नाम के जलमीनार : पानी में बह गये रुपये, सूखे रह गये हलक
Updated at : 19 May 2018 4:56 AM (IST)
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जिले में 20 से अधिक जलमीनार पर अधिकतर बेकार औरंगाबाद सदर : लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने को लेकर जिले के सभी प्रखंडों में बने जलमीनार बेकार पड़े हुए हैं. खासकर गर्मी के दिनों में जल की विकट समस्या लोगों के साथ होती है. ऐसे में अगर जिले के जलमीनार कारगर होते, तो लोगों […]
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जिले में 20 से अधिक जलमीनार पर अधिकतर बेकार
औरंगाबाद सदर : लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने को लेकर जिले के सभी प्रखंडों में बने जलमीनार बेकार पड़े हुए हैं. खासकर गर्मी के दिनों में जल की विकट समस्या लोगों के साथ होती है. ऐसे में अगर जिले के जलमीनार कारगर होते, तो लोगों को सुविधा होती. पर, ऐसा बिल्कुल नहीं है. औरंगाबाद जिले में जल की समस्या से निबटने के लिए 20 से अधिक जलमीनार बनाये गये हैं, पर उन सबों का हाल खराब है. एक-दो जलमीनारों को छोड़ दें, तो बाकी किसी जलमीनार से पानी की आपूर्ति नहीं होती है. यूं कहे तो करोड़ों की लागत से बने सभी जलमीनार शोभा की वस्तु बन चुके हैं.
कब, कहां और कितनी लागत से बने हैं जलमीनार
जिले के अंबा में 2014 में 71 लाख 57 हजार 632 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन की क्षमता वाला जलमीनार बना है. दाउदनगर के शमशेरनगर में 2004 में एक करोड़ की लागत से 40 हजार गैलन ,गोह में वर्ष 2012 में 82 लाख पांच हजार 88 रुपये की लागत से 70 हजार गैलन, ओबरा में 1982 में 71 लाख 57 हजार 632 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन, हसपुरा में 2011 में 71 लाख 36 हजार 987 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन,ओबरा के डिहरा में 31 लाख 26 हजार 500 रुपये की लागत से 25 हजार गैलन,देव में 1999 में एक करोड़ की लागत से एक लाख गैलन व 2007 में एक करोड़ की लागत से 40 हजार गैलन,
रफीगंज में 2003 में एक करोड़ 24 लाख 73 हजार रुपये की लागत से 40 हजार गैलन, मदनपुर में एक करोड़ 7 लाख 41 हजार 146 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन ,बारुण में 48 लाख 66 हजार 394 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन , बारुण के सुंदरगंज में 44 लाख 28 हजार 338 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन ,बारुण के दुधार में 96 लाख 49 हजार 192 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन ,दाउदनगर के वर्मा बाजार में 91 लाख 27 हजार 781 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन,औरंगाबाद कर्मा भगवान में एक करोड़ 69 लाख 96 हजार 50 रुपये की लागत से 40 हजार गैलन, दाउदनगर के मिसिर बिगहा में 2003 में बना 40 हजार गैलन व औरंगाबाद में 1968 में बना एक लाख गैलन, दाउदनगर में बना 40 हजार गैलन व देव में 40 हजार गैलन का जलमीनार बना हुआ है. इन जलमीनारों में से अगर दो को छोड़ दें, तो किसी जलमीनार से पानी की आपूर्ति नहीं होती है. गर्मी के दिनों में जब लोगों को पानी की आवश्यकता है, तो ये बड़े-बड़े जलमीनार महज एक शोभा की वस्तु बने हुए हैं.
केवल दो जलमीनारों से होती है आपूर्ति
जिले के बारुण व औरंगाबाद के कर्मा भगवान में स्थित जलमीनार से पानी की आपूर्ति होती है. स्थानीय लोगों को इन जलमीनारों से पानी उपलब्ध करायी जाती है. इन दो को छोड़ दें, तो बाकी जलमीनार मृत पड़े हुए है.
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