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vat savitri vrat 2020: वट सावित्री पूजा आज, जानिए वट सावित्री पर कौन सा भक्ति गाना मचा रहा यूट्यूब पर धमाल

By Radheshyam Kushwaha
Updated Date

वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इस वर्ष, वट सावित्री व्रत का त्योहार शुक्रवार आज है. हिंदू परंपरा के अनुसार, वट सावित्री व्रत सभी विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की भलाई और लंबे जीवन के लिए रखा जाता है. वट सावित्री व्रत अमावस्या के दिन रखा जाता है. यह वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 21 मई, 2020 को 09:35 बजे शुरू होती है, और 22 मई, 2020 को 11:08 बजे समाप्त हो राही है. महिलाएं अमावस्या तिथि के दौरान उपवास रखती हैं.

साजन को पंखा डोलाउंगी

वट सावित्री पूजा आज है. यूट्यूब पर साजन को पंखा डोलाउंगी ना, करूंगी वट सावित्री की पूजा साजन को पंखा डोलाउंगी ना हिन्दी गाना धमाल मचा रहा है. अब तक यूट्यूब पर यह गाना लगभग 15 हजार से अधिक बार देखा जा चुका है. इस गाना की आवाज खुशबू उत्तम ने दी है. वहीं एक से बढ़कर एक वट सावित्री पर बनी गीत और कथा सुनी जा रही है.

वट सावित्री व्रत पूजा करने के लिए ये आवश्यक वस्तुएं

पूजा के लिए माता सावित्री की एक तस्वीर या मूर्ति होनी चाहिए. बांस का पंखा, बरगद का पेड़, लाल धागा, कलश (बर्तन), मिट्टी का दीपक, मौसमी फल, पूजा के लिए लाल कपड़ा, सिंदूर-कुमकुम और रोली, भेंट के लिए व्यंजन, अक्षत (चावल का दाना) हल्दी, सोलह श्रृंगार सामान, पानी के साथ पीतल के बर्तन होनी चाहिए.

वट सावित्री व्रत पूजा विधान

सुबह जल्दी उठो, नहाओ और तैयार हो जाओ 'सोलह शृंगार' करना होता है. इसके बाद पूजा की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पूजा की सभी वस्तुओं को एक बांस की टोकरी में ले जाएं और पास के बरगद के पेड़ पर जाए. फिर बरगद के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं और वट देव की पूजा करें, बरगद के पेड़ के पास माता सावित्री की मूर्ति रखें और फिर देवी को सोलह शृंगार ’वस्तुएं अर्पित करें, अन्य प्रसाद जैसे- पानी, फूल, फल, गुड़, रोली-मोली आदि रखें. बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा लपेटें और तीन बार पेड़ की परिक्रमा करें. इसके बाद वट सावित्री व्रत की कथा का पाठ करें, वहीं, कहानी सुनने के बाद, अपनी सास को कुछ पैसे दें और बुजुर्ग लोगों का आशीर्वाद लें. पूजा समाप्त होने के बाद ब्राह्मणों को वस्त्र और फल आदि दान करें.

वट सावित्री व्रत पूजा कथा

वट सावित्री व्रत सावित्री को समर्पित है, जिसने अपने पति सत्यवान को मृत्यु देवता यम द्वारा ले जाने से बचाया था. सावित्री मद्रा देसा के राजा अश्वपति की बेटी थी. उनका विवाह निर्वासन में एक राजकुमार सत्यवान से हुआ था, जो अपने अंधे पिता द्युमत्सेन के साथ जंगल में रह रहे थे. शादी के बाद, सावित्री ने अपने पिता का महल छोड़ दिया और अपने पति और ससुराल वालों के साथ जंगल में रहने लगी. एक समर्पित पत्नी और बहू के रूप में, वह उनकी देखभाल करने के लिए बहुत बड़ी लंबाई में चली गई. एक दिन जंगल में लकड़ी काटते समय सत्यवान का सिर घूम गया और वह एक पेड़ से गिर गया. तब यम, मृत्यु के देवता, सत्यवान की आत्मा को छीनने के लिए प्रकट हुए. इससे आहत होकर सावित्री ने यमराज से अपने पति से अलग न होने की गुहार लगाई. उसने यम से कहा, यदि वह अपने पति की आत्मा को छीन लेती है, तो वह भी उसका पीछा करेगी. सावित्री की भक्ति से द्रवित यमराज ने उसके पति का जीवन लौटा दिया. जल्द ही सत्यवान ने न केवल अपने जीवन को बल्कि अपने खोए हुए राज्य को भी पा लिया.

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