोटो नंबर-7,8)कैप्शन- रानी ब्रजराज कुमारी इंटर विद्यालय देव में पढ़ाई करती छात्राएं, प्राचार्य मिथिलेश कुमार सिंह औरंगाबाद (नगर) देव प्रखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों की छात्राओं के लिए एक मात्र विद्यालय रानी ब्रजराज कुमारी प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय है. यहां देव प्रखंड के आसपास के सभी गांवों के सैकड़ों छात्राएं पढ़ाई के लिए आती है. लेकिन इस विद्यालय में संसाधनों की कमी उन्हें काफी खलता है. मात्र सात कमरों के भरोसे लगभग डेढ हजार छात्राओं की पढ़ाई होती है, वह भी मात्र 14 शिक्षकों के बदौलत. लाइब्रेरी की स्थिति काफी खराब है. लाइब्रेरी में विषयानुसार सभी किताबें उपलब्ध नहीं है. विषय के अनुसार जहां हजारों किताबें होनी चाहिए थी वहां मात्र छह सौ किताबें लाइब्रेरी में है. इतनी कम संख्या में उपलब्ध किताबें लाइब्रेरी की शोभा बढ़ाने की बजाय छात्राओं को मुंह चिढ़ा रही है. जब छात्राएं विद्यालय से किताबें लेना चाहती है तो पता चलता है कि उस विषय की किताब ही नहीं है. इसके अलावे अन्य कई तरह की सुविधाओं का अभाव है. इस विद्यालय में नौवीं, 10वीं व इंटर की छात्राओं की पढ़ाई होती है, पर विषयवार शिक्षक नहीं रहने के कारण छात्राएं सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने के लिए विद्यालय आती है. यहां देखा जाये तो दिनों भर छात्राओं का विद्यालय में आने-जाने का लगा रहता है. विद्यालय खुलते ही छात्राएं विद्यालय तो पहुंचती हैं पर बस उपस्थिति दर्ज करवाने के बाद ही जाने का भी दौर शुरू हो जाता है. समय का कोई माने मतलब नहीं है. हालांकि, प्राचार्य द्वारा इसे रोकने का भरपूर प्रयास किया जाता है, लेकिन उन्हें सहयोग नहीं मिलने के कारण वे विवश हो जाते हैं. प्राचार्य मिथिलेश कुमार सिंह ने बताया कि इस विद्यालय में नौवीं से इंटर तक की छात्राओं की पढ़ाई होती है. नौवीं में 576, 10वीं में 515 छात्राएं हैं. लेकिन 10वीं में 490 छात्राओं ने ही रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा की है. इंटर कला में 120 व साइंस में 55 छात्राएं है. उन्होंने बताया कि यहां शिक्षकों के साथ-साथ भवनों की घोर कमी है. मात्र 14 शिक्षकों के बदौलत लगभग डेढ़ हजार छात्राओं को पठन-पाठन कराया जाता है. इसमें सभी विषय के शिक्षक भी नहीं हैं. मात्र सात कमरों में ही इन सभी छात्राओं की पढ़ाई होती है. मुश्किल तब बढ़ जाती है जब छात्राओं की परीक्षा ली जाती है. एक बार में सभी छात्राओं के लिए सीट उपलब्ध करवाना काफी कठिनाई होती है.

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