आम लोगों में सुरक्षा की चिंता

Published at :28 Oct 2015 8:01 AM (IST)
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आम लोगों में सुरक्षा की चिंता

अब शहर में भी नक्सली गतिविधियां बढ़ीं आये दिन हो रही घटनाओं से सहमें हैं लोग औरंगाबाद (ग्रामीण) : बिहार के नक्सलग्रस्त जिलो में औरंगाबाद शुमार है. यह जिला कई नक्सली घटनाओं व सामूहिक नरसंहारों का गवाह बना है. औरंगाबाद के मदनपुर, देव व नवीनगर नक्सलग्रस्त इलाकों में जाना जाता है. इसके पीछे घने जंगल […]

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अब शहर में भी नक्सली गतिविधियां बढ़ीं
आये दिन हो रही घटनाओं से सहमें हैं लोग
औरंगाबाद (ग्रामीण) : बिहार के नक्सलग्रस्त जिलो में औरंगाबाद शुमार है. यह जिला कई नक्सली घटनाओं व सामूहिक नरसंहारों का गवाह बना है. औरंगाबाद के मदनपुर, देव व नवीनगर नक्सलग्रस्त इलाकों में जाना जाता है. इसके पीछे घने जंगल व पहाड़ एक बड़ा कारण है.
पहले सिर्फ इन इलाकों को नक्सलियों के मांद के रूप में माना जाता था, लेकिन जिस तरह से औरंगाबाद शहर में नक्सली गतिविधियां बढ़ी है, उससे यह इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह शहर नक्सलियों के प्रभाव से अछूता है.
दशहरा के दूसरे दिन शहर के नागा बिगहा मुहल्ले से पकड़े गये पांच युवा नक्सलियों के बाद अब सवाल उठने लगा है कि कहीं औरंगाबाद शहर बारूद के ढेर पर तो नहीं खड़ा है. वैसे पहले भी कुछ पुख्ता प्रमाण मिले भी हैं. शहरवासियों के मन में पहले था कि हम शहर में हैं तो सुरक्षित है, लेकिन शहर से पकड़े गये नक्सलियों के बाद आम लोग भी सुरक्षा के प्रति चिंतित दिखाई पड़ने लगे हैं. नक्सलियों के डर से जिन लोगों ने गांव छोड़ शहर में अपना बसेरा बनाया, वे अब गांव व शहर की तुलना करने लगे हैं. लोगों का स्पष्ट मानना है कि शहर भी सुरक्षित नहीं है.
औरंगाबाद शहर से पहले कई नक्सली पकड़े जा चुके हैं. 26 मार्च 2012 की घटना ने नक्सलियों के मंसूबे को शहरी इलाके के प्रति स्पष्ट किया था. इस दिन शहर के ही गांधी नगर व रामाबांध में छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में हथियार व कारतूस के साथ केमिकल बरामद किये गये थे. 3600 कारतूस, साढ़े तीन लाख रुपये नकद, दो आइइडी, रॉकेट लांचर व बम बनानेवाले केमिकल पुलिस ने बरामद किये थे. इन सामान की बरामदगी तब हुई थी जब तुफान नामक नक्सली को शहर में ही एक यात्री बस से पुलिस ने गिरफ्तार किया था और उसके निशानदेही पर गांधी नगर व रामाबांध में एक साथ छापेमारी हुई थी. इसी दिन शहरवासियों के मन में एक सवाल उठा था कि शहर भी नक्सलियों के टारगेट पर है.
दशहरा के दूसरे दिन 23 अक्तूबर को नागा बिगहा मुहल्ले से जिला पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों ने विकास कुमार, शंकर कुमार, कुणाल, विमल व अरविंद नामक नक्सली समर्थकों को गिरफ्तार किया था. इस गिरफ्तारी के बाद नक्सलियों की शहर में पहुंच के पुख्ता प्रमाण दिये थे. इस कार्रवाई के दौरान एक सफेदपोश व्यक्ति का भी नाम आया था. इससे स्पष्ट होता है कि शहर में नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सफेदपोश भी कहीं न कहीं अपनी भूमिका निभा रहे हैं.
हालांकि पुलिस प्रशासन नक्सली गतिविधियों से साफ इनकार करती है. इधर पुलिस सूत्रों की मानें तो पहले की तुलना में आज शहरी इलाके धीरे-धीरे प्रभाव में आ रहे हैं और इसके पीछे नक्सलियों के मददगार कारण बन रहे हैं. समय रहते अगर इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब नक्सलियों का फरमान शहर में भी लागू हो जायेगा.
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