मरनेवालों के अटके हैं दाह संस्कार के रुपये

Updated at : 06 Jul 2018 5:43 AM (IST)
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मरनेवालों के अटके हैं दाह संस्कार के रुपये

दाउदनगर : नगर पर्षद क्षेत्र के वार्ड संख्या पांच निवासी रामावतार सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी सुमित्रा देवी, सोबराती खां के निधन के बाद उनकी पत्नी अहमदी खातून ,गंगाजली देवी के निधन के बाद उनके पुत्र ललन चौधरी ,कैलाश भगत के निधन के बाद उनके बेटे रामइकबाल भगत, अनारवा देवी के निधन के […]

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दाउदनगर : नगर पर्षद क्षेत्र के वार्ड संख्या पांच निवासी रामावतार सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी सुमित्रा देवी, सोबराती खां के निधन के बाद उनकी पत्नी अहमदी खातून ,गंगाजली देवी के निधन के बाद उनके पुत्र ललन चौधरी ,कैलाश भगत के निधन के बाद उनके बेटे रामइकबाल भगत, अनारवा देवी के निधन के बाद उनके बेटे जनार्दन चौधरी, रबिया खातून के निधन के बाद उनकी पुत्रवधु मरियम खातून, सुगेश्वरी देवी के निधन के बाद उनके पति सीताराम सिंह, राधिका देवी के निधन के बाद उनके पुत्र पिंटू कुमार, शांति देवी के निधन के बाद उनके पति लल्लू भगत, औरंगजेब खान के निधन के बाद उनके पिता वाहिद खान, पार्वती देवी के निधन के बाद उनके पुत्र अब तक कबीर अंत्येष्टि योजना की राशि की बाट जोह रहे हैं.
यह आंकड़ा वर्ष 2014 से अब तक का है. ये परिवार बीपीएल में आते हैं, लेकिन अकाउंट में पैसा नहीं रहने के कारण इन्हें कबीर अंत्येष्टि की राशि का भुगतान नहीं हो पाया है. वार्ड संख्या पांच के वार्ड पार्षद बसंत कुमार द्वारा कई बार संबंधित पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराते हुए कबीर अंत्येष्टि योजना की राशि खाते में भेजने का आग्रह किया गया है, लेकिन इसके बावजूद लाभुकों को अब तक इसकी राशि नहीं मिल पायी है.
वार्ड पार्षद ने पांच अक्तूबर 2016 को समाज कल्याण विभाग सामाजिक सुरक्षा व निशक्त निदेशालय को पत्र भेजकर कहा था कि सरकार के आदेश के बावजूद कई वार्डों में कबीर अंत्येष्टि योजना के लाभ के लिए कार्यालय में न तो आवेदन संचिकाबद्ध की जा रही है और न ही इस मद की राशि भुगतान की जा रही है.
इस संबंध में उन्होंने 14 नवंबर 2014, 28 अक्तूबर 2015 , नौ फरवरी 2016, 28 अप्रैल 2016 व 16 अगस्त 2016 को कार्यपालक पदाधिकारी को आवेदन भी दिया है. दो जनवरी 2016 को कार्यपालक पदाधिकारी ने तत्कालीन नगर पंचायत के कर्मचारियों को कबीर अंत्येष्टि योजना अंतर्गत आवेदन को संचिकाबद्ध करने व भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन वार्ड संख्या पांच के 12 आवेदकों का आवेदन वर्ष 2014 से अब तक नहीं किया गया है. यह नगर परिषद क्षेत्र के किसी एक वार्ड की समस्या नहीं है, बल्कि सभी वार्डों की यही समस्या है.
आवेदन की स्पष्ट जानकारी नहीं
राशि कम होने या आवंटन के अभाव में वर्ष 2014 से अब तक कुल कितने आवेदन लंबित पड़े हुए हैं, इसका कोई स्पष्ट ब्योरा नगर पर्षद कार्यालय के पास नहीं है. जब गुरुवार को इसका जायजा लेने का प्रयास किया गया तो जानकारी मिली कि कुछ आवेदन संबंधित वार्डों के वार्ड पार्षदों के पास हैं, लेकिन इनकी संख्या ढाई सौ के आसपास ही होगी. आश्चर्यजनक बात यह है कि संबंधित वार्डों के तहसीलदारों के पास आवेदन होने की बात तो नगर पर्षद कार्यालय से बतायी गयी, लेकिन इसका स्पष्ट व ठोस विवरण एक जगह इकट्ठा नहीं दिखा.
समाज कल्याण विभाग की अधिसूचना के आदेश के आलोक में नगर कार्यपालक पदाधिकारी ने दो जनवरी 2016 को एक आदेश निर्गत किया, जिसमें तहसीलदारों को आदेश दिया गया था कि अपने-अपने संबंधित वार्डों में बीपीएल परिवार की मृत्यु उपरांत उसके आश्रित को सरकार द्वारा प्राप्त पत्र के अनुसार कबीर अंत्येष्टि योजना की का राशि भुगतान करना सुनिश्चित करें.
