Explained : 19,650 करोड़ के खर्च से कमल के आकार में बना नवी मुंबई एयरपोर्ट, जाहा हदीद आर्किटेक्ट्स का है कमाल

Navi Mumbai Airport : नवी मुंबई एयरपोर्ट की डिजाइन जिस कंपनी ने तैयार की है उसकी आर्किटेक्ट जाहा हदीद को क्वीन ऑफ दि कर्व कहा जाता है, इसकी वजह यह है कि उनकी डिजाइनिंग सीधी रेखाओं में ना होकर कर्व होती हैं. डिजाइन को देखने से ऐसा महसूस होता है कि वो हवा में तैर रही है. क्वीन ऑफ दि कर्व जाहा हदीद की कंपनी ने ही नवी मुंबई एयरपोर्ट की डिजाइन तैयार की है, जो कमल की पंखुड़ियों सा खूबसूरत और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला होगा.

Navi Mumbai Airport : नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बुधवार 8 अक्टूबर से आम जनता के लिए खोल दिया गया. इस एयरपोर्ट का उद्‌घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. यह एयरपोर्ट अपने तरह का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है और इसकी लागत कुल 19,650 करोड़ रुपए है. इस एयरपोर्ट को अदानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स ने विकसित किया है और प्रसिद्ध आर्किटेक्ट जाहा हदीद की कंपनी जाहा हदीद आर्किटेक्ट्स (ZHA) ने इसकी डिजाइन तैयार की है. यह एक बेहतरीन एयरपोर्��� है, जहां यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं दी जाएंगी. इस एयरपोर्ट के निर्माण से लोगों को राहत मिलेगी और वे बिना अत्यधिक भीड़ के अपनी यात्रा संपन्न कर पाएंगे, वह भी बेहतरीन सुविधाओं के साथ.

कमल के आकार का है नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट

कमल के आकार का नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट

नवी मुंबई एयरपोर्ट का डिजाइन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया है. सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में जाहा हदीद आर्किटेक्ट्स कंपनी की डिजाइन को पुरस्कृत किया गया था और वही डिजाइन नवी मुंबई एयरपोर्ट के लिए स्वीकृत किया गया है. यह डिजाइन भारत के राष्ट्रीय फूल कमल से प्रेरित है. टर्मिनल की फ्लोटिंग स्टील और ग्लास के जरिए बनाई गए है, जो कमल की पंखुड़ी जैसी लगती हैं. इसकी तरह की छत होने की वजह से सूरज की रोशनी आसानी से अंदर आती है. यह डिजाइनिंग बेहतरीन विमानन इंजीनियरिंग का उदाहरण है. यहां 12 पंखुड़ी वाले कॉलम और 17 मेगा-कॉलम बनाए गए हैं, जो भूकंप और तेज हवा को सहने की क्षमता रखते हैं. ऐसे डिजाइनिंग जिसमें मजबूती तो होती है,लेकिन वह देखने में हल्की, पारदर्शी और हवा में तैरती हुई प्रतीत होती है.

88 चेक इन काउंटर और 3,700 मीटर का रनवे

नवी मुंबई एयरपोर्ट में यात्रियों की सुविधा के लिए 88 चेक इन काउंटर बनाए गए हैं, जिनमें से 66 पर स्टाॅफ होंगे और 22 काउंटर सेल्फ सर्विस वाले हैं. इस एयरपोर्ट की क्षमता लगभग 20 मिलियन यात्री वार्षिक है. एयरपोर्ट में चार गेट बनाए गए हैं. हवाई अड्डा 1,160 हेक्टेयर में स्थित है. कहा जा रहा है कि यह एयरपोर्ट महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे में बदलाव लेकर आएगा, जिससे राज्य भर में रोजगार, विकास और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा.

कौन थीं जाहा हदीद, जिसकी कंपनी ने तैयार किया है नवी मुंबई एयरपोर्ट

कर्व डिजाइन में तैयार किया गया है नवी मुंबई एयरपोर्ट

जाहा हदीद को क्वीन ऑफ दि कर्व कहा जाता है. उनका पूरा नाम जाहा मोहम्मद हदीद था. बगदाद इराक में जन्मी जाहा एक ब्रिटिश नागरिक और विश्व प्रसिद्ध आर्किटेक्ट थीं. जाहा विश्व की पहली महिला हैं, जिन्हें प्रित्जकर वास्तुकला पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. 2016 में उनका निधन हो गया. जाहा के डिजाइन की खासियत है उसका कर्व. उनकी डिजाइनिंग फ्लोइंग होती है. कहने का अर्थ यह है कि उनकी डिजाइन बहती हुए दिखती हैं. उनके डिजाइन सीधी रेखाओं से अधिक कर्व और प्रवाह पर केंद्रित होती थीं, जिसकी वजह से उन्हें क्वीन ऑफ दि कर्व कहा जाता है. जाहा की डिजाइन की हुई कुछ प्रमुख संरचनाएं हैं -हैदर अलीयेव सेंटर,बाकू, अजरबैजान, ग्वांगझो ओपेरा हाउस,चीन और म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट रोम .

ये भी पढ़ें : Mughal Harem Stories : मुगलों के हरम में रात होते ही छा जाता था अंधेरा, जलती थी सिर्फ एक मशाल; चौंकाने वाली है वजह

POK Protests Explained : क्यों जल रहा है पीओके, भारत से पाकिस्तान गए शरणार्थी क्यों बने हैं विवाद की वजह?

Mughal Harem Stories :  मुगल हरम की औरतों ने मौत की परवाह किए बिना रात के अंधेरे में प्रेम को दिया अंजाम

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >