मनमानी . जिले में सर्वोच्च न्यायालय का आदेश बेअसर अभिभावकों से वसूल रहे रकम

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न्यायिक आदेश के बाद भी प्राइवेट स्कूलों में इनरोलमेंट के नाम पर अभिभावकों से मनमानी रकम वसूली जा रही है. साथ ही प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के निर्णय का भी उल्लंघन हो रहा है. अररिया : नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही प्राइवेट स्कूलों में छात्रों के री एडमिशन अथवा इनरोलमेंट के नाम पर अभिभावकों […]

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न्यायिक आदेश के बाद भी प्राइवेट स्कूलों में इनरोलमेंट के नाम पर अभिभावकों से मनमानी रकम वसूली जा रही है. साथ ही प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के निर्णय का भी उल्लंघन हो रहा है.

अररिया : नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही प्राइवेट स्कूलों में छात्रों के री एडमिशन अथवा इनरोलमेंट के नाम पर अभिभावकों से मनमानी राशि की उगाही का खेल जिले में एक बार फिर से जारी है. री एडमिशन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश भी प्राइवेट स्कूलों पर बेअसर साबित हो रहा है.
अपने ही विद्यालय के छात्रों से वर्ग उन्नति के नाम पर स्कूल संचालकों द्वारा मनमानी राशि की मांग की जा रही है. खास बात यह कि री एडमिशन के नाम पर जिले के कुछ नामी प्राइवेट स्कूल जिला शिक्षा विभाग के आदेश व प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के निर्णय की भी अनदेखी करने में जुटे हैं.
वर्ग उन्नति के नाम पर छात्रों से एडमिशन चार्ज नहीं लेने का है आदेश
स्कूलों में री एडमिशन के नाम पर छात्रों से राशि के मांग को लेकर सर्वोच्चन्यायालय ने कड़ा आदेश जारी कर रखा है.
न्यायिक आदेश के मुताबिक किसी भी स्कूल द्वारा अपने यहां पहली बार नामांकित होने वाले छात्रों से ही नामांकन की राशि ली जा सकती है. इसके बाद वर्ग उन्नति के क्रम में छात्रों से पुन: एडमिशन के नाम पर राशि की मांग को न्यायालय ने अवैध करार दिया है. वर्ष 2014 में न्यायालय द्वारा जारी इस आदेश के बाद बहुत से विद्यालयों ने न्यायालय के आदेश के आलोक में वर्ग उन्नति के नाम पर छात्रों से राशि की मांग को बंद कर रखा है.
लेकिन अब भी जिले के कुछ प्राइवेट विद्यालय ऐसे हैं, जो न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए छात्रों से नामांकन के लिए राशि की उगाही कर रहे हैं.
बेहतर शिक्षा के लिए जाते हैं प्राइवेट स्कूल
जिले के सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन की खराब व्यवस्था का लाभ जिले में प्राइवेट स्कूल बखूबी उठा रहे हैं. बेहतर शिक्षा के लिए अभिभावक प्राइवेट स्कूल में अपने बच्चों को दाखिल करने के लिए बाध्य हैं. अभिभावकों के इसी बाध्यता का लाभ प्राइवेट स्कूल उठाने में लगे हैं. प्राइवेट स्कूल महंगी किताब, आवासीय सुविधा, ट्यूशन फीस, खेलकूद मनोरंजन सहित अन्य सुविधाओं के नाम पर अभिभावकों से बड़ी रकम की मांग करते हैं. अपने बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर अभिभावक स्कूल के सभी मांगों को मानने के बाध्य होते हैं.
कुछ खास संचालक करते हैं मनमानी
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को लेकर एसोसिएशन के अध्यक्ष सूर्य नारायण गुप्ता ने कहा कि जिले के कुछ विद्यालय ही ऐसे हैं, जिनके संबंध में री एडमिशन व अन्य शुल्क में मनमाने बढ़ोतरी की शिकायतें प्राप्त हुई है. उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें ज्यादातर अररिया से ही प्राप्त हुई है.
उनकी मानें तो मुख्यालय के कुछ खास विद्यालयों के संबंध में उन्हें शिकायतें मिली है. एसोसिएशन के अध्यक्ष ने संबंधित मामले में न्यायिक आदेश की अवहेलना सहित एसोसिएशन के निर्णय के पालन नहीं हो पाने पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही एसोसिएशन की बैठक आयोजित कर संबंधित विद्यालयों पर दबाव बना कर उनके मनमानी को रोकने का प्रयास किया जायेगा.
रीएडमिशन के नाम पर वसूली
स्कूल फीस में 30 प्रतिशत का इजाफा
छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के नाम पर जिले के प्राइवेट स्कूल अपनी मनमानी पर उतारू हैं. साल दर साल स्कूल से जुड़ी विभिन्न शुल्क में इजाफा कर प्राइवेट स्कूलों के मुनाफाखोरी का खेल बदस्तूर जारी है. जानकारी मुताबिक इस बार तकरीबन सभी प्राइवेट स्कूलों ने शिक्षा, खेल व अन्य सुविधाओं के नाम पर छात्रों से लिए जाने वाले मासिक शुल्क में भी 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है.
जिन विद्यालयों में मासिक शुल्क पिछले साल 830 रुपये निर्धारित थे. इस वर्ष इसे बढ़ा कर हजार रुपया कर दिया गया है. इतना ही नहीं नामांकन शुल्क में भी इस वर्ष दोगुनी वृद्धि देखी जा रही है. जिस विद्यालय में कक्षा सात में नामांकन के लिए पिछले साल 3300 रुपये लिये गये थे. उसी विद्यालय द्वारा इस वर्ष छात्रों के नामांकन के नाम पर 6 हजार से ज्यादा रकम की मांग की जा रही है.
कहते हैं डीपीओ
निजी विद्यालयों में वर्गोन्नति के नाम पर शुल्क लिया जाना अपराध है. इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने भी निर्देश जारी कर रखा है. अगर कोई विद्यालय ऐसा करता है तो इसकी जानकारी मिलने पर जांच करायी जायेगी. मामला सही पाये जाने पर विद्यालय की प्रस्वीकृति समाप्त करते हुए उसके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने अभिभावकों से अपील किया है कि वे इस तरह के मामले को ले उनके यहां शिकायत करें. कार्रवाई होगी.
मनोज कुमार, डीपीओ स्थापना
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