यहां डॉक्टर नहीं, दलालों की मर्जी से होता है प्रसव
Updated at : 08 May 2018 5:51 AM (IST)
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औरंगाबाद कार्यालय : डॉक्टरों व कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे सदर अस्पताल की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है. सदर अस्पताल का प्रसव वार्ड अभी महिला दलालों का अड्डा बन गया है. प्रसव से लेकर नवजातों की नाड़ी काटने व चंद मिनट तक देखभाल के लिए भी परिजनों से पैसे की […]
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औरंगाबाद कार्यालय : डॉक्टरों व कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे सदर अस्पताल की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है. सदर अस्पताल का प्रसव वार्ड अभी महिला दलालों का अड्डा बन गया है. प्रसव से लेकर नवजातों की नाड़ी काटने व चंद मिनट तक देखभाल के लिए भी परिजनों से पैसे की वसूली की जा रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि सरकारी अस्पताल में भी प्राइवेट अस्पतालों की तर्ज पर महिला कर्मियों द्वारा पैसे की मांग की जाती है.
जो पैसा देने से मुकरते हैं उन पर या तो ध्यान ही नहीं दिया जाता है या जैसे-तैसे उनका काम निपटा दिया जाता है. हर दिन नर्सों व ममता द्वारा मरीजों के परिजनों से पैसे वसूली का मामला अस्पताल प्रबंधन या उपाधीक्षक के पास पहुंचता है. बावजूद कार्रवाई नहीं होती है. सोमवार की सुबह प्रसव कक्ष में अचानक हो रहे हंगामा की सूचना पर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राजकुमार प्रसाद जब पहुंचे, तो वे वहां की स्थिति को देख कर चौंक गये. पता चला कि पैसे के बंटवारे को लेकर महिला कर्मी हंगामा कर रही थीं. उपाधीक्षक ने प्रसव वार्ड में भर्ती कई महिला मरीजों से जब पूछताछ की, तो पता चला कि किसी से 500, किसी से 1500, तो किसी से ढाई हजार रुपये तक की वसूली की गयी है. राजपुर गांव की महिला ने बताया कि उसके बहू का प्रसव रात में हुआ था. ममता व महिला कर्मचारियों ने उससे 500 रुपये की वसूली कर ली. एक ममता ने उपाधीक्षक को बताया कि कर्मा रोड की एक महिला से ढाई हजार रुपये की वसूली हुई. इसी तरह गंज मुहल्ला के अमना कलीम से 1500 रुपये की वसूली की गयी. प्रसव कराने पहुंचे कई महिलाओं के परिजनों ने जबर्दस्ती पैसा मांगने की शिकायत की.
दोषियों पर जल्द होगी कार्रवाई
उपाधीक्षक ने अस्पताल में कार्यरत ममता कर्मियों के साथ-साथ सरकारी महिला कर्मियों को जमकर फटकार लगायी. उपाधीक्षक ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. दोषियों पर जल्द कार्रवाई होगी. ज्ञात हो कि सदर अस्पताल से दलाली की लगातार शिकायत आ रही है. ममता कार्यकर्ताओं की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध है. जिन्हें प्रसव के बाद बच्चों को देखभाल के लिए रखा गया है,अगर वे अपने काम से वास्ता नहीं रखते हैं, तो ऐसे कर्मियों को रखने से क्या फायदा.
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