साथ ही अब तक अपने-अपने वार्डों में कबीर अंत्येष्टि योजना का राशि नहीं मिल सकने वाले बीपीएल परिवार का क्रमवार सूची तैयार कर संबंधित वार्ड पार्षद से भुगतान के लिए संचिका स्वीकृति करा कर लें. कार्यपालक पदाधिकारी के उक्त आदेश निकलने के बाद ही आवेदन लिया जाना और उसे संचिकाबद्ध किया जाना शुरू हुआ.
पिछले साल नवंबर में आये थे रुपये
प्रखंड कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, नगर पर्षद में 15 नवंबर 2017 को कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत सामान्य घटक मद में दो लाख 64 हजार और विशेष घटक मत में 84 हजार रुपये भेजे गये थे. कई वार्ड पार्षदों का कहना है कि नप से संबंधित वार्डों के बैंक खाते में अभी तक राशि नहीं भेजी गयी है. वहीं सभी 27 वार्डों में नये सिरे से संयुक्त खाता खुलवाने के लिए भी कोई पहल होती नहीं दिख रही है.
मिलते हैं तीन हजार रुपये
सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के निधन पर दाह संस्कार के लिए कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत राशि देने का प्रावधान है. पहले यह राशि 1500 रुपये दी जाती थी, जिसे बाद में बढ़ा कर तीन हजार कर दिया गया. बीपीएल परिवार में किसी का निधन हो जाने पर शहरी क्षेत्र में संबंधित वार्डों के वार्ड पार्षद व तहसीलदार के माध्यम से इस योजना की राशि दिये जाने का प्रावधान है.
सूत्रों का कहना है कि यदि गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल सूची में शामिल किसी गरीब का निधन हो जाता है तो 24 घंटे के अंदर मृतक के दाह संस्कार के लिए कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत राशि दिये जाने का प्रावधान है.
शहरी क्षेत्र में नगर पर्षद कार्यालय को आवेदन देना होता है, जिसके बाद वार्ड पार्षद एवं तहसीलदार के माध्यम से इस योजना की राशि दी जाती है. सूत्रों के अनुसार पिछले करीब चार वर्षों से डिमांड के अनुसार राशि का आवंटन नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण समय पर लाभुकों को इस योजना की राशि नहीं दी जा रही है. बहुत सारे ऐसे भी लाभुक हैं, जो आवेदन देने के बाद अब तक राशि मिलने का इंतजार ही कर रहे हैं.
संयुक्त खाते में जाते हैं रुपये
मिली जानकारी के अनुसार, नगर पर्षद क्षेत्र के वार्डों में संबंधित वार्ड के वार्ड पार्षद व तहसीलदार का विशेष घटक और सामान्य घटक मद में अलग-अलग संयुक्त बैंक खाता होता है और प्रखंड कार्यालय के माध्यम से इस योजना की राशि प्राप्त होने के बाद नगर पर्षद द्वारा संबंधित वार्डों के खाते में वार्डवार राशि का वितरण कर डाल दिया जाता है.
आवश्यकता पड़ने पर संबंधित वार्ड के पार्षद उसी खाते से राशि निकाल कर लाभुकों को प्रदान करते हैं. मगर इस खाते में भी कई वर्षों से राशि आयी ही नहीं है. नगर पंचायत के रूप में जब यह शहर था तो शहर में 23 वार्ड थे. और इन 23 वार्डों के पूर्व वार्ड पार्षदों व प्रभारी तहसीलदार के नाम से संयुक्त खाता खुला हुआ है. अब 27 वार्ड हो गये हैं और इन 27 वार्डों के लिए तहसीलदार को प्रतिनियुक्त करते हुए संबंधित वार्ड पार्षदों के साथ संयुक्त खाता खुलवाने की जरूरत होगी. इसके लिए भी विभागीय स्तर पर पहल किए जाने की आवश्यकता है.
क्या कहते हैं जवाबदेह
नगर पर्षद बनने के बाद नौ जून 2017 से करीब एक वर्षों तक नगर पर्षद प्रशासक के सहारे चल रहा था. नौ जून 2018 को नया नगर पर्षद बोर्ड का गठन हुआ है. कार्यपालक पदाधिकारी विपिन बिहारी सिंह का स्थानांतरण हो चुका है और नव पदस्थापित नगर कार्यपालक पदाधिकारी ने अभी तक पदभार ग्रहण नहीं किया है, जिसके कारण कार्यपालक पदाधिकारी का पक्ष नहीं मिल सका .
इस संबंध में नगर पर्षद के प्रभारी प्रधान सहायक राम इंजोर तिवारी से उनके मोबाइल पर पूछा गया तो उन्होंने 15 नवंबर 2017 को राशि आने की बात तो स्वीकार की, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि करीब ढाई सौ आवेदन लंबित हैं और जितनी राशि उपलब्ध है,उससे सबों का भुगतान नहीं हो सकता.
इस मद में अधिक राशि की आवश्यकता है.वार्ड विभक्त होने के बाद अब 27 वार्ड हो गए हैं. नये सिरे से संयुक्त खाता खुलने के बाद बैंक खाते में राशि भेजी जायेगी.
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