बच्चों के बीच बांटीं किताबें व चॉकलेट

Updated at : 25 Jul 2017 11:58 AM (IST)
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बच्चों के बीच बांटीं किताबें व चॉकलेट

बादम गांव में पहुंच कर पुलिसवालों ने सुनीं ग्रामीणों की परेशानियां मदनपुर : आज पुलिस की जिम्मेवारी आम आदमी की सुरक्षा से कहीं आगे निकल चुकी है. इसकी वजह है आम जनता के प्रति सकारात्मक सहयोग और विश्वास. आज एक अनोखा अंदाज मदनपुर पुलिस द्वारा देखने को मिला. मदनपुर थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती पहाड़ की […]

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बादम गांव में पहुंच कर पुलिसवालों ने सुनीं ग्रामीणों की परेशानियां
मदनपुर : आज पुलिस की जिम्मेवारी आम आदमी की सुरक्षा से कहीं आगे निकल चुकी है. इसकी वजह है आम जनता के प्रति सकारात्मक सहयोग और विश्वास. आज एक अनोखा अंदाज मदनपुर पुलिस द्वारा देखने को मिला.
मदनपुर थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती पहाड़ की वादियों में बसा नक्सलग्रस्त इलाके का बादम गांव का माहौल एक विद्यालय के वातावरण में ढल गया. गांव के बच्चे-बूढ़े, महिला-पुरुष सभी विद्यार्थी बन कर शिक्षा ग्रहण करते नजर आये और शिक्षक के रूप मदनपुर पुलिस सबको शिक्षा देते नजर आयी.
मदनपुर थानाध्यक्ष सुभाष राय और सीआरपीएफ बटालियन जी/153 के सहायक कमांडेंट नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में नक्सलग्रस्त क्षेत्रों के लोगों को जागृत करने के उद्देश्य से जनजागरण अभियान चलाया गया. बच्चों के बीच पाठ्यपुस्तक का वितरण करते हुए न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, बल्कि सवाल-जवाब के मनोरंजन में एक-दूसरे से घुल-मिल गये.
सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक रूप से पिछड़ा यह गांव आज भी विकास की राह जोह रहा है. थानाध्यक्ष सुभाष राय ने बच्चों के बीच चॉकलेट का वितरण करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे हम सभी अपने बच्चों के बीच में खेल रहे हैं.
प्रकृति के गोद में बसे इन क्षेत्रों में प्रतिभा की कमी नहीं है. संसाधनों से भरपूर यह क्षेत्र उपेक्षा की मार झेल रहा है और पिछड़ा पड़ा है. जब तक इन क्षेत्रों में शिक्षा का अलख नहीं जगेगी, तब तक इन क्षेत्रों का विकास संभव नहीं है.
सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट नरेंद्र कुमार ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों का विकास नहीं हो पाना सोचने पर मजबूर कर देता है. बेरोजगारी की मार झेल रहा यह गांव विकास की एक झलक के लिए तरस रहा है.
इस गांव के लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं. थानाध्यक्ष व कमांडेंट से वैसे लोगों को चिह्नित किया, जिन्हें समयानुसार विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, राशन, इंदिरा आवास आदि का लाभ नहीं मिला है और उन्हें हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया. युवकों के बीच में खेल की भावना को बढ़ावा देते हुए उनके साथ खेलने की इच्छा जतायी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
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