मोहम्मद युनूस का 7 सिस्टर्स को संप्रभु राष्ट्र बताने का प्रयास क्या साबित करने की कोशिश है ?

Muhammad Yunus : बांग्लादेश के निर्माण के वक्त जिस देश ने उसका सबसे ज्यादा साथ दिया, उसी देश को वहां की अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद युनूस आंखें दिखा रहे हैं. अपने विदाई भाषण में उन्होंने यह स्पष्ट संकेत देना चाहा है कि बांग्लादेश, भारत पर निर्भर नहीं है. उन्होंने यह बताया है कि बांग्लादेश का अपना सम्मान है और वह भौगोलिक रूप से एक मजबूत राष्ट्र है. मोहम्मद युनूस के इस बयान से कोई आपत्ति नहीं है, एतराज इस बात पर है कि उन्होंने हमारे नाॅर्थ–ईस्ट के 7 राज्यों की चर्चा संप्रभु राज्यों के साथ की. वे एक राष्ट्रप्रमुख के तौर पर विदाई भाषण दे रहे थे, तो उन्हें इस बात का इल्म होना चाहिए कि वे जो कह रहे हैं उसके मायने क्या हैं.

Muhammad Yunus : बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद युनूस ने चुनाव के बाद अपने विदाई संदेश में जो कुछ कहा है, वह दोनों देशों के सामान्य होते संबंधों पर बड़ा आघात है. भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों का नाम संप्रभु राष्ट्रों के साथ लेकर आखिर मोहम्मद युनूस बताना क्या चाहते हैं? यह बड़ा सवाल इसलिए भी है क्योंकि दोनों भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग डेढ़ वर्षों से एक तनावपूर्ण रिश्ता बना हुआ है.
5 अगस्त 2024 में छात्रों के प्रदर्शन के बाद जब आवागी लीग की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दिया, तो बांग्लादेश अराजकता की स्थिति में था. उस वक्त देश में माहौल शांत करने और सबकुछ सामान्य करने के लिए एक अंतरिम सरकार की स्थापना हुई थी, जिसके प्रमुख बने थे मोहम्मद युनूस. मोहम्मद युनूस बांग्लादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता भी हैं.

मोहम्मद युनूस ने क्या कहा है?

मोहम्मद युनूस ने अपने विदाई भाषण में कहा कि बांग्लादेश का खुला समुद्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के जुड़ने का दरवाजा है. अपने भाषण के दौरान उन्होंने नेपाल और भूटान जैसे संप्रभु राज्यों के साथ हमारे नाॅर्थ–ईस्ट के 7 राज्यों जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता है उनके जिक्र किया. मोहम्मद युनूस ने जो भाषण दिया वह पूरी तरह से कूटनीतिक बयान है और यह एक संवेदनशील मसला है. लगभग 18 महीने तक सत्ता की जिम्मेदारी संभालने वाले मोहम्मद युनूस ने आखिर क्या सोचकर यह बयान दिया है. क्या वे यह नहीं जानते हैं कि सेवन सिस्टर्स (अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा) भारत के अभिन्न अंग हैं, इस लिहाज से सेवन सिस्टर्स का जिक्र अलग संप्रभु राष्ट्रों के साथ करना बांग्लादेशी राष्ट्र प्रमुख के किस इरादे को दर्शाता है?


क्या मोहम्मद युनूस अपने भाषण में बांग्लादेश को आत्मनिर्भर बताना चाहते थे ?

मोहम्मद युनूस

मोहम्मद युनूस ने अपने भाषण में भारत का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि बांग्लादेश किसी के निर्देशों से नहीं चलता है. इसकी वजह यह है कि भारत ने बांग्लादेश में मारे गए हिंदुओं को लेकर चिंता जताई थी और स्थिति में सुधार करने को कहा था. उन्होंने बांग्लादेश की ताकत को बताने की कोशिश की है और यह कहा है कि दूसरे देश बांग्लादेश के रास्ते से व्यापार करें और अपना माल ढोएं. मोहम्मद युनूस ने अपने बंदरगाहों के प्रयोग की बात भी कही है. कुल मिलाकर वह खुद को लाॅजिस्टिक हब (व्यापार का केंद्र) के रूप में पेश करना चाह रहा है. मोहम्मद युनूस की यह कोशिश बांग्लादेश में निवेश को बढ़ावा देने और अपने देश का रणनीतिक महत्व बढ़ाने की है.

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बांग्लादेश की राजनीति में रेलेवेंट बने रहना चाहते हैं मोहम्मद युनूस : प्रो धनंजय त्रिपाठी

मोहम्मद युनूस ने सेवन सिस्टर्स को लेकर जो बयान दिया है, वह एक विवाद खड़ा करने की कोशिश है. मोहम्मद युनूस बांग्लादेश की राजनीति में बने रहता चाहते थे, वे चुनाव टाल रहे थे, लेकिन दबाव में उन्होंने चुनाव कराया. वे यह चाहते थे कि जमात चुनाव जीत जाए, लेकिन वह भी नहीं हुआ, तो वे महज एक शिगूफा छोड़ रहे हैं, ताकि दोनों देशों के बीच तनाव हो. साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डाॅ धनंजय त्रिपाठी ने कहा कि उनके बयान का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि जनता ने उन्हें नकार दिया है. वे बस बांग्लादेश की राजनीति में रेलेवेंट बने रहने के लिए विवाद खड़ा करना चाहते हैं. उनके बयान को ज्यादा महत्व देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत–बांग्लादेश के संबंध बहुत पुराने हैं और दोनों देश एक अच्छे पड़ोसी की तरह रहना चाहते हैं.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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