एक अरब से अधिक की राशि दबाये बैठे हैं छह हजार डिफॉल्टर

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न हो रही है राशि की वसूली, न ही वारंटियों की गिरफ्तारी नीलाम पत्र कार्यालयों से निर्गत हो चुके हैं 500 से अधिक वारंट डिफॉल्टर मिलरों के पास 14 करोड़ से अधिक बकाया अररिया : जिले में लंबे समय से बैंक व अन्य प्रतिष्ठानों की राशि दबा कर बैठे रहने वालों की फेहरिस्त लंबी होती […]

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न हो रही है राशि की वसूली, न ही वारंटियों की गिरफ्तारी

नीलाम पत्र कार्यालयों से निर्गत हो चुके हैं 500 से अधिक वारंट
डिफॉल्टर मिलरों के पास 14 करोड़ से अधिक बकाया
अररिया : जिले में लंबे समय से बैंक व अन्य प्रतिष्ठानों की राशि दबा कर बैठे रहने वालों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है, पर बकाया राशि वसूली के लिए प्रशासन द्वारा उठाया गया कोई भी कदम कारगर साबित नहीं हो रहा है. आलम यह है कि एक अरब से अधिक की राशि अटकी पड़ी है. नीलाम पत्र कार्यालयों में लंबित साढ़े छह हजार से अधिक वादों के विरुद्ध लगभग 500 वादों में वारंट निर्गत किया जा चुका है, पर पुलिस गिरफ्तारी में दिलचस्पी नहीं ले रही है. जिला नीलाम पत्र कार्यालय द्वारा तैयार रिपोर्ट के मुताबिक बकायेदारों से राशि वसूली के लिए जिला व अन्य नीलाम पत्र कार्यालयों में दायर व लंबित वादों की संख्या छह हजार 562 है.
बकाया की कुल राशि एक अरब 16 करोड़ से अधिक है. खास यह कि बड़े बकायादारों में छह मिलर भी शामिल हैं. मिलरों के पास एसएफसी का 14 करोड़ से अधिक का बकाया है. बकायादारों में दो पूर्व कृषि पदाधिकारी व दो तत्कालीन कार्यपालक सहायक भी शामिल हैं. ये सभी सरकारी राशि के गबन के आरोपी हैं. दोषी कृषि पदाधिकारियों व कार्यपालक सहायकों पर कुल मिला कर साढ़े तीन करोड़ से अधिक की राशि बकाया है. मिली जानकारी के अनुसार दायर नीलाम पत्र वादों के विरुद्ध 500 से अधिक बकायेदारों के खिलाफ वारंट निर्गत कर संबंधित थानों को भेजा जा चुका है. बताया जाता है कि दो डिफॉल्टर मिलरों के खिलाफ तो पुलिस वारंट भी निर्गत हो चुका है, लेकिन गिरफ्तारी सिफर है. यह समझ से परे है कि मामूली वादों में कथित दोषियों के घर जा धमकाने व गिरफ्तार कर लेने की धमकी देने वाली पुलिस करोड़ों की राशि वसूली के मामले में लापरवाही क्यों बरत रही है.
